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समाज

Passport History: महाराजा से मिली अनुमिति वाली रसीद को कहा जाता था 'पासपोर्ट', ईसा से 450 साल पहले हुई थी शुरुआत

Janjwar Desk
7 Aug 2022 10:58 PM IST
Passport History: महाराजा से मिली अनुमिति वाली रसीद को कहा जाता था पासपोर्ट, ईसा से 450 साल पहले हुई थी शुरुआत
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पासपोर्ट के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे शायद आपके पोस होगा भी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पासपोर्ट का इतिहास क्या है? और कितने वर्ष पहले इसका आगाज़ हुआ था? उस वक्त यह किस स्वरूप में था? जानने के लिए पढ़ें

History of Passport: जब भी आपके मन में हिंदुस्तान से बाहर जाने का खयाल आता होगा तो फिर आपको पासपोर्ट भी जरूर याद आता होगा. क्योंकि इस दस्तावेज के बिना आप हिंदुस्तान से बाहर जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते. यही वो दस्तावेज है जिसकी बदौलत आप एक देश से दूसरे देश की सरहदें पार कर सकते हैं लेकिन क्या कभी आपने पासपोर्ट के इतिहास के बारे में सोचा है? अगर नहीं तो फिर आज हम आपको बताने जा रहे हैं. हालांकि इसका इतिहास बहुत ज्यादा पुराना है लेकिन दिलचस्प भी बहुत है.

क्या है पासपोर्ट का मतलब

आसाना भाषा में कहें तो पासपोर्ट उस दस्तावेज को कहा जाता था जिसे दिखाकर पोर्ट से गुजरत की इजाज़त मिलती थी. पहले जमाने में एयरपोर्ट या जहां नहीं हुआ करते थे तो बंदरगाहों यानी सी-पोर्ट से एक देश से दूसरे देश जाया जाता था. कहा जाता है कि पुराने जमाने में यह एक शाही अनुमति पत्र हुआ करता था. पासपोर्ट शब्द का मतलब की बात करें तो यह एक फ्रेंच शब्द है. जिसका अर्थ किसी पोर्ट से गुजरने या पास होने की अनुमति है. हालांकि बाद में इस शब्द के बहुत से अलग-अलग मतलब निकाले गए लेकिन सभी का मतलब लगभग एक जैसा ही हुआ करता था.

कैसे हुई पासपोर्ट की शुरुआत

टीवी-9 डिजिटल पर छपी एक खबर के मुताबिक,"पासपोर्ट का इतिहास ईसा से भी पहले का है." खबर में बताया गया,"एक बार फारस के राजा ने अपने एक अफसर को उनके नियंत्रण क्षेत्र से बाहर जाने के लिए एक रसीद जारी की थी. वो इस वजह से क्योंकि हर देश की सरहद पर पहरेदार हुआ करते थे. इसलिए फारस के राजा ने रसीद में लिखा था कि उनका अफसर जूडिया जा रहा है. कृपया उसके सफर में मदद की जाए. इसे पासपोर्ट का शुरुआती स्वरूप माना गया."

पासपोर्ट के तेजी से चलन की बात करें तो 19वीं सदी में इसके चलन तेजी से बढ़ने लगा. क्योंकि यूरोप में टूरिज्म बहुत तेजी से बढ़ रहा था. ज्यादा लोगों की आवाजाही के चलते लोगों के चेकिंग करना मुश्किल काम था. ऐसे में एक देश के मुसाफिर को दूसरे देश में यात्रा करने के लिए पासपोर्ट को ही बेहतर ऑप्शन माना गया. हालांकि पहले फोटोग्राफी नहीं थी तो और भी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन टेक्नोलॉजी ने बहुत कुछ आसान बना दिया और पहचान भी बहुत आसान हो गई. इसके स्वरूप की बात करें तो अक्सर मौकों पर ये बदलता रहा है.

भारत में हैं तीन रंग के पासपोर्ट

अक्सर लोगों को यही है पता है कि भारत का पासपोर्ट सिर्फ नीले रंग का होता है. लेकिन भारत नीले के अलावा सफेद और मरून रंग का पासपोर्ट भी होता है. नीले रंग का पासपोर्ट आम लोगों के लिए होता है. वहीं सफेद रंग का आधिकारिक या सरकारी कामकाज के लिए दूसरे देश जाने वाले अफसरों के पास होता है. इसके अलावा मरून रंग का पासपोर्ट भारतीय डिप्लोमेट्स या वरीय सरकारी अफसरों को दिया जाता है.

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