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Nalanda News : हिंदू हो या मुसलमान..बिहार के 5000 की आबादी वाले इस गांव में सबका मुस्लिम सरनेम, बोले-फख्र है इस परंपरा पर

Janjwar Desk
14 Jun 2022 5:34 AM GMT
Nalanda News : हिंदू हो या मुसलमान..बिहार के 5000 की आबादी वाले इस गांव में सबका मुस्लिम सरनेम, बोले-फक्र है इस परंपरा पर
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Nalanda News : हिंदू हो या मुसलमान..बिहार के 5000 की आबादी वाले इस गांव में सबका मुस्लिम सरनेम, बोले-फक्र है इस परंपरा पर

Nalanda News : गिलानी गांव के कई लोग जो दशकों से प्रदेश से बाहर रहे हैं वह भी अपने नाम के आगे गिलानी लगाते हैं, उनके नाम से ही पता चल जाता है कि वे किस गांव के हैं....

Nalanda News : इस समय जब देश में हिंदू-मुस्लिम की डिबेट चल रही है। ऐसे माहौल में बिहार में पांच हजार की आबादी वाला एक ऐसा गांव भी है जहां सब एक ही सरनेम 'गिलानी' (Gilani Surname) रखते हैं। दरअसल नालंदा (Nalanda News) के इस गांव का नाम ही 'गिलानी है'। सभी लोग गर्व से सदियों से अपने नाम के पीछे गिलानी लगाते हैं। नई युवा पीढ़ी भी अपने नाम के पीछे गिलानी जोड़ने पर फक्र महसूस करती है। वह अपने गांव और वहां की मिट्टी से प्यार करते हैं।

गिलानी गांव के कई लोग जो दशकों से प्रदेश से बाहर रहे हैं वह भी अपने नाम के आगे गिलानी लगाते हैं। उनके नाम से ही पता चल जाता है कि वे किस गांव के हैं। इसी तरह अस्थावां के अस्थानवी, हरगावां के हरगानवी, डुमरावां के डुमरानवी, उगावां के उगानवी, चकदीन के चकदीनवी और देसना गांव के लोग देसनवी सरनेम लगाते हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक गांव की सबा आजम गिलानी ने बताया कि मुगल काल से ही यह परंपरा चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस्लाम के एक अनुयायी हजरत अब्दुल कादिर जिलानी के नाम से 'गिलानी' नाम रखा गया है। अरबी में 'ग' अक्षर नहीं होता, इसलिए लोग उनको जिलानी कहते हैं। इस वजह से गांव का पूरा नाम मोहीउद्दीन गिलानी है।

मौलाना मुजफ्फार गिलानी की किताब 'मजमीन' के मुताबिक, गिलान एक जगह का नाम है जहां बड़े पीर के अनुयायी रहा करते थे। वहां से किसी कारणवश कुछ लोग मोहीउद्दीनपुर गिलानी आए थे। उन लोगों के सरनेम में भी गिलानी लगा था। यहां उन लोगों के प्रभाव और आपसी सौहार्द को देखकर लोग अपने नाम के सरनेम में गांव का नाम लगाने लगे।

नालंदा जिले (Nalanda News) के इस गांव की कुल आबादी पांच हजार है। इसमें मुस्लिम समुदाय के अलावा हिंदू धर्म के पासवान, कोइरी, यादव, नाई, रविदास, कहार, कुम्हार, पंडित जाति के लोग रहते हैं। दोनों धर्म के लोग अपने-अपने नाम के पीछे गिलानी सरनेम का उपयोग करते हैं।

गांव के निवासी इमदाद अहसान गिलानी कहते हैं कि वो इस बात पर फख्र महसूस करते हैं कि अपने नाम के बाद गिलानी शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यहां हिदूं-मुस्लिम सभी अपने नाम के आगे गिलानी लगाते हैं। पुराने से लेकर अब नए लोग भी इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।

बस अतर यह आया है कि पुरानी पीढ़ी के लोग जाति का टाइटल लगाने के बाद गिलानी शब्द लगाते थे। लेकिन युवा पीढ़ी के लोग जाति को हटाकर नाम के साथ सीधे गिलानी लगाते हैं। जैसे अनिल कुमार गिलानी, इमरान गिलानी, अभिषेक गिलानी नाम के लोग गांव में रहते हैं और इस सरनेम का इस्तेमाल करते हैं।

गांव के लोगों की मानें तो मोहिउद्दीनपुर गिलानी सदियों पुराना गांव है। यहां एक नहीं अनेकों विद्वान, साहित्यकार, कई आईएएस, इंजीनियर, डॉक्टर हुए हैं। इतना ही नहीं यहां के लोग विदेशों में भी परचम लहरा चुके हैं। गांव निवासी मौलाना मनाजिर अहसान गिलानी किताब विश्व प्रसिद्ध है। उनकी 14 किताबें विश्व प्रसिद्ध हुई हैं। यह गांव आम के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।

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