Bihar News: बिहार में होगा महाराष्ट्र वाला खेला या चाचा-भतीजे की जोड़ी बनाएगी सेकुलर सरकार? जानिए पर्दे के पीछे की कहानी

Bihar News: बिहार में राजनीतिक उलटफेर का खेल एक बार फिर शुरू हो गया है। जद यू नेता आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद अंदर खाते भाजपा व राजद की राजनीतिक पहलकदमी तेज हो जाने से कयासों का दौर शुरू हो गया। जिसे बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी से सोमवार को बातचीत कर राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। ऐसे में अब चर्चा यह हो रही है कि बिहार में होगा महाराष्ट्र वाला खेला या फिर से चाचा-भतीजे की जोड़ी बनाएगी सेकुलर सरकार। इस राजनीतिक कयासों को अगले 48 घंटों में शक्ल लेने की उम्मीद जताई जा रही है।
जेडीयू नेता आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जेडीयू बिना नाम लिए बीजेपी पर हमलावर हो गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बात की। इसके बाद कांग्रेस ने बिहार के प्रभारी भक्त चरण दास को आज पटना भेजने का फैसला ले लिया।
दूसरी तरफ बिहार कांग्रेस ने सभी विधायकों को आज शाम पटना में पहुंचने का फरमान जारी किया है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा कि बदलते हुए राजनीतिक हालात पर नजर है। उन्होंने बताया कि दिल्ली मुख्यालय से कांग्रेस के प्रभारी से भी पटना आने का आग्रह किया गया है। जबकि, जेडीयू ने अपने सांसदों और विधायकों की मंगलवार को बैठक बुलाई है। इसके अलावा, आरजेडी ने भी कल अपने विधायकों की बैठक बुलाई है और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा अपने विधायक दल की मीटिंग करेगी। ये सभी राजनीतिक पहलकदमीया अगले कुछ घंटों में नया करने की ओर इशारा कर रही है।
हालांकि इसके पिछले माह भी 30-31 जुलाई को पटना में बीजेपी ने अपने सभी सात मोर्चों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। बीजेपी ने 200 सीटों पर तैयारी करने की बात कही थी वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा था कि 200 क्यों, 243 सीटों पर तैयारी करिये। उन्होंने यह भी कहा था कि जेडीयू भी 243 सीटों की तैयारी कर रही है। हालांकि, बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को किसी तरह के नुकसान पहुंचाने की बात से बीजेपी नेताओं ने इनकार किया था।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी और जेडीयू 2024 में साथ में चुनाव लड़ेगी। बीजेपी महासचिव अरुण सिंह ने कहा था कि बीजेपी और जेडीयू 2024 का लोकसभा चुनाव और 2025 का विधानसभा चुनाव साथ में लड़ेंगी, जिसे लेकर कोई भ्रांति नहीं है लेकिन जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने चिराग मॉडल की चर्चा कर जता दिया है कि बीजेपी और जेडीयू के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। ललन सिंह ने रविवार को कहा कि 2020 में एक मॉडल तैयार किया था, जिसे चिराग मॉडल कहा गया, अब एक और चिराग मॉडल तैयार किया जा रहा था। दरअसल, 2020 में एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने जेडीयू के खिलाफ ही बीजेपी के कई बड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाकर चुनाव में उतार दिया था।
एनडीए की वर्ष 2020 में सरकार गठन के बाद से ही समय समय पर गठबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जिसे आमतौर पर भाजपा के राज्यस्तरीय नेताओं ने हवा देने का काम किया तो राष्टीय नेतृत्व ने हर बार डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। उधर नीतीश कुमार अपनी खामोशी के बीच में अग्निवीर की भर्ती से लेकर जातिगत जनगणना की मांग कर भाजपा को परेशानी में डालने में पीछे नहीं रहे। इसका एक भावार्थ यह भी निकाला जा सकता है कि नीतीश कुमार भी आंख दिखाने में पीछे नहीं रहे। इस बीच आरसीपी सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
नीतीश से जुदा होकर भाजपा का लोटस ऑपरेशन संदिग्ध
महाराष्ट्र में शिव सेना को तोड़कर भाजपा ने अपने लोटस ऑपरेशन को पूर्ण कर लेने का जश्न मनाया है। इसके बाद से ही बिहार में भी खेला होने की चर्चा शुरू हो गई। कहा जा रहा था कि आरसीपी सिंह को अपने अभियान का माध्यम बनाने की कोशिश करने में भाजपा जुट गई थी। इस कयास को पुष्ट करने का जदयू अध्यक्ष ललन सिंह के बयान में भी दिखा। जिसमें उन्होंने विधान सभा चुनाव में लोजपा को मोहरा बनाने का उदाहरण देते हुए ऐसा ही एक और खेल करने की बात कह डाली है। कहा जा रहा है कि यह कयास लगते ही जदयू ने आरसीपी सिंह पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बाहर जाने का रास्ता बना दिया। आरसीपी सिंह भले ही नीतीश कुमार के सामने नहीं टिक पायें, पर यह सच है कि लंबे समय से जेडीयू के सांगठनिक कार्य करने से उनके विधायकों पर पकड़ मजबूत रही है। ऐसे में अब जब आरसीपी सिंह पार्टी से बाहर जा चुके हैं,ऐसे वक्त में यह विधायकों को तोड़ने में कितना कामयाब हो पायेंगे। यह बड़ा सवाल है। खास बात यह भी है कि जदयू को दो फाड़ करके भी भाजपा के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा।
बहुमत के जादुई आंकड़े से महागठबंधन चंद कदम दूर
बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के लिहाज से अब आरजेडी के 80 विधायक हो गए हैं। कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के 16 मिलाकर, महागठबंधन के पास कुल 115 सीटें हो गई हैं। ऐसे में महागठबंधन के पास 7 की संख्या कम है। वहीं बीजेपी(77), जेडीयू(45) और हम(4) को मिलाकर एनडीए के पास अब भी 126 विधायक हैं। यानी उसके पास 122 के जादुई आंकड़े से 4 सीटें ज्यादा है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए महागठबंधन को एनडीए के खेमे से कम से कम 6 विधायक तोड़ने होंगे। एनडीए से 6 विधायक कम हो जाएं तो उनके पास 120 सीटें बचेंगी और एक निर्दलीय को साथ लेकर भी वह जादुई आंकड़े से दूर रह जाएगी। वहीं महागठबंधन को जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए 7 और विधायकों की जरूरत है।
तोड़फोड़ के खेल में भाजपा के आगे भारी पड़ सकती है आरजेडी
बिहार विधान सभा के 243 सीटों में से किसी को भी सरकार बनाने के लिए 122 अंकों की जरूरत है। ऐसे में मौजूदा गठबंधन के अनुसार आरजेडी महागठबंधन को सात सदस्यों की जरूरत है। इसके लिए जदयू में टूट की स्थिति में भी छोटी संख्या लेकर भी आरजेडी सरकार बना सकती है। उधर एनडीए में भाजपा के साथ अगर जदयू की मौजूदा संख्या अगल हो जाती है तो मात्र 81 संख्या रह जाएगी। ऐसे में सरकार बनाने के लिए और 41 सीटों की जरूरत पड़ेगी। अर्थात नीतीश कुमार को छोड़कर जदयू के 45 में से 41 सदस्यों कांे अपने पक्ष में कर पाना असंभव सा है। ऐसे में महागठबंधन में सेंध लगाना भाजपा की राजनीतिक मजबूरी होगी। इस प्रयास में इतनी बड़ी संख्या हासिल करना भाजपा के आसान नहीं है। ऐसे में कह सकते हैं कि भाजपा का नीतीश कुमार को अलग कर लोटस ऑपरेशन चलाना आसान नहीं है।
मंगलवार के राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी सबकी नजर
अब देखना है कि मंगलवार को क्या बड़ा उलटफेर होता है। मंगलवार को जद यू व आरजेडी ने अपनी अलग अलग बैठक बुलाई है। इसी क्रम में जीतन राम मांझी भी अपने विधायकों के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस विधायकों की भी बैठक होगी। नीतीश कुमार के सोनिया गांधी से वार्ता के बाद की स्थितियों व मंगलवार को इन दलों की बैठकों का नतीजा किस ओर जाता है ,यह तो आनेवाला कल ही बतायेगा। अब देखना है कि मौजूदा गठबंधन मजबूरी में बना रहता है या चाचा (नीतीश कुमार) भतीजा (तेजस्वी यादव ) साथ चल पड़ते है। इन सबसे इतर भाजपा कोई बड़ा चमत्कार करती है।











