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ट्रेन में मरी इंसानियत: प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला की किसी ने नहीं की मदद, बोगी के फर्श पर जन्मे बच्चे ने तोड़ा दम

Janjwar Desk
21 Nov 2021 4:46 AM GMT
ट्रेन में मरी इंसानियत: प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला की किसी ने नहीं की मदद, बोगी के फर्श पर जन्मे बच्चे ने तोड़ा दम
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(चलती ट्रेन में मदद के लिए तड़पती रही गर्भवती महिला)

Bihar News: विक्रमशिला एक्सप्रेस ट्रेन अब तक अपने नियमित समय पर चल रही थी, लेकिन पटना से आगे बढ़ने के बाद ट्रेन ने सुस्त रफ्तार पकड़ ली। ट्रेन ज्यों-ज्यों अपने निर्धारित समय से लेट हो रही थी, गर्भवती महिला का दर्द भी बढ़ने लगा...

Bihar News: भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ट्रेनों में गरीब मजदूरों की जगह सिर्फ बोगी के फर्श पर ही है। इसी बोगी के फर्श पर शुक्रवार, 19 नवंबर को इंसानियत ने दम तोड़ दिया। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला मदद की गुहार लगाती रही लेकिन उसकी मदद के लिए लोगों से भरी ट्रेन में एक भी इंसान सामने नहीं आया। नतीजतन, महिला का बच्चा जन्म लेते ही जालिम दुनिया को अलविदा कह गया।

मामला बिहार का है। यहां भागलपुर (Bhagalpur) के मधुसुदनपुर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर भतोरिया निवासी वरुण दास दिल्ली में मजदूरी का काम करते है। शुक्रवार, 19 नवंबर को उसने अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी सोनी देवी और दो छोटे बच्चों सत्यम (7) और शिवम (3) के साथ विक्रमशिला एक्सप्रेस (Vikramshila Express) से घर के लिए विदा किया था। हमेशा की तरह मजदूर परिवार के पास रिजर्व सीट नहीं थी। फर्श पर दो छोटे छोटे बच्चे और गर्भ में एक जान लिए सोनी फर्श पर ही बैठ गई। घर आकर वह अपने तीसरे बच्चे को जन्म देना चाहती थी। मगर गाजियाबाद पहुंचते ही महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।

शनिवार, 20 नवंबर को ट्रेन पटना पहुंची तब तक दर्द ज्यादा बढ़ गया। विक्रमशिला एक्सप्रेस ट्रेन (Vikramshila Express Train) अब तक अपने नियमित समय पर चल रही थी, लेकिन पटना से आगे बढ़ने के बाद ट्रेन ने सुस्त रफ्तार पकड़ ली। ट्रेन ज्यों-ज्यों अपने निर्धारित समय से लेट हो रही थी, गर्भवती महिला का दर्द भी बढ़ने लगा। अब वह फर्श पर पड़ी तड़पने लगी। चीख-चीखकर महिला एक सीट के लिए लोगों से गुहार लगा रही थी, लेकिन ट्रेन में बैठे लोगों की इंसानियत पहले ही दम तोड़ चुकी थी।

महिला के अनुसार, उसके पास के एक यात्री ने कहा कि, "मैंने पैसा खर्च कर सीट ली है।" यात्रा कर रही दूसरी महिला ने कपड़ा खराब होने की बात कहकर पीछा छुड़ाया। सोनी को उसकी प्रसव पीड़ा और दो छोटे बच्चों के साथ सबने छोड़ दिया। किसी ने रेलवे प्रशासन को सूचना देने की भी जरूरत भी नहीं समझी। क्यूल पहुंचने के बाद महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। इलाज के अभाव में नवजात ने कुछ ही देर में दुनिया को अलविदा कह दिया।

करीब 3:15 घंटे की देरी से विक्रमशिला एक्सप्रेस भागलपुर स्टेशन पहुंची। सूचना मिलने पर रेलवे अधिकारी भी पहुंचे। इलाज की बात कहते हुए उसे रेलवे अस्पताल (Railway Hospital) ले गए। महिला को कुछ दवा देकर वहां से घर भेज दिया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद सीनियर डीसीएम पवन कुमार महिला को देखने पहुंचे। सीनियर डीसीएम ने बताया कि महिला पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से सफर कर रही थी। वह अकेली थी। जब ट्रेन पटना पहुंची तो उसे लेबर पेन होने लगा। ट्रेन के टीटीई ने महिला को पटना में ही उतर जाने की सलाह दी, लेकिन महिला उतरने को तैयार नहीं हुई। जमालपुर पहुंचने से पहले बच्चे का जन्म हो गया। कोई उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उसकी जान नहीं बचायी जा सकी।

बताया गया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (Deendayal Upadhyay Junction) पर चेकिंग के दौरान उस महिला को बिना टिकट पाया गया। इसपर टीटीई ने महिला से चार्ज भी किया। भागलपुर पहुंचने के बाद महिला के दो बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे और लेकर घर गए।

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