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भारत के बाद अमेरिका में खुफिया डाटा चोरी के कारण बैन हुआ टिकटॉक

Janjwar Desk
1 Aug 2020 4:56 AM GMT
भारत के बाद अमेरिका में खुफिया डाटा चोरी के कारण बैन हुआ टिकटॉक

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि चीनी कंपनी टिकटॉक द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का चीन का खुफिया विभाग इस्तेमाल कर रहा है...

जनज्वार। भारत के बाद अब अमेरिका में बैन होगा टिकटॉक। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की है। ट्रंप ने कहा है कि चीनी ऐप टिकटॉक को लेकर देश के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इस ऐप द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का चीन का खुफिया विभाग इस्तेमाल कर रहा है। इससे संबंधित आदेश शनिवार को ही जारी हो जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

प्रेसिडेंट ट्रंप ने शुक्रवार को इसके संकेत दे दिए हैं। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा 'वे टिकटॉक पर शनिवार तक कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि चीनी कंपनी टिकटॉक द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का चीन का खुफिया विभाग इस्तेमाल कर रहा है।'

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब इस तरह के रिपोर्ट्स प्रकाशित हुए कि ट्रंप प्रशासन चीनी कंपनी बाइटडांस को यह आदेश देने का विचार कर रही है कि वह टिकटॉक को बेच दे। ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट टिकटॉक को खरीदने की बात चला रही है। इसे लेकर टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस, माइक्रोसॉफ्ट और व्हाइट हाउस के प्रतिनिधियों के बीच बात हो सकती है। संभावना है कि सोमवार तक यह डील हो सकती है।

अमेरिका में सचिवों की एक समिति अमेरिका में विदेशी निवेश से जुड़े मामलों की समीक्षा भी कर रही है। इसमें टिकटॉक की गतिविधियों की भी समीक्षा शामिल है।

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था 'मैं इसके लिए अपनी इमरजेंसी आर्थिक पावर का प्रयोग कर सकता हूं या फिर एक्जीक्यूटिव आदेश जारी कर सकता हूं। मेरे पास ऐसा अधिकार है। इसपर मैं कल ही हस्ताक्षर कर दूंगा।'

बताया जा रहा है कि ट्रंप से 25 सदस्यों वाली अमेरिकी कोंग्रेस की टीम ने भी इस बाबत ऐक्शन लेने का आग्रह किया था। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी अमेरिकी नागरिकों द्वारा टिकटॉक को बैन किए जाने की मांग की जा रही थी। ट्विटर पर 'बैन ऑन टिकटॉक' ट्रेंड करने लगा था।

भारत पहले ही दो बार में टिकटॉक सहित 106 चीनी ऐप को प्रतिबंधित कर चुका है। चीनी सेना द्वारा गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद भारत द्वारा यह कदम उठाया गया था।

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