Bhima Koregaon case : सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को दी बड़ी राहत, मेडिकल ग्राउंड पर मिली जमानत

Bhima Koregaon case : सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव बड़ी राहत, मेडिकल ग्राउंड पर दी जमानत
Bhima Koregaon case : महाराष्ट्र के चर्चित भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद केस में जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ता और कवि वरवर राव ( Social activists Varvara ro ) को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) ने बुधवार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने वरवर राव ( Varvara Rao ) को मेडिकल ग्राउंड पर जमानत ( bail ) दे दी है। साथ ही ये भी कहा है कि वे किसी भी गवाह के संपर्क में नहीं आएंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि वरवरा राव संबंधित ट्रायल कोर्ट के क्षेत्र से बगैर कोर्ट की अनुमति के कहीं बाहर नहीं जाएंगे। शीर्ष अदालत के हिदायत से साफ है कि वरवर राव अपनी रिहाई का दुरुपयोग नहीं करेंगे।
इससे पहले 83 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और कवि वरवर राव ( Varvara Rao ) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिकित्सा आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) में चुनौती दी थी।
दरअसल, भीमा कोरेगांव मामला ( Bhima Koregaon case ) 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। इस कार्यक्रम के बाद भीमा कोरेगांव में युद्ध स्मारक के पास हिंसक घटनाएं हुई थी। पुणे पुलिस ने यह भी दावा किया था कि कॉन्क्लेव कथित माओवादी लिंक लोगों द्वारा एल्गार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। बाद में एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
इस मामले में वरवरा राव को 28 अगस्त, 2018 को उनके हैदराबाद स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। वह इस मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ पुणे पुलिस ने 8 जनवरी, 2018 को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि ;रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
जेल से रिहाई का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) से जमानत मिलने के बाद महाराष्ट्र की जेल में बंद वरवरा राव की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। 83 साल के वयोवृद्ध कवि और लेखक वरवर राव पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। वरवरा राव कोरोना की चपेट में भी आये थे।
वरवर राव ( Varvara Rao ) की ओर से हेल्थ ग्राउंड पर जमानत के लिए लंबे समय से कोशिश की जा रही थी जिसका एनआईए ( NIA ) विरोध कर रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने वरवरा राव को जमानत दे दी है। जिसके बाद हेल्थ ग्राउंड पर वरवरा राव की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
जिंदगी और मौत की जंग लड़ते कवि वरवर राव किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं। इस उम्र में सत्ता का उनके साथ व्यवहार खुद उनका एक परिचय है। पढिए, उनकी एक कविता शिनाख्त के दिन और जानिए जनमानस के प्रति उनकी वेदना को।
शिनाख्त के दिन
1.
क्या सल्तनत इसे मान लेगी
अगर बग़ावत के चलते
आवारा और बेगैरत
बहादुर बन जाएँ,
नायक खानदानी होने चाहिए
अगर जंगली एक साथ हो जाएं,
गारा, लकड़ी और पत्थर जुटाते हुए
बसेरा बनाने लगें,
क्या यह कोई कथा बन जाएगी,
इतिहास की बुनियाद होनी चाहिए,
क्या तुम पहाड़ के ऊपर एक दिया जलाओगे
फटेहाल
बुलेट से छिदे गोंड के लिये,
दीये बड़े लोगों के लिये जलाये जाते हैं।
2
बेशक, अगर मुझसे उनकी बस्तियों के बारे में पूछा भी जाय
मैं क्या कह सकता हूं,
शहरों को बनाकर
वे जंगल की कोख में चले गये,
अगर मुझसे गिनने को कहा जाय
वे साठ थे या तेरह,
मैं सिर्फ़ सितारों की ओर इशारा कर सकता हूं
जबकि तुम मुआवज़े की फ़ेहरिस्त के साथ अकड़ सकते हो
किसने उनकी नाड़ी काटी और उन्हें नाम दिया
जंगल में जने और छोड़े गये
शायद वे तुम्हें पहली बार मिले
सेंसस के आंकड़ों
और वोटरों की लिस्ट मेंय
शायद उन्हें आदिलाबाद के अस्पताल से बाहर किया गया,
या आज स्मारक बनाकर कहा गया
इन्हें पट्टा नहीं मिल सकता है
वहां,
पेड़ और गढ़े, वादियां और चोटियां
पंछी और गिरगिट, पानी और आग़
इन्सान और जानवर, जंगल साफ़ कर उगाई गई फ़सल, और बसेरे
अंधेरा और रोशनी,
उन सबके बस एक नाम हैं
जंगल
जंगल माँ भी है और ख़ुद बच्चा भी,
जंगल की गोद में बसे
आदिवासियों
और उनकी शक्ल में पल रहे
जंगल की ख़ौफ़ से,
तुमने ही
उनकी शिनाख़्त की
डर फैलता गया
बोडेनघाट और पिप्पलधारी में
इंद्रावेल्ली और बाबेझरी में
और सतनाला में
बांस की खपच्चियों से घिरी हुई
उनकी ज़िन्दगी तुमने तहस.नहस कर दी
कनस्तर और कारतूस
खदान के ख़ून और सल्फ़र गैस के साथ
धरती की दरारों में
तुमने उनकी बपतिस्मा का जश्न मनाया
हासिल सिर्फ़ इतना है
अब तुम उन्हें कभी ख़त्म नहीं कर सकते
3
बहादुर उभरते हैं
वे इतिहास की ही पैदाइश हैं
क्या कोई वह तारीख बता सकता है
जब आदिवासी पैदा हुए थे
जबकि तुमने साल.दर.साल
चालू खाते के लिये
बीस अप्रैल की तारीख तय कर रखी है
लेकिन इस बार
इतिहास की चकाचौंध में लड़खड़ाते हुए
उन्नीस मार्च को ही तुम
देवक की कालकोठरी में घुस पड़े
4
मेरे दिल में मचलती
जंगली फूलों के ऊपर से आती हवा
अब पर्वतों की चोटियों पर लहराती है
आसमान ने जंगल को एक दृश्य में बदल दिया
इन सबसे बेख़बर, गोदावरी अपनी घाटी में
मुरझाती हुई बहती जाती है
5
परसों के लोग शायद कल नहीं रह गये थे,
कल के दावे आज ग़ायब हो चुके होंगे,
फिर भी, इंद्रावेल्ली परसों भी था, कल भी और आज भी,
इंद्रावेल्ली शायद मिल्कियत नहीं थी
गुज़रे ज़माने के लोगों की
कल के स्मारक उस पर कब्ज़ा नहीं जमा पायेय
लेकिन उस पर उनका हुक्म नहीं चलेगा
जिन्होंने आज उसे तहस.नहस कर दिया
कबीले के मांस और ख़ून से पोसे हुए
जंगल का ही हुक्म चलेगाए
आदिम जीवन्तता में सनी हुई
आत्मा ही रह जाएगीय
शहीदों का चुम्बन ज़िन्दा रहेगा
गंगा जीवन की धारा रह जाएगी
लाठी और तलवार उसे बचायेंगी
सारा जंगल ख़त्म कर दिये जाने के बाद भी
उसमें छिपी हुई आग रह जाती है
लेकिन इंद्रावेल्ली
जिसे अब शहर बना दिया गया
बग़ावत का परचम बनकर रह जायेगा
कल का स्मारक
याददाश्त का संकेत है
यह उनके लिये मील का पत्थर है
जिन्होंने उसे बरबाद कर दिया
इंद्रावेल्ली ज़िन्दा रहेगा
संघर्ष करती जनता के
शिखर का प्रतीक बनकर।











