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विमर्श

Children's Day 2021: जानें-बाल दिवस का इतिहास और महत्व

Janjwar Desk
14 Nov 2021 7:05 PM IST
Childrens Day 2021: जानें-बाल दिवस का इतिहास और महत्व
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Children's Day 2021: पूरी दुनिया में बाल दिवस 20 नवम्बर को मनाया जाता है, पर हमारे देश में यह दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री और देश के आधुनिकीकरण की शुरुआत करने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन 14 नवम्बर को मनाया जाता है|

महेंद्र पाण्डेय की टिप्पणी

Children's Day 2021: पूरी दुनिया में बाल दिवस 20 नवम्बर को मनाया जाता है, पर हमारे देश में यह दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री और देश के आधुनिकीकरण की शुरुआत करने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन 14 नवम्बर को मनाया जाता है| पंडित नेहरु को बच्चों से बहुत लगाव था और वे हमेशा बच्चों को देश का भविष्य और बुनियाद बताते थे| बाल दिवस का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना और उन्हें एक सुनहरा भविष्य देना है, पर शुरू से ही बाल दिवस बस बच्चों के चन्द कार्यक्रम तक सीमित रहा है|

पहले बाल दिवस पंडित नेहरु को याद करने में बीत जाता था, पर पिछले कुछ वर्षों से पंडित नेहरु को भुला देने की और उनकी एक ऐयाश चरित्र के तौर पर उजागर करने की पुरजोर सरकारी कोशिश चल रही है| दूसरी तरफ बच्चे तो अब नेताओं के भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट से भी गायब हो चुके हैं| बच्चे भी हिन्दू-मुस्लिम, सवर्ण और निम्न वर्ग में बांटे जाने लगे हैं| शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों ने जरुर कुछ हासिल किया था, पर पिछले वर्ष की ऑन-लाइन शिक्षा ने इस उपलब्धि पर भी पानी फेर दिया और करोड़ों बच्चे शिक्षा में पिछड़ते चले गए|

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 के अनुसार दुनिया के 116 देशों के सबसे भूखे लोगों की सूचि में मोदी जी के सपनों का न्यू इंडिया 101वें स्थान पर काबिज है| पिछले वर्ष, यानि 2020 में कुल 107 देशों में हमारा स्थान 94वें था| इस इंडेक्स को कंसर्नवर्ल्डवाइड और जर्मनी की वेल्टहंगरहिलफे नामक संस्था हरेक वर्ष संयुक्त तौर पर प्रकाशित करती है| इस इंडेक्स के मानदंड हैं – कुपोषण, 5 वर्ष के कम उम्र के बच्चों का वजन और लम्बाई का अनुपात, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की लम्बाई और शिशु मृत्यु दर| इस इंडेक्स का पैमाना 0 से 100 तक रहता है, 0 यानि सबसे अच्छा और 100 मतलब सबसे खराब| 50 से अधिक अंक वाले देशों को भूख के सन्दर्भ में खतरनाक माना जाता है – इस वर्ष केवल सोमालिया ही 50 अंक से ऊपर वाला देश है, इसका अंक 50.8 है| ग्लोबल हंगर इंडेक्स में हमारा देश सोमालिया, येमन, अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों के समकक्ष खड़ा है| दरअसल दुनिया के केवल 15 देश ऐसे हैं जो हमसे भी खराब हालत में हैं – पापुआ न्यू गिनी, अफ़ग़ानिस्तान, नाइजीरिया, कांगो, मोजांबिक, सिएर्रे लियॉन, तिमोर-लेस्टे, हैती, लाइबेरिया, मेडागास्कर, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, चाड, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, यमन और सोमालिया| हमारी महान सरकार सचमुच इस महान उपलब्धि पर गर्व कर रही होगी, और अपने सपनों को साकार होता देख रही होगी| तथाकथित भूखे भविष्य से लैस विश्वगुरु की यही वास्तविकता है|

स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर 2020 नामक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण 5 लाख से अधिक नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है, और अत्यधिक प्रदूषण में पलने वाले बच्चे यदि बच भी जाते हैं तब भी उनका बचपन अनेक रोगों से घिरा रहता है| वायु प्रदूषण का घातक असर गर्भ में पल रहे शिशुओं पर भी पड़ता है, इससे समय से पूर्व प्रसव या फिर कम वजन वाले बच्चे पैदा होते हैं, और ये दोनों की शिशुओं में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं| ऐसी अधिकतर मौतें विकासशील देशों में होती है| हमारा देश तो वायु प्रदूषण के सन्दर्भ में विश्वगुरु है| रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्गों पर वायु प्रदूषण के असर का विस्तार से अध्ययन किया गया है, पर शिशुओं पर इसके प्रभाव के बारे में अपेक्षाकृत कम पता है| इस रिपोर्ट को हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट नामक संस्था ने प्रकाशित किया है|

वायु प्रदूषण से नवजातों की कुल मृत्यु में से दो-तिहाई का कारण घरों के अन्दर का प्रदूषण है| यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत समेत तमाम विकासशील देशों में घरों के अन्दर के प्रदूषण स्तर का कोई अध्ययन नहीं किया जाता, और ना ही इसके बारे में कोई दिशानिर्देश हैं| घरों के अन्दर वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बंद घरों के अन्दर की रसोई है, जिसपर लकड़ी, उपले इत्यादि जैव-इंधनों से खाना पकाया जाता है|

बच्चो की शिक्षा में बाल साहित्य का बहुत योगदान रहता है, पर अब बच्चों की पत्रिकाएं नदारद हो गयी हैं, समाचारपत्रों में बच्चों की जगह ख़त्म हो गयी है और टीवी कार्यक्रमों से बच्चों के कार्यक्रम ख़त्म कर दिए गए हैं| कुल मिलाकर एक ऐसी स्थिति बनाई गयी है, जिसमें बच्चों के सर्वांगीण विकास की बातें ही बेमानी लगती हैं| बाल दिवस बस एक नाम है, पर दुखद यह है कि इससे भी बच्चों को बाहर कर दिया गया है|

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