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Anjhula Mya Singh Bais : मिलिए एक PhD धारक Human Right activist सुपर मॉडल डॉ अंझुला माया सिंह बैस से

Janjwar Desk
28 Sep 2021 3:09 PM GMT
Anjhula Mya Singh Bais : मिलिए एक PhD धारक Human Right activist सुपर मॉडल डॉ अंझुला माया सिंह बैस से
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अंझुला माया बैस : ग्लैमर से लेकर मानवाधिकार तक की यात्रा Photo: Keat, thestar

ग्लैमर और विज्ञान के क्षेत्र में ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली डॉ अंझुला माया सिंह बैस मानती हैं कि पितृसत्ता सोच वाले समाज में महिलाएं या तो साज-सज्जा करेंगी या पढ़ाई-लिखाई...

जनज्वार। महज 18 साल की उम्र में मॉडलिंग के क्षेत्र से अपने करियर की शुरुआत करने वाली डॉ अंझुला माया सिंह बैस आज वैश्विक स्तर अपनी पहचान बना चुकी है। एक सफल सुपरमॉडल के साथ साथ वे एक अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक और एक्टिविस्ट हैं। वर्तमान में वे एमनेस्टी इंटरनेशनल के इंटरनेशनल बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष के पद पर काम कर रहीं है। अपने जीवन के अबतक के कार्यकाल में डॉ अंझुला ने जो कुछ भी सीखा वो अब एमनेस्टी इंटरनेशनल बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष के पद पर रहकर अन्य लोगों तक पहुंचाना चाहती है। डॉ अंझुला नारीवाद समर्थक हैं और मानवधिकार और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर वे विश्व स्तर पर काम करती हैं। इनका मानना है कि किसी भी महिला को एक दायरे में सीमित करना गलत है।

वैश्विक स्तर पर विज्ञान और ग्लैमर की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली डॉ अंझुला का जन्म दिल्ली में हुआ। डॉ अंझुला के अनुसार मनोवैज्ञानिक बनने के गुण उनमें बचपन से ही थे। वे लोगों से बात करने में हिचकिचाती नहीं थी। उनके दोस्त और परिजन उनसे रिश्तों को लेकर राय मांगने आया करते थे। राजपूत परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंझुला ने अपने दादा से समस्याओं को न्यायसंगत तरीके से सुलझाने की कला सिखी और वे मानती हैं कि दादा से मिले इन गुणों का अमल करके ही आज वे इस मुकाम तक पहुंच पायी हैं। लखनऊ से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ अंझुला ने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से दर्शनशास्त्र के साथ मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। जिसके बाद उन्होंने लंडन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से मनोविश्लेषण में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और फिर शिकागो स्कूल ऑफ प्रोफेशनल साइकोलॉजी से अंतर्राष्ट्रीय मनोविज्ञान में PhD की उपाधि प्राप्त की।

ग्लैमर और विज्ञान के क्षेत्र में ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली डॉ अंझुला माया सिंह बैस मानती हैं कि पितृसत्ता सोच वाले समाज में मान लिया जाता है कि महिलाएं या तो साज सज्जा करेंगी या पढ़ाई लिखाई के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करेंगी। पर लोग समझते हैं कि महिलाएं एक से ज्यादा काम साथ में नहीं कर सकती। डॉ अंझुला इस बात से न केवल भिन्न राय रखती हैं बल्कि उन्होंने फैशन और विज्ञान, दोनों क्षेत्र में विशेष सफलता पाकर उन तमाम नई पीढ़ी की युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं जो एक साथ दो या उससे ज्यादा कामों में दिलचस्पी रखती हैं और उन क्षेत्रों में सफलता पाने का हौसला भी रखती हैं।फैशन के साथ साथ पढ़ाई लिखाई में रूची रखने वाली डॉ अंझुला पितृसत्ता समाज में मिले अपने कड़वे अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन सम्मेलन में उनसे पूछा गया कि वे अगर नारीवाद को मानती हूं फिर लिपस्टिक कैसे लगा सकती हैं और जब एक बार सब्यसाची के लिए मॉडलिंग करने के दौरान जब वे बौद्ध दृष्टिकोण से परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में पढ़ रही थी तब भी उनसे किसी ने कहा कि आप मॉडलिंग क्यों कर रही हैं, आपको तो किसी और क्षेत्र में काम करना चाहिए।


डॉ अंझुला कहती है कि पितृसत्ता समाज में कोई मॉडल पीएचडी क्यों नहीं कर सकती? पितृसत्तात्मक सोच के कारण दुनिया भर में महिलाओं की भूमिकाओं को सीमित करने का इतिहास रहा है। हर समय महिलाओं को बताया जाता है कि आपको ऐसा करना चाहिए या ऐसा होना चाहिए और यह चीजें लोगों के मनोवैज्ञानिक संघर्ष का कारण बनता है। यदि कोई मॉडल पीएचडी करना चाहती है तो वे कर सकती हैं या उनके हिसाब से जो उनके लिए बेहतर हो वो करने का सबको मानव अधिकार प्राप्त है।

करियर को लेकर कई विकल्प होने के बारे में डॉ अंझुला मानती हैं कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से एक मनोचिकित्सक बनना रहा। वे केवल मॉडल बनना कभी नहीं चाहती थीं। विभिन्न करियर ऑप्शन के बारे में अंझुला कहती हैं कि वे वॉरेन बफे द्वारा कही गई बात को हमेशा मानती हैं, जिसके अनुसार हमें अपनी करियर लिस्ट में 25 चीजें रखनी चाहिए। सोच समझकर उनमें से 20 को भूल जाइए और बचे पांच ऑप्शन में ही से चुनिए।

आपको बता दें कि डॉ अंझुला एक लंबे वक्त से मलेशिया में रह रहीं हैं और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड में शामिल होने वाली वे पहली मलेशियाई व्यक्ति हैं। डॉ अंझुला ने 2016 में जमीनी स्तर पर एमनेस्टी के लिए वॉलंटियर के तौर पर काम किया और 2017 से 2019 तक वे एमनेस्टी मलेशिया बोर्ड की अध्यक्ष रहीं। डॉ अंझुला विश्व आर्थिक मंच की युवा वैश्विक नेता भी हैं। कुआला लंपुर में वे अपना मनोविज्ञान अभ्यास केन्द्र चलाती हैं, और समूह गुड होप के साथ सलाहकार के तौर पर काम भी करती हैं। इसके अलावा वे विश्व आर्थिक मंच (WEF) के लिए एक विशेषज्ञ के रुप में भी योगदान करती हैं। डॉ अंझुला मानती हैं पूर्व में किए सभी कामों से मिले अनुभव उन्हें एमनेस्टी में काम करने के दौरान काफी मददगार साबित हुए।

अपने मॉडलिंग के बारे में अंझुला कहती हैं कि एमनेस्टी इंटरनेशनल के इंटरनेशनल बोर्ड के अध्यक्ष पद पर रहने के साथ अगर उन्हें कोई मॉडलिंग का अच्छा प्रोजेक्ट मिलता है, तो मैं उसे करने की जरूर सोचेंगी। अंझुला मानती हैं कि एमनेस्टी में मानवधिकारों के लिए काम करते हुए उन्होंने मॉडलिंग को कभी भी आधिकारिक तौर पर अलविदा नहीं कहा। इसलिए वे मॉडलिंग आगे जारी रखेंगी बशर्ते कि ब्रांड सही हो और शोषणकारी न हो तो वे हमेशा मॉडलिंग जारी रखेंगी, पर अपने मुल्यों के साथ समझौता करके वे मॉडलिंग के क्षेत्र में कभी आगे बढ़ना नहीं चाहेंगी।

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