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Indian Air Force : कहां गया जनता का दिया टैक्स कि भारतीय वायुसेना खरीद रही 24 सेकेंड-हैंड मिराज विमान

Janjwar Desk
20 Sep 2021 1:32 PM GMT
Indian Air Force : कहां गया जनता का दिया टैक्स कि भारतीय वायुसेना खरीद रही 24 सेकेंड-हैंड मिराज विमान
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(डगमगाते आर्थिक हालातों के बीच 24 सेकेंड हैंड मिराज लड़ाकू विमानों की डील)

Indian Air Force : वायुसेना ने इन 24 सेकेंड हैंड लड़ाकू विमानों के लिए 27 मिलियन यूरो (करीब 2.33 अरब रुपये) का सौदा किया है....

Indian Air Force जनज्वार। देश में डगमगाती अर्थव्यवस्था (Economy) और बढ़ती बेरोजगारी (Unemployement) के साथ महंगाई (Inflation) की मार से आम आदमी का तेल निकल रहा है। जबकि सरकार चुनाव से पहले राफेल (Rafale Deal) के बाद अब मिराज (Mirage 2000) खरीदने जा रही है जिसके लिए उसने फ्रांस से समझौता किया है।

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) जल्‍द अपनी हवाई ताकत को और बढ़ाने जा रही है। वायुसेना चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के अपने पुराने बेड़े और अपने दो मौजूदा स्क्वाड्रनों को मजबूत करने के तहत 24 सेकेंड हैंड मिराज 2000 लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रही है। इन विमानों को दसॉल्‍ट एविएशन तैयार करेगी।

भारतीय वायुसेना ने अपने मिराज-2000 विमानों के बेड़े को बरकरार रखने के लिए फ्रांस की वायु सेना से चरणबद्ध तरीके से हटाए गए मिराज विमानों को खरीदने के सौदे पर हस्ताक्षर किया है। इससे भारतीय वायु सेना का मिराज बेड़ा लंबे समय तक सेवा में बना रहेगा। बालाकोट में आतंकी कैंप पर एयर स्ट्राइक (Air Strike) में भी इन्हीं विमानों का इस्तेमाल किया गया था। इन विमानों ने स्पाइस-2000 बम दागे गए थे।

फ्रांस (France) की वायु सेना ने कुछ दिन पहले मिराज जेट की एक स्वाड्रन को सेवा से बाहर किया था, इन विमानों को खरीदने के लिए 31 अगस्त को एक करार पर हस्ताक्षर किए गए। करार के तहत फ्रांस (France) की वायुसेना से बाहर किए गए विमानों को भारत लाया जाएगा। इनमें से किसी भी विमान को उड़ाने के लिए काम नहीं लिया जाएगा, बल्कि इनके कलपुर्जों से भारत के 50 मिराज-2000 विमानों के बेड़े को लंबे समय तक सेवा में बनाए रखने की क्षमता में सुधार आएगा। बीते वर्ष भी इसी तरह के समझौते के तहत कुछ विमान ग्वालियर पहुंचे थे।

'हिंदुस्‍तान टाइम्‍स' की रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना ने इन 24 सेकेंड हैंड लड़ाकू विमानों के लिए 27 मिलियन यूरो (करीब 2.33 अरब रुपये) का सौदा किया है। 24 में से 8 विमान उड़ने के लिए तैयार स्थिति में हैं। इनकी प्रति विमान कीमत 1.125 मिलियन यूरो होगी। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि विमानों को जल्द ही कंटेनरों के जरिये भारत भेज दिया जाएगा।

वायुसेना के पास 35 साल पुराना मिराज लड़ाकू विमानों का बेड़ा है। इन्‍हीं विमानों ने 2019 में बालाकोट ऑपरेशन (Balakot Operation) के दौरान असाधारण प्रदर्शन किया था। अब इन विमानों को अपग्रेड करने पर काम चल रहा है। विमान फ्रांस में बनाए जा रहे हैं और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया इनकी खरीद के लिए वहां जा सकते हैं।

24 लड़ाकू विमानों में से 13 इंजन और एयरफ्रेम के साथ पूरी तरह से तैयार स्थिति में हैं, जिनमें से आठ (लगभग आधा स्क्वाड्रन) सर्विसिंग के बाद उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। बचे हुए 11 लड़ाकू विमान आंशिक रूप से तैयार हैं।

खरीद भविष्य के अधिग्रहण के लिए भारत में स्पेयर पार्ट्स और इंजन आपूर्ति श्रृंखला को स्थानांतरित करने के महत्व पर प्रकाश डालती है। जब तक नरेंद्र मोदी सरकार ने 4.5 पीढ़ी के राफेल लड़ाकू विमान (डसॉल्ट से भी) हासिल करने का निर्णय नहीं लिया, तब तक मिराज 2000 भारत की अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान था, जो कारगिल युद्ध के बाद से इस स्थिति में है।

विशेषज्ञों ने कहा कि अंतिम समय में इस अधिग्रहण से जो दूसरा मुद्दा निकलता है, वह यह है कि भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना को अपने लड़ाकू अधिग्रहण की योजना बनानी चाहिए ताकि दोनों बलों के बीच तालमेल बना रहे और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में सामंजस्य बना रहे। यह रक्षा मंत्रालय को देश के लड़ाकू बेड़े को फिर से भरने के निर्णयों में तेजी लाने की आवश्यकता की ओर भी इशारा करता है, क्योंकि चीन पहले ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और सशस्त्र ड्रोन में स्थानांतरित हो चुका है।

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