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पेंग शुई के मामले में चीन और ओलिंपिक कमिटी पर कोई भरोसा नहीं कर रहा

Janjwar Desk
26 Nov 2021 2:20 PM GMT
पेंग शुई के मामले में चीन और ओलिंपिक कमिटी पर कोई भरोसा नहीं कर रहा
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चीन की पूर्व टेनिस खिलाड़ी पेंग शुई

Peng Shuai : दुनियाभर में पेंग शुई की सलामती के चर्चे होते रहे, पर चीन सरकार ने कुछ नहीं कहा| चीन में उनके बारे में हरेक जानकारी सोशल मीडिया से गायब कर दी गयी|

महेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट

Peng Shuai : मानवाधिकार का हनन पूरी दुनिया में हो रहा है, पर चीन के मामले पर ज्यादा हंगामा होता है| दुनिया भर में कहीं अश्वेतों और मूल निवासियों के साथ अन्याय हो रहा है, कहीं रिफ्यूजी मारे जा रहे हैं, कहीं धर्म के नाम पर दंगे प्रायोजित किये जा रहे हैं तो कहीं भुखमरी और गरीबी ने पूरी आबादी को अपनी चपेट में लिया है| इन दिनों चीन की पूर्व टेनिस खिलाड़ी पेंग शुई (Former Tennis player, Peng Shuai) की सलामती के चर्चे पूरी दुनिया में किये जा रहे हैं| उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर 2 नवम्बर को चीन के पूर्व उप-प्रधानमंत्री पर यौन शोषण का खुलासा किया था, इसके आधे घंटे बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया से गायब हो गयी, पेंग शुई का अकाउंट सस्पेंड हो गया, इन्टरनेट से सारी जानकारी गायब हो गयी और फिर लगभग तीन सप्ताह तक पेंग शुई का कुछ पता नहीं चला| दुनियाभर में पेंग शुई की सलामती के चर्चे होते रहे, पर चीन सरकार ने कुछ नहीं कहा| चीन में उनके बारे में हरेक जानकारी सोशल मीडिया से गायब कर दी गयी|

इस मसले को सबसे मुखर तरीके से विमेंस टेनिस एसोसिएशन (Women's Tennis Association) ने उठाया और लगातार चीन सरकार से प्रश्न पूछती रही| विमेंस टेनिस एसोसिएशन के साथ बहुत सारे देश और खेल संस्थान जुड़ गए| चीन में फरवरी 2022 में विंटर ओलंपिक्स (Winter Olympics 2022 at Beijing) आयोजित किये जाने वाले हैं, और अनेक देशों ने इस मसले पर ओलिंपिक के बहिष्कार की आवाज बुलंद की, दूसरी तरफ विमेंस टेनिस एसोसिएशन ने भी चीन में आयोजित किये जाने वाले अपने सभी टूर्नामेंट को ख़त्म करने की धमकी दी| पर, पूरे मसले पर इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी खामोश रही, इस संस्था से यही उम्मीद भी थी| दरअसल इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी मानवाधिकार के मुद्दे पर खामोश रहने और ऐसे मामलों को अनदेखा करने के लिए कुख्यात है| चीन में ओलुम्पिक आयोजन के निर्णय के समय भी दुनियाभर में चीन के मानवाधिकार हनन के बारे में कहा गया था, पर दुनिया की सबसे बड़ी खेल संस्था खामोश रही| केवल ग्लोबल टाइम्स (Global Times) के सम्पादक ने अंगरेजी के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर बताया था कि पेंग शुई सलामत हैं और अपने घर में आराम कर रही हैं| इसके बाद 20 नवम्बर को फिर से ग्लोबल टाइम्स के सम्पादक ने सोशल मीडिया पर बीजिंग में बच्चों के टेनिस टूर्नामेंट की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें पेंग शुई नजर आ रही हैं| इसके ठीक बाद खबर आई कि इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी के अध्यक्ष थॉमस बाख (Thomas Bach) ने पेंग शुई से फ़ोन द्वारा आधे घंटे बात की|

इसके बाद से विमेंस टेनिस एसोसिएशन के साथ ही पूरी दुनिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के निशाने पर चीन सरकार के साथ ही इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी भी आ गयी है| विमेंस टेनिस एसोसिएशन ने कहा है कि फ़ोन से बात कर इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी के अध्यक्ष ने पेंग शुई की सलामती के लिए कुछ नहीं किया बल्कि शीतकालीन ओलिंपिक के बहिष्कार को रोकने का प्रयास किया है| ग्लोबल टाइम्स के सम्पादक द्वारा सोशल मीडिया पर फोटो दिखाने से या फिर इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी के अध्यक्ष द्वारा फोन से बात करने पर यह कहीं साबित नहीं होता कि पेंग शुई आजाद हैं या फिर किसी सरकारी दबाव में नहीं हैं| इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी के बारे में कहा जा रहा है कि वह अपनी हरकतों से केवल चीन सरकार की पूरे मामले को ठंडा करने और शीतकालीन ओलिंपिक को बहिष्कार से बचाने में मदद कर रही है| अमेरिका ने शीतकालीन ओलिंपिक के राजनैयिक बहिष्कार की बात की है, जिसका मतलब है जो खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए स्वतंत्र हैं, पर कोई सरकारी प्रतिनिधिमंडल साथ नहीं जाएगा| यूनाइटेड किंगडम और सम्भवतः फ्रांस भी ऐसा कर सकते हैं| ऑस्ट्रेलिया में मानवाधिकार कार्यकर्ता सरकार से पूर्ण बहिष्कार की मांग कर रहे हैं| इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमिटी की अधिक आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि यह मामला महज मानवाधिकार का नहीं है, बल्कि यौन उत्पीडन का है और चीन सरकार ने इसपर आजतक कुछ नहीं कहा है|

चीन की पेंग शुई, वैश्विक स्तर पर ख्यातिप्राप्त युगल खिलाड़ी रह चुकी है| वे तीन बार ओलिंपिक खेलों में चीन का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, विश्व की नंबर एक युगल टेनिस खिलाड़ी रह चुकी हैं, विम्बलडन और फ्रेंच ओपन की विजेता भी रह चुकी हैं – खेलों के सन्दर्भ में चीन का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं और समय-समय पर चीनी अधिकारियों में उनकी उपलब्धियों का गुणगान किया है| पर, इस दौर में पेंग शुई चीन में "मी टू" (Me Too) यानि महिला उत्पीडन की आवाज बन गयी हैं| 2 नवम्बर को उन्होंने सोशल मीडिया, वेइबोपोस्ट, पर बताया कि किस तरह से पूर्व उप-प्रधानमंत्री जहाँग गोली, उनका यौन शोषण करते थे| जहाँग गोली इस समय 75 वर्ष के हैं, और अब सामाजिक जीवन से दूर हैं| इस पोस्ट के बाद से 20 नवम्बर तक पेंग शुई का कोई पता नहीं था, यह भी नहीं पता था कि वे जिन्दा हैं भी या नहीं| चीन सरकार के तरफ से कोई बयान नहीं था, केवल ग्लोबल टाइम्स के सम्पादक हु क्सिजिन के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर अंगरेजी में बताया गया था कि पेंग शुई ठीकठाक है और अपने घर पर आराम कर रही हैं| विश्व टेनिस फेडरेशन, महिला टेनिस फेडरेशन के साथ ही अन्य वर्तमान और पूर्व टेनिस खिलाड़ी इस घटना पर चिंता जता चुके हैं और सबने पेंग शुई के सलामती की कामना की है और चीन सरकार से उनके आजाद और सलामत रहने का सबूत माँगा है| इसमें नाओमी ओसाका, सेरेना विलियम्स, क्रिस एवर्ट, बिली जीन किंग्स और मार्टिना नवरातिलोवा शामिल हैं| पुरुष टेनिस खिलाड़ियों में रोजर फेडेरर, एंड्रू मरे और नोवाक जोकोविक ने भी ऐसी ही आवाज उठाई है| अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मामले को उठाया|

पेंग शुई ने लिखा था कि यौन शोषण का कोई सबूत उनके पास नहीं है, फिर भी वे सच्चाई दुनिया के सामने लायेंगीं – भले ही चट्टान से लड़ने वाले अंडे या आग से खेलने वाले पतंगें की तरह इसका हश्र अपने आप को नष्ट करना ही क्यों न हो| आज के दौर में पूरी दुनिया में शक्तिशाली के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब अपने आप को नष्ट करना ही है| चीन में यह खेल पुराना है, बहुत सारे शक्तिशाली सरकार का विरोध करने के बाद गायब कर दिए गए और लम्बे अंतराल बाद बिलकुल गूंगे बनकर वापस आये – अलीबाबा के जैक मा का उदाहरण सबके सामने है|

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