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बाइडेन की सफाई : हमने अफगानिस्तान में अरबों डॉलर खर्च किए पर अफगान लीडरशिप ने बिना लड़े मान ली हार

Janjwar Desk
17 Aug 2021 5:04 AM GMT
बाइडेन की सफाई : हमने अफगानिस्तान में अरबों डॉलर खर्च किए पर अफगान लीडरशिप ने बिना लड़े मान ली हार
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जो बाइडेन ने अफगानिस्तान छोड़ने के अपने फैसले का बचाव किया है

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले का बचाव किया है, बाइडेन ने अफगान नेताओं और वहां की सेना को ही दोषी बताया है..

जनज्वार। अफगानिस्तान पर अब पूरी तरह से तालिबान का कब्जा हो चुका है। देश के हर प्रमुख संस्थानों पर तालिबान के लड़ाके काबिज हो गए हैं। देश में अब भी अफरातफरी के हालात हैं। तालिबान के खौफ से अफगानिस्तान छोड़ने की जल्दबाजी के कारण काबुल एयरपोर्ट से भयावह तस्वीरें सामने आ रहीं हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इन सब हालातों के लिए अफगानिस्तान के शासकों और वहां की सेना को दोषी ठहराते हुए अपनी सफाई दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले का बचाव किया है। बाइडेन ने अफगान नेताओं और वहां की सेना को ही दोषी बताया है। अफगानिस्तान संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने संबोधन में कहा, "मेरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और मैंने अफगानिस्तान के हालात को करीब से देखा है। इसके मद्देजनर हमने अपनी योजना को अमलीजामा पहनाते हुए कदम उठाए हैं।" बाइडेन का यह संबोधन भारतीय समय के अनुसार सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1.30 बजे हुआ।

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा- अफगानिस्तान में हालात अचानक बदल गए। इसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ा है। लेकिन, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

बाइडेन ने कहा- हमारे पास दो विकल्प थे। पहला- हम तालिबान से हुआ समझौता लागू करते और फोर्स वापस बुलाते। दूसरा- कई हजार सैनिक और वहां भेजते और जंग चलती रहती। अफगानिस्तान के नेताओं ने हथियार डाल दिए और देश से भाग गए। 20 साल की ट्रेनिंग के बाद भी वहां की फौज ने सरेंडर कर दिया।

बाइडेन ने कहा, "जब मैंने सत्ता संभाली तो उससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प तालिबान से बातचीत कर रहे थे। 1 मई के बाद हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे। या तो हम वहीं रहते और तालिबान से लड़ते या फिर अमेरिकी सैनिकों को वापस लाते। मैं अपने प्लान पर कायम रहा।"

"मैं मानता हूं कि तालिबान बहुत जल्द काबिज हो गए। अफगान लीडरशिप ने बहुत जल्द हथियार डाल दिए। हमने वहां अरबों डॉलर खर्च किए। अफगान फोर्स को ट्रेंड किया। इतनी बड़ी फौज और हथियारों से लैस लोगों ने हार कैसे मान ली। यह सोचना होगा। यह गंभीर मुद्दा है।" बाइडेन ने कहा।

बाइडेन ने बिना नाम लिए पूर्ववर्ती सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैं वो गलतियां नहीं कर सकता था जो पहले के लोगों ने कीं। इसलिए अपने प्लान पर जमा रहा। अफगान लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है। वहां की फौज हमारे कई नाटो सहयोगियों से ज्यादा है। उनके पास हथियार भी थे। फिर ये क्यों हुआ? तालिबान तो संख्या में भी कम थे।"

उन्होंने कहा- हमारे सैनिकों ने बहुत त्याग किए हैं। अफगानिस्तान में भरोसे का संकट है। हम कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका का हर नागरिक वहां से सुरक्षित लौटे। लोग हम पर सवाल उठा रह हैं। उन्हें अफगानिस्तान छोड़कर जाने वाले उनके राष्ट्रपति अशरफ गनी से भी सवाल करने चाहिए। हमारी सेना और जोखिम नहीं उठा सकती थी। उम्मीद है कि वहां हालात फिर बेहतर होंगे।

इससे पहले अफगानिस्तान में हालात को लेकर बुलाई गई यूएनएससी की आपात बैठक में संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि गेंग शुआंग ने कहा कि पिछले 20 साल से इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन अफगानिस्तान में जमा होते रहे हैं और बढ़ते रहे हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न किया है।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को कभी भी अतंकियों का स्वर्ग नहीं बनने देना चाहिए। शुआंग ने कहा कि अफगानिस्तान में भविष्य के सभी राजनीतिक समाधानों में ध्यान में रखना होगा। हम उम्मीद करते गैं कि तालिबानी अफगानिस्तान अपनी प्रतिबद्धता बरकरार रखेगा और आतंकी संगठनों पर रोक लगाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान के प्रवक्ता का कहना है कि चरमपंथी संगठन भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है। प्रवक्ता ने कहा कि देश में जितने भी राजनयिक हैं, किसी को भी अफगानिस्तान छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत पाक मसलों में तालिबान कोई दखल नहीं देगा।

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