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World Leaders In India : एक हफ्ते के भीतर चीन, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिनिधि क्यों पहुंचे भारत, क्या चाहते हैं चारों देश

Janjwar Desk
1 April 2022 9:16 AM GMT
World Leaders In India : एक हफ्ते के भीतर चीन, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिनिधि क्यों पहुंचे भारत, क्या चाहते हैं चारों देश
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World Leaders In India : एक हफ्ते के भीतर चीन, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के प्रतिनिधि क्यों पहुंचे भारत, क्या चाहते हैं चारों देश

World Leaders In India : यूक्रेन में जारी भीषण युद्ध के बीच एक सप्ताह के भीतर चीन और रूस के विदेश मंत्री, अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और ब्रिटेन की विदेश सचिव भारत पहुंचे हैं....

World Leaders In India : रूस और यूक्रेन के बीच एक महीने से जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच एक सप्ताह के भीतर चीन (China), रूस (Russia), अमेरिका और ब्रिटेन के विदेश मंत्री, विदेश सचिव या शीर्ष अधिकारी भारत दौरे पर आए हैं। आइए जानते जानते हैं कि इन चारों ताकतवर देशों के शीर्ष अधिकारी भारत क्यों आए और किसने क्या-क्या बातें कहीं।

गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद पहला दौरा

सबसे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Chinese Foreign Minister Wang Yi) शुक्रवार 1 अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचे। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galawan Valley Clash) में साल 2020 में दोनों देशों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद चीन के विदेश मंत्री का यह पहला भारत दौरा हुआ। वांग यी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब तीन घंटे बैठक हुई जिसमें भारत-चीन सीमा क्षेत्र के अलावा अफगानिस्तान और यूक्रेन पर चर्चा हुई।

हालांकि सीमा पर चल रहे तनाव के बीच वांग यी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात नहीं हो पायी। भारत दौरे से पहले वांग यी ने इस्लामाबाद में आयोजित इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी के सम्मेलन में कश्मीर पर टिप्पणी की थी जिसका भारत विरोध किया था। वहीं दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने प्रेस वार्ता में बताया कि अप्रैल 2020 में चीन की गतिविधियों की वजह से भारत और चीन के बीच रिश्तों में खलल पड़ गया था। इस मुलाकात के दौरान हमने अपने द्विपक्षीय रिश्तों पर गर्मजोशी के माहौल में चर्चा की।

इंडिया यूके स्ट्रेटेजिक फ्यूचर फोरम जयशंकर ने किया भारत का बचाव

यूक्रेन में जारी संकट के बीच ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज ट्रस (Liz Truss) भी गुरुवार को भारत दौरे पहुंची। ब्रिटेन रूस-यूक्रेन युद्ध में खुलकर यूक्रेन के साथ खड़ा दिख रहा है और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का पहले ऐलान कर चुका है। लेकिन भारत दोनों देशों के बीच तटस्थ बना हुआ है और सस्ते दामों पर तेल की खरीद कर रहा है। रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को सख्त बनाने की कोशिश में लिज ट्रस भारत पहुंची हैं। ट्रस ने पहले इंडिया यूके स्ट्रेटेजिक फ्यूचर फोरम में भी सिरकत की। इस दौरान एस. जयशंकर भी वहां मौजूद रहे।

इस दौरान रूस से तेल और गैस खरीद को लेकर सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि यह दिलचस्प है क्योंकि हमने कुछ समय के लिए देखा है कि इस मुद्दे पर लगभग एक अभियान जैसा दिखता है। यूरोप ने फरवरी की तुलना में मार्च में रूस से 15 प्रतिशत अधिक तेल और गैस खरीदा है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो मुझे लगता है कि देसों के लिए बाजार जाना स्वभाविक है और यह देखना कि उनके लोगों के लिए क्या अच्छे सौदे हैं। जयशंकर ने यह भी बताया कि रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीददार यूरोप से हैं जबकि भारत की उर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मध्यपूर्व है और लगभग आठ प्रतिशत अमेरिका से है। भारत की कच्चे तेल की खरीद का 1 प्रतिशत से भी कम रूस से है। बता दें कि सख्त प्रतिबंधों के बीच रूस से भारत के तेल खरीदने के फैसले की दुनियाभर के मीडिया में चर्चा हो रही है।

अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की चेतावनी

इसी दौरान अमेरिका के उप सलाहकार दलीप सिंह भी भारत में हैं। दलीप सिंह (Daleep Singh) भारतीय मूल के वही शीर्ष अमेरिकी अधिकारी हैं जिन्होंने रूस के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन नई दिल्ली पहुंचकर दलीप सिंह ने इशारों-इशारों में भारत को ही चेतावनी दे डाली। सिंह ने कहा कि जो देश प्रतिबंधों के दायरे से बाहर जाने की कोशिश करेंगे उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।

उन्होंने चीन और रूस की नजदीकियों का हवाला देते हुए कहा कि भारत के लिए इन नजदीकियों के बुरे नतीदे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को खुशफहमी में नहीं रहना चाहिए। रूस चीन संबंधों में रूस जूनियर पार्टनर होगा। चीन का हाथ जितना भारी होगा, भारत के लिए उतना ज्यादा बुरा होगा। दलीप सिंह यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि चीन अगर एक बार फिर एलएसी का उल्लंघन करेगा तो रूस भी मदद करने नहीं आएगा।

रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने की भारत की सराहना

वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव (Surgei Lavarov) भी भारत दौरे पर हैं। इससे पहले वो पाकिस्तान और चीन का दौरा कर चुके हैं। लावरोव सोवियत रूस के जमाने के नेता हैं और व्लादिमीर पुतिन की सरकार में वह अहम भूमिका निभाते आए हैं। उनका भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब रूस और यूक्रेन के बीच एक महीने से भीषण युद्ध जारी है। ऐसे में दुनियाभर की नजरें लावरोव के दौरों पर भी टिकी हुई हैं। रूसी विदेश मंत्री ने भी विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात की।

इस दौरान लावरोव ने कहा कि हमारे पश्चिमी दोस्त मौजूदा समय में सभी अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को यूक्रेन विवाद के साथ जोड़कर उसका महत्व कम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने भारत के तटस्थ रहने के फैसले की सराहना की और कहा कि वो किसी से लड़ाई नहीं चाहते हैं। सर्गे लावरोव ने कहा कि वो भारत के रवैये की सराहना करते हैं कि उसने पूरे विवाद को जाना और समझा और एकतरफा कोई फैसला नहीं लिया।

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