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Singhu Border News : कौन हैं निहंग सिख, जिन्हें गुरु ग्रन्थ साहिब में भगवान और अहंकारी दोनों की मिली उपमा

Janjwar Desk
16 Oct 2021 3:30 AM GMT
Singhu Border News : कौन हैं निहंग सिख, जिन्हें गुरु ग्रन्थ साहिब में भगवान और अहंकारी दोनों की मिली उपमा
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Singhu Border News : सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने जब खालसा पंथ की स्थापना की, उसी के साथ ही निहंग फौज की भी शरुआत हुई।

Nihang Sikhs। सिख समुदाय में एक निहंग सिख (Nihang Sikhs) होते हैं जो धार्मिक रूप काफी ज्यादा कट्टर माने जाते हैं। निहंग का फारसी भाषा में अर्थ 'मगरमच्छ' होता है। गुरु शबद रत्नाकर महान कोश के अनुसार निहंग शब्द के कई मतलब हैं- तलवार, कलम, घोड़ा, मगरमच्छ। जो बिना किसी शंका के हो यानी निशंक। जिसका किसी से मोह न हो, निसंग। श्री गुरु ग्रंथ साहिब और श्री दशम ग्रन्थ साहिब (Dasham Guru Granth Sahib) में ये शब्द इस्तेमाल हुआ है। श्री दशम ग्रन्थ साहिब में गुरु गोविंद सिंह (Guru Govind Singh) के उपदेश हैं।

ये स्वाभाविक तौर पर ज्यादा आक्रामक प्रवृत्ति के होते हैं। निहंग सिख एक तरह से सिखों की परम्परागत आर्मी है। सिख धर्म में ये एक धार्मिक योद्धा के तौर पर जाने जाते हैं। निहंग सिखों के दसों गुरूओं के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन करते हैं। ये लड़ने की भावना से हमेशा ओत- प्रोत रहते हैं। इनके बारे ये माना जाता है कि सिखों के दसों गुरुओं के काल में ये सिख साहिबानों के प्रलब प्रहरी हुआ करते थे। तभी से धर्म की रक्षा की भावना इनके अंदर आजतक जीवित है।

निहंग कौन होते हैं

निहंगों का पहनावा और तौर-तरीका बाकी सिखों की तुलना में अलग होता है। निहंग सिख ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और मोह-माया और घर परिवार से दूर रहते हैं। इन्हें लोग सिखों के धर्म रक्षक के तौर पर देखते हैं। निहंगों को लेकर सिख धर्म ग्रन्थ और इतिहास में कई तरह से वर्णन हैं। गुरमुखि में एक लाइन है 'आए ने निहंग, बुआ खोल देओ निसंग, निहंग कहावे सो पुरख, दुःख सुख मने न अंग' गुरु की लाड़ली फौज़ जिसे समाज में वो दर्जा हासिल था कि बोले जाता था घर का दरवाजा खोल दो, डरने की कोई बात नहीं है, निहंग आ गए हैं। ये लाइन निहंगों के बारे बताने के लिए काफी है कि सिख धर्म में इनका ओहदा कितना बड़ा है।

खास किस्म का चोला, केसरिया परने से कमर बांधे, पगड़ी की तरह-तरह के हथियार, दुमाला , खांडा ,बरछा या तलवार लेकर चलने वाले इन निहंगों की दुनिया काफी अनोखी हैं। सिखों के 5वें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी 'निहंग' शब्द का प्रयोग श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के 352 पेज पर किया है। निहंगा - "निर्भयो होयो, भया निहंगा " इसका अर्थ ये होता है कि निहंग निर्भय और निडर होते हैं ये किसी से नहीं डरते। लेकिन एक चीज ध्यान में रखना चाहिए कि गुरबानी की इस पंक्ति में यहां 'निहंग' शब्द का प्रयोग अच्छे व्यक्ति, 'गुरुमुख ',भगत या सिख के लिए नहीं किया गया है।

हालांकि कई जगह निहंग का वर्णन एक सिख योद्धा एक तौर पर भी है जो धर्म की रक्षा के लिए युद्ध करता हो। ऐसे नहीं है कि गुरबानी में 'निहंग' का प्रयोग बस बुरे लोगों के लिए ही हुआ है। 'निर्भय' शब्द का प्रयोग गुरबानी में भगवान के लिए भी हुआ हुआ। ये शब्द न ही बुरा है, न ही अच्छा है। इस शब्द का प्रयोग अच्छे और बुरे दोनों व्यक्ति के लिए होता है। गुरबानी में 'निहंग' का प्रयोग आदमी के लिए भी है जो भगवान को भूल गया है। जो अहंकार में लिप्त हो और और उसके अहंकार से जनता का उत्पीड़ित हो।

चोला

निहंगों का नीला चोला इनके शुरुआत की जड़ है। हालांकि आज के आधुनिक निहंग सिख नीला चोला के अलावा केसरिया और सफेद रंग का भी चोला पहनते हैं। निहंगों के सबसे बड़े संगठन बुद्धा दल के प्रमुख जथेदार सांता सिंह ने केसरिया 'चोला' भी पहना है। हालांकि ज्यादातर निहंग नीला चोला ही पहनते हैं। नीले चोले के कई किस्से और कहानियां हैं उसमें से एक कहानी ये भी है कि गुरु नानक ने मक्का में नीला चोला पहना था। इतिहासकार भाई गुरदास जी लिखते हैं - बाबा फिर मक्के गया, नील बस्त्र धरे बनवारी, (बाबा {गुरु नानक} फिर नीले वस्त्र पहनकर 'मक्का' गए)। ये एक भेस के उद्देश्यों के लिए था क्योंकि एक गैर मुस्लिम के लिए 'मक्का' शहर में प्रवेश करना संभव नहीं था, इसलिए गुरुदास जी ने मुस्लिम पोशाक पहन ली। उन्होंने न केवल नील रंग के वस्त्र पहने बल्कि 'मुसल्ला (प्रार्थना चटाई ) और अन्य मुस्लिम सामग्री भी ले ली।

कैसे हुई निहंग की शुरुआत

सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने जब खालसा पंथ की स्थापना की, उसी के साथ ही निहंग फौज की भी शरुआत हुई। खालसा के साथ ही योद्धाओं की एक रिज़र्व आर्मी के तौर पर निहंगों खड़ा किया गया। उस वक्त इनका काम यही था कि शस्त्र विधा का ज्ञान लेना और जंग के लिए तैयार रहना। डॉ. बलवंत ढिल्लन कहते हैं कि गुरु गोविंद सिंह के छोटे बेटे फतेह सिंह (1699-1705 ) एक बार नीला चोला पहने हुए गुरु की उपस्थिति में प्रकट हुए एक डुमाला (कपड़ा का टुकड़ा) के साथ नीली पगड़ी में अपने बेटे को इतने प्रतापी रूप में देखकर गुरु ने कहा कि यह खालसा के लापरवाह सैनिकों, यानी अब ये नीली पोशाक निहंगों की होगी।

सिखों से किस तरह अलग होते हैं निहंग ?

- निहंग सिख रोज गुरबानी का पाठ करते हैं और अपने खास किस्म बाणे (वस्त्र ) में रहते हैं।

- निहंग सिख को शस्त्र विधा में महारत हासिल होती है। यही इनकी खास पहचान है।

- निहंग सिख गुरु ग्रंथ साहिब को मानने के साथ-साथ श्री दशम ग्रन्थ साहिब और सरबलोह ग्रन्थ को भी मानते हैं।

- निहंग सिख हमेशा अमृत धारण किये होते हैं

- निहंग कभी धूम्रपान नहीं करते, बल्कि ज्यादा मात्रा में भांग और कभी कभी सूखी अफीम का सेवन करते हैं।

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