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Pakistan Political Crisis : इमरान खान को क्यूं लगता है PM पद से हटाने के पीछे है विदेशी साजिश?

Janjwar Desk
1 April 2022 4:09 AM GMT
Pakistans political crisis : मरियम नवाज ने इमरान खान को कहा सनकी मनोरोगी, मचा बवाल
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पाकिस्तान पीएम इमरान खान । 

Pakistan Political Crisis : पाक पीएम ने लेटर बम में से केवल कुछ कंटेंट का खुलासा पत्रकारों से किया था। लेटर बम की कॉपी नहीं दी। इसके बारे में कहा गया कि सरकार गोपनीयता कानून की वजह से इसकी प्रति किसी से साझा नहीं कर सकती।

Pakistan Political Crisis : पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में जारी सियासी संकट अब चरम पर पहुंच गया है। पीएम इमरान खान ( Pakistan PM Imran Khan ) का राजनीतिक अस्तित्व अब कुछ पलों का मेहमान भर लग रहा है। ऐसा इसलिए कि वह विपक्ष के अविश्वास मत ( Imran khan No Confidence Motion ) का सामना कर रहे हैं और अब रविवार को उस पर बहस है। इस बीच पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं ने इमरान को अपने सियासी चक्रव्यूह में पूरी तरह से फंसा लिया है। साथ ही गठबंधन सहयोगियों ने भी साथ छोड़ दिया है। यही वजह है कि इमरान खान को अपने राजनीतिक जीवन में अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं और उससे बाहर निकलने की हर मुमकिन कोशिश कर रह हैं।

इस बीच अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे इमरान खान ( Imran khan ) पीएम पद से खुद को हटाने के पीछे विदेशी साजिश ( Foreign Conspiracy ) का कार्ड खेल दिया है। इस बात का दावा उन्होंने एक नेशनल टेलीविजन पर करते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए एक विदेशी सरकार के साथ मिल रहा है।

क्या है विदेशी साजिश वाला मामला?

इमरान खान ( Pak Pm Imran khan ) ने अपने कैबिनेट सदस्यों और कुछ पत्रकारों को बतौर विदेशी साजिश के सबूत के तौर पर एक पत्र की कुछ सामग्री साझा की है। यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि पत्र की कॉपी न तो इमरान खान ने कैबिनेट के सहयोगियों से साझा की है न ही पत्रकारों से। इमरान खान ने 27 मार्च को एक सार्वजनिक रैली में कथित पत्र को लहराया भी था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सत्ता से हटाने के लिए एक विदेशी साजिश चल रही थी।

इसके बाद कई विपक्षी नेताओं ने इमरान खान से पत्र का ब्योरा देने के लिए कहा था। इमरान ने इसकी कॉपी अभी तक किसी को मुहैया नहीं कराई है। दूसरी तरफ इमरान खान के लेटर बम को अपने ऊपरसे दबाव को हटाने और सत्ता में बने रहने का प्रयास माना जा रहा है।

पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक इमरान रियाज खान ने का कहना है कि ये बात सही है कि पत्र का कुछ कंटेंट उन्होंने कुछ पत्रकारों से साझा की है। उन पत्रकारों की टोली में मैं भी शामिल हूं। उन्होंने समा न्यूज चैनल को बताया कि पाक पीएम ने लेटर बम में से केवल कुछ कंटेंट का खुलासा पत्रकारों से किया था। लेटर बम की कॉपी नहीं दी। इसके बारे में कहा गया कि सरकार गोपनीयता कानून की वजह से इसकी प्रति किसी से साझा नहीं कर सकती। उन्होंने कैबिनेट बैठक में भी इसे दिखाया है। उन्होंने हमारे साथ जो साझा किया वह यह है कि यह पत्र पाकिस्तानी अधिकारियों और दूसरे देश के अधिकारियों के बीच बातचीत का हिस्सा है।

इमरान रियाज खान का कहना है कि मेरी समझ से वह देश अमेरिका है लेकिन इमरान खान ने विदेशी साजिश के पीछे किसी देश के नाम का उल्लेक्ष नहीं किया। उन्होंने अधिकारियों की संख्या या बैठक का स्थान भी नहीं बताया। लेटर में इतना जिक्र है कि यूरोप और अमेरिका, रूस और यूक्रेन पर पाकिस्तान के रुख से खुश नहीं हैं।

सरकार की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक विवादित चिट्ठी पाकिस्तानी डिप्लोमैट ने विदेशी अधिकारी को लिखी थी। इमरान खान ने जिस चिट्ठी को 'विदेशी साजिश' बता रहे हैं कि वो चिट्ठी दरअसल एक डिप्लोमैटिक केबल है। इस चिट्ठी को अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत असद मजिद खान ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भेजा है। ये केबल असद मजिद खान और एक शक्तिशाली देश के सीनियर अधिकारी के बीच बातचीत का हिस्सा है।

इमरान बताएं कौन है विदेशी साजिश के पीछे : शहबाज शरीफ

फिलहाल इमरान के लेटर बम से पाकिस्तान की राजनीति में तूफान मचा है। अब सवाल यह है कि आखिर कौन सा देश है जो इमरान खान को पीएम पद से हटाना चाहता है। साथ ही अहम यह भी है कि क्या इमरान के इन आरोपों में दम भी है या फिर वे सहानुभूति बटोरने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं। इस सवाल का जवाब इमरान खान के समर्थक और विपक्षी पार्टियों नेता दोनों जानना चाहते हैं। पाकिस्तान की PML-N के नेता शाहबाज शरीफ ने इमरान खान से पूछाा है कि वो ये बताएं कि उन्हें कौन सा मुल्क सत्ता से हटाना चाहता है। अन्यथा वे पाकिस्तान को बरगलाना बंद करें।

इमरान की विदेश नीति से कौन है नाराज

डिप्लोमैटिक केबल के मुताबिक अमेरिका को प्रधानमंत्री इमरान खान की विदेश नीति, विशेष रूप से उनकी हाल की रूस यात्रा और यूक्रेन युद्ध पर इमरान की नीति से दिक्कत है। विदेश के इस अधिकारी ने पाकिस्तानी अधिकारी को कहा था कि अगर अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ इमरान खान जीत जाते हैं यानी कि उनकी सरकार बरकरार रह जाती है तो पाकिस्तान के लिए इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

अमेरिका ने जारी की सफाई

पाकिस्तानी अखबर डॉन की माने तो अमेरिका में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद ने दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू के साथ अपनी बैठक के आधार पर ये केबल भेजा था। तो क्या अमेरिका पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को हटाना चाहता है? इस केबल की चर्चा होते ही अमेरिका ने सफाई दी। अमेरिकी विदेश विभाग ने 30 मार्च को कहा कि किसी भी अमेरिकी सरकारी एजेंसी या अधिकारी ने पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर पाकिस्तान को पत्र नहीं भेजा है।

अमेरिका की इस सफाई के बाद से इमरान को वो हटाना चाहता है या नहीं, इस पर सबूतों के साथ ही कोई चर्चा हो सकती है। हां, इतना तय है कि बाइडेन के आने के साथ ही अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं रह गए हैं। पिछले तीन से चार साल के दौरान ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिसके इसका आधार माना जा सकता है।

पाक की वजह से अफगानिस्तान में अमेरिकी रोल हुआ खत्म

बताया जा रहा है कि 15 अगस्त 2021 के बाद दक्षिण एशिया की राजनीति बड़ी तेजी से बदली है। 15 अगस्त को ही तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। उसके बाद अफगानिस्तान से अमेरिका की विदाई का रास्ता साफ हो गया। 31 अगस्त को अमेरिकी सेनाओं ने अफगानिस्तान छोड़ दिया। ऐसे में अमेरिका के लिए पाकिस्तान का रणनीतिक महत्व कम हो गया। इकोनॉमी के मोर्चे पर लगातार पिछड़ रहा पाकिस्तान अमेरिका के लिए फिलहाल न तो एक लुभाऊ बिजनेस पार्टनर है, न ही रणनीतिक और सैन्य साझेदार। यह वही पाकिस्तान है जिसने 9/11 के बाद आतंक के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के लिए सारे द्वार खोल दिए थे। तब इमरान खान पाकिस्तान के नेता नहीं थे।

अफगानिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका को पाकिस्तान से जो उम्मीदें थीं वो पूरी नहीं हुई। अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान उसे अफगानिस्तान में मनमर्जी की सरकार बनवाने में मदद करे लेकिन पाकिस्तान ने इसमें भी US की मदद नहीं की। पाकिस्तान के सैन्य टीकाकार मोइद पीरजादा कहते हैं कि अमेरिका उम्मीद करता था कि पाकिस्तान उसे अपने पसंद की हुकूमत वहां बनाने में मदद करेगा, ताकि वहां राजनीतिक बदलाव न आने पाए, या बदलाव आए भी तो अमेरिका की पसंद के मुताबिक लेकिन ऐसा न होने से अमेरिकी प्रशासन में असंतोष है। अमेरिका अफगानिस्तान से ईरान की निगरानी करना चाह रहा था, पर ऐसा हुआ नहीं। इस बीच अमेरिका में जो बाइडेन राष्ट्रपति बने और उन्होंने पाक पीएम को भाव देना बंद कर दिया। यहां तक कि इमरान खान बाइडेन से एक अदद फोन के लिए तरसते रह गए।

4 साल से पाक में नहीं है अमेरिकी राजदूत

विदेशी साजिश के पीछे एक खास बात यह है कि 18 अगस्त 2018 को इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। उस समय ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इमरान खान की उनसे बातचीत होती रही। इस बारे में पाक के सैन्य मामलों के जानकार मोइद पीरजादा कहते हैं कि बाइडेन सांस्थानिक कैरेक्टर के व्यक्ति हैं, उन्हें प्रशासन का अनुभव है, उन्हें पाकिस्तान के इतिहास की जानकारी है। इसलिए बाइडेन ( Joe Biden ) ने इमरान से बातचीत करने से ही इनकार कर दिया। हालात ये है कि अमेरिका ( America ) ने अभी तक पाकिस्तान में अपना स्थायी राजदूत नहीं नियुक्त किया है।

इमरान ने नहीं बनने दिया पाक में सैन्य बेस

इमरान खान की स्वतंत्र विदेश नीति की वजह से अमेरिका परेशान है। जून 2021 में अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में नजर रखने के लिए अपने सैन्य बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दे लेकिन इमरान ने इसका जवाब देते हुए साफ कहा कि कतई नहीं। इमरान का ये कट टू कट जवाब अमेरिका को नाराज करने के लिए काफी था। ऐसा इसलिए कि आतंकवाद में सहयोग के नाम पर पाकिस्तान लाखों-करोड़ों डॉलर अमेरिका से ले चुका है।

इमरान खान और जो बाइडेन संबंधों में कड़वाहट की एक और वजह यह रही कि जनवरी 2022 में चीन के खिलाफ बाइडेन ने डेमोक्रेसी समिट की थी। इसमें समिट में पाकिस्तान को भी न्यौता दिया गया था लेकिन पाकिस्तान ने अमेरिका की बजाय चीन को तवज्जो देते हुए इस समिट में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसी तरह अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने इसी साल फरवरी में हुए विंटर ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया था। भारत भी इन खेलों के उद्घाटन समारोह में नहीं गया। पाकिस्तान अपने ऑल टाइम वेदर फ्रेंड चीन को खुश करने के लिए न सिर्फ इस आयोजन में बढ़-चढ़कर पहुंचा बल्कि खुद पीएम इमरान चीन जाकर इसमें शरीक हुए।

यूएन में भी नहीं दिया अमेरिका का साथ

इमरान सरकार यहीं नहीं रुकी। पाकिस्तान ने यूक्रेन मसले पर यूएन महासभा में आए प्रस्ताव में रूस की आलोचना करने से इनकार कर दिया। अमेरिका समेत 22 यूरोपीय देशों ने पाकिस्तान से पत्र लिखकर अपील की कि वो इस मसले पर रूस की निंदा करे उसके खिलाफ वोट डाले, लेकिन इमरान सरकार ने इस पत्र को लीक कर दिया। बता दें कि यही वो मौका था जब इमरान खान ने भारत की विदेश नीति की तारीफ की थी। साथ ही कहा था कि ऐसा करने के लिए भारत पर कोई दबाव नहीं डालता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत ने अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रखी है।

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