पर्यावरण

तबाही और बर्बादी की कगार पर दुनिया, नहीं किया ये काम तो नष्ट हो जायेगा समुद्र और जमीन पर पाये जाने वाला जीवन

Janjwar Desk
7 Dec 2023 4:22 AM GMT
तबाही और बर्बादी की कगार पर दुनिया, नहीं किया ये काम तो नष्ट हो जायेगा समुद्र और जमीन पर पाये जाने वाला जीवन
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20 सालों में अगर बढ़ गया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान तो भारत के मैदानी इलाकों पर पड़ेगा बहुत बुरा असर (तस्वीर : सांकेतिक)

वह दिन दूर नहीं जब जब ग्रीनलैंड की आइस शीट से लेकर हिमालय की बर्फीली चोटियां, अंटार्कटिक पर छायी बर्फ की चादरें गर्म पानी में पाए जाने वाली कोरल रीफ, बोरियल और मैंग्रोव के जंगल, आमेजन का जंगल, ग्रासलैंड, सारा की सारा अर्थ सिस्टम ख़त्म हो जाएगा। अब दुनिया एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है...

Global Warming : इन दिनों चल रहे COP28 के मौक़े पर जारी ग्लोबल टिपिंग पॉइंट्स रिपोर्ट - दुनिया की तबाही और बर्बादी की कगार पर पहुँचने की दास्तान बयान करती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग ने इस धरती पर मौजूद सभी समुद्री और ज़मीनी सिस्टम (प्रणालियों) को नष्ट होने की कगार पर ला खड़ा किया है और अगर हालात जल्दी नहीं बदले तो वह दिन दूर नहीं जब यह नष्ट हो जायेंगी और इनके साथ साथ समुद्र और ज़मीन पर पाये जाने वाला जीवन भी नष्ट हो जायेगा।

ग़ौरतलब है कि पृथ्वी के विभिन्न घटक जैसे वातावरण, समुद्र, क्रायोस्फीयर, भूमंडल और जीवमंडल के बीच जटिल संबंधों शामिल है। साफ़ ज़ाहिर है कि अगर बायोस्फ़ीयर (एक जैव-भौगोलिक इकाई जो पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पोषण स्तरों का प्रतिनिधित्व कर रहे जीवों की संख्या को बनाए रखे) और क्रायोस्फ़ीयर (यानी पृथ्वी पर बर्फ और बर्फ से ढके क्षेत्र) दोनों नहीं बचेंगे।

गौरतलब है ​कि एशिया में दो अरब लोग उस पानी पर निर्भर हैं जो यहां के ग्लेशियरों और बर्फ में मौजूद है, ऐसे में क्रायोस्फीयर को खोने के परिणाम इतने व्यापक हैं कि सोचा भी नहीं जा सकता। अगर ये दोनों नहीं बचे तो इंसान ख़ुद अपना अस्तित्व किस तरह बचा पाएगा।

अगर ग्लोबल वार्मिंग इसी तरह बरकरार रही तो वह दिन दूर नहीं जब जब ग्रीनलैंड की आइस शीट से लेकर हिमालय की बर्फीली चोटियां, अंटार्कटिक पर छायी बर्फ की चादरें गर्म पानी में पाए जाने वाली कोरल रीफ, बोरियल और मैंग्रोव के जंगल, आमेजन का जंगल, ग्रासलैंड, सारा की सारा अर्थ सिस्टम ख़त्म हो जाएगा। अब दुनिया एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। यह रिपोर्ट बेजोस अर्थ फंड के साथ साझेदारी में, एक्सेटर विश्वविद्यालय द्वारा समन्वित 200 से अधिक शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा तैयार की गई थी।

2°C ग्लोबल वार्मिंग के होने से - ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर, पश्चिमी अंटार्कटिक की बर्फ की चादरें, वार्म वाटर कोरल रीफ / गर्म पानी में पायी जाने वाली कोरल की चट्टानें, उत्तरी अटलांटिक के सबपोलर जाइर सर्कुलेशन और पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र समाप्त हो जाएँगे। जैसे-जैसे दुनिया डेढ़ डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग को पार कर रही है, तापमान के बढ़ने से - बोरियल वन, मैंग्रोव और समुद्री मीडो /घास के मैदान सब नष्ट हो जाएँगे।

दो डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग और उससे आगे तापमान के बढ़ने से -पूर्वी अंटार्कटिका ग्रीनलैंड और पश्चिमी अंटार्कटिक आइस शीट्स / बर्फ की चादरों में अमेजॉन, वर्षावन, सबग्लेशियल क्षेत्र नहीं बचेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में दुनिया के अरबों लोगों का भविष्य अब जीवाश्म ईंधन के फेज आउट यानी ख़त्म करने की गति और नेट जीरो समाधानों पर निर्भर है।

रिपोर्ट में कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह ख़त्म करने की सिफारिश एसएचओ के साथ साथ दुनिया से एक समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है। इसमें 26 नकारात्मक पृथ्वी प्रणाली के टिपिंग पॉइंट्स के आकलन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल गया है अगर दुनिया में "बिज़नेस ऐज़ यूजअल" यानी सब कुछ इसी तरह चलता रहा जैसे फ़िलहाल चल रहा है तो वह दिन दूर नहीं जब ग्लोबल वार्मिंग डेढ़ डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच जाये और एक एक करके हर दुनिया में मजूद बायो स्फीयर व क्रयो स्फीयर नष्ट हो जाये। इस विनाश को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। रिपोर्ट ऐसा करने के लिए एक ब्लूप्रिंट पेश करती है।

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