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शादीशुदा होकर लिव इन रिलेशनशिप में रहना अपराध, इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

Janjwar Desk
20 Jan 2021 3:32 AM GMT
शादीशुदा होकर लिव इन रिलेशनशिप में रहना अपराध, इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे संबंध को संरक्षण देने का अर्थ है अपराध को संरक्षण देना, कानून के खिलाफ कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता..

जनज्वार। लिव इन रिलेशनशिप को लेकर समाज मे कई तरह की धारणाएं हैं। हालिया दौर में लिव इन रिलेशनशिप के मामले ज्यादा सामने आए हैं, हालांकि इसपर समाज के विचार बंटे हुए हैं। इन सबके बीच लिव इन रिलेशनशिप पर एक अहम निर्णय सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शादीशुदा होते हुए गैर पुरुष के साथ पति-पत्नी की तरह रहना लिव इन रिलेशन नहीं है, बल्कि यह अपराध की श्रेणी में आता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे संबंध को संरक्षण देने का अर्थ है अपराध को संरक्षण देना। कानून के खिलाफ कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हाथरस जिला के सासनी थाना क्षेत्र की महिला और उसके साथ रह रहे व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए जारी किया है।

याचिका को निष्पादित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जो पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ लिव रिलेशन में रह रहा है, वह भारतीय दंड संहिता के 494 (पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना) और 495 (पहले से किए गए विवाह को छिपाकर दूसरा विवाह करना) के तहत दोषी होगा। इसी प्रकार से धर्म परिवर्तन करके शादीशुदा के साथ रहना भी अपराध है।

कोर्ट ने कहा कि परमादेश विधिक अधिकारों को लागू करने या संरक्षण देने के लिए जारी किया जा सकता है। किसी अपराधी को संरक्षण देने के लिए नहीं। यदि अपराधी को संरक्षण देने का आदेश दिया गया तो यह अपराध को संरक्षण देना होगा।

याचिका के अनुसार याची आशा देवी महेश चंद्र की विवाहिता पत्नी है। दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है। किंतु याची अपने पति से अलग अरविंद के साथ पत्नी की तरह रहती है। कोर्ट ने कहा कि यह लिव इन रिलेशनशिप नहीं है वरन दुराचार का अपराध है, जिसके लिए पुरुष अपराधी है।

याची का कहना था कि वह दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। उनके परिवार वालों से सुरक्षा प्रदान की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादीशुदा महिला के साथ धर्म परिवर्तन कर लिव इन रिलेशनशिप में रहना भी अपराध है। जिसके लिए अवैध संबंध बनाने वाला पुरुष अपराधी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे संबंध वैधानिक नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा कि जो कानूनी तौर पर विवाह नहीं कर सकते उनका लिव इन रिलेशनशिप में रहना , एक से अधिक पति या पत्नी के साथ संबंध रखना भी अपराध है। ऐसे लिव इन रिलेशनशिप को शादीशुदा जीवन नहीं माना जा सकता और ऐसे लोगों को कोर्ट से संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

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