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विमर्श

बिना आंकड़ों की मोदी सरकार कहती है कोरोना में 1 करोड़ से अधिक मजदूरों ने किया पलायन, मगर मौतों का क्यों नहीं पता

Janjwar Desk
17 Sep 2020 7:43 AM GMT
बिना आंकड़ों की मोदी सरकार कहती है कोरोना में 1 करोड़ से अधिक मजदूरों ने किया पलायन, मगर मौतों का क्यों नहीं पता
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मोदी जी में देशप्रेम का जज्बा इस कदर भरा है कि हमारे 20 सैनिकों की मौत के बाद भी उन्होंने कहा था कि न तो कोई घुसपैठ हुई है, मगर उनके रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अनगिनत बार बता चुके हैं कि चीन ने हमारा बड़ा भू-भाग कब्जाया है....

महेंद्र पाण्डेय का विश्लेषण

अब सरकार के पास प्रवासी मजदूरों की सड़क यात्रा में मौतों के आंकड़े नहीं हैं। वैसे यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले सरकार के पास गाय के नाम पर मारे गए लोगों की संख्या नहीं थी। बजट भाषण के समय देश के इतिहास की सबसे नकारा वित्त मंत्री के पास बेरोजगारी के आंकड़े नहीं थे।

बजट भाषण देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, यदि मैं कह दूं कि देश में एक करोड़ बेरोजगार हैं, तो राहुल गांधी इसे ही मुद्दा बना लेंगे। वैसे सरकार के पास तो नोटबंदी से सम्बंधित आंकड़े भी नहीं थे। जनता के अहित का काम करते रहना और उसे बरगलाते रहना इस सरकार की विशेषता है।

आंकड़े नहीं होने के अनेक फायदे हैं – मुवावजा नहीं देना पड़ता और फिर प्रधानमंत्री और मंत्री अपनी मर्जी से, समय और परिस्थिति के अनुसार, कोई भी आंकड़ा जनता के सामने बता सकते हैं और तालियों के साथ वोट भी झटक सकते हैं।

आश्चर्य यह है कि सरकार को यह पता है कि एक करोड़ से अधिक मजदूरों का पलायन कोविड 19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान हुआ था, पर यह नहीं पता कि कितने श्रमिकों की मौत हुई। दूसरी तरफ सरकार के लगभग सभी मंत्रियों को तबलीगी जमात के एक-एक आंकड़े पता थे। सरकार को तो अब कोविड 19 के आंकड़े भी नहीं पता होंगे, यह भी नहीं पता होगा कि जिन कोरोना वार्रिएर्स के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टरों से फूल बरसाए गए, उनमें से कितने कोविड 19 की भेंट चढ़ गए।

जाहिर है तथाकथित न्यू इंडिया बिना आंकड़ों का ही होगा। वैसे, यदि गहराई से चिंतन करें तो जिस न्यू इंडिया की बात बार-बार की जाती है, उसे इंडिया को नष्ट किये बिना तो बनाया नहीं जा सकता और हमारी सरकार अभी इंडिया, जिसे हम आज तक जानते रहे हैं, उसके आंकड़े को नष्ट कर रही है, कुचल रही है।

इस मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प और हमारे प्रधानमंत्री में दिलचस्प समानता है। प्रधानमंत्री लगातार न्यू इंडिया की चर्चा करते हैं और ट्रम्प मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का नारा लगाते हैं। जाहिर है मोदी जी इंडिया से मुक्ति चाहते हैं और ट्रम्प अमेरिका से – और इस कुचक्र में दोनों देशों का भविष्य दुनिया देख रही है। इसे केवल संयोग नहीं कहा जा सकता कि कोविड 19 ने भी इन्हीं दोनों देशों को निशाना बनाया है।

तीन वर्ष अमेरिका में एक पुस्तक प्रकाशित की गयी थी, फीयर: ट्रंप इन द व्हाइट हाउस। इस पुस्तक के लेखक हैं, बॉब वुडवॉर्ड। बॉब वुडवॉर्ड दुनिया में सबसे प्रमुख खोजी पत्रकारों में एक हैं और पिछले 5 दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े है। वे अबतक कुल 9 अमेरिकी राष्ट्रपतियों का ज़माना देख चुके हैं, और रिचर्ड निक्सन के समय के मशहूर वाटरगेट स्कैंडल को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

ध्यान रहे कि इस स्कैंडल के उजागर होने के बाद, सर्वशक्तिमान माने जाने वाले निक्सन को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। बॉब वुडवॉर्ड ने अनेक चर्चित किताबें लिखी हैं – आल द प्रेसिडेंट्स मेन, बुश एट वार, द लास्ट ऑफ़ द प्रेसिडेंट्स मेन, द प्राइस ऑफ़ पॉलिटिक्स, स्टेट ऑफ़ डिनायल इनमें प्रमुख हैं। कुछ पुस्तकों पर तो फ़िल्में भी बनायी गयीं।

बॉब वुडवॉर्ड ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि ट्रम्प को आंकड़ों से चिढ़ है और वे परिस्थिति के अनुसार किसी भी आंकड़े में परिवर्तन कर सकते हैं, इसीलिए जनता उनके भाषणों को गंभीरता से नहीं लेती। अपने देश में भी प्रधानमंत्री मोदी का यही हाल है, यदि यकीन नहीं हो तो उनके चुनावी भाषणों पर गौर कीजिये, जितने देश में युवा नहीं होंगे, उससे अधिक लोगों को भाषणों में बेरोजगार मिल जाता है।

आंकड़ों से अलग भी देखें तो, मोदी जी और ट्रम्प में एक और बड़ी समानता है – फेक न्यूज़ के सोशल मीडिया पर और भाषणों में प्रचार-प्रसार की। हाल में ही ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया। सेना के गौरव से सम्बंधित इस पोस्टर में तीन लड़ाकू विमान हवा में उड़ रहे हैं और इसके नीचे जमीन पर पांच सैनिक खड़े हैं।

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का नारा देने वाले और अपनी सैन्य शक्ति को बताने बाले ट्रम्प के इस पोस्टर में जो विमान हैं, वे रूस निर्मित मिग 29 है, और सैनिकों के पास जो हथियार हैं वे भी रूस निर्मित हैं। हालां कि विवाद के बाद इस पोस्टर को हटा दिया गया, पर इससे ट्रम्प का फेक न्यूज़ प्रेम तो उजागर हो ही जाता है। इससे यह भी समझ आता है कि ट्रम्प अपनी जनता को किस कदर तक बेवकूफ समझते हैं।

यही हालत हमारे देश की है, कुछ वर्ष पहले किसी मंत्रालय की रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान की जगमगाती सीमा को दिखाने के लिए किसी यूरोपियन देशों की सीमा की तस्वीर लगाईं गई थी।

मोदी जी में देशप्रेम का जज्बा इस कदर भरा है कि हमारे 20 सैनिकों की मौत के बाद भी उन्होंने कहा था कि न तो कोई घुसपैठ हुई है और ना ही हमारी सीमा में कोई आया है। यही नहीं, अनगिनत बार देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा का वचन दे चुके मोदी जी के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बताते हैं कि चीन ने हमारा बड़ा भू-भाग कब्जाया हुआ है।

ट्रम्प अमेरिका की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, भूगोल सब नष्ट कर मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का नारा लगा रहे हैं और यहाँ मोदी सरकार अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, सामाजिक तानाबाना नष्ट कर न्यू इंडिया का निर्माण कर रही है।

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