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Halla Bol Yatra: पूरे बिहार में 'हल्ला बोल यात्रा' करके पटना पहुँचे अनुपम, 25 को होगा युवा सम्मेलन

Janjwar Desk
23 Sep 2022 11:13 AM GMT
Halla Bol Yatra: पूरे बिहार में हल्ला बोल यात्रा करके पटना पहुँचे अनुपम, 25 को होगा युवा सम्मेलन
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Halla Bol Yatra: पूरे बिहार में भीषण बेरोज़गारी के खिलाफ 'हल्ला बोल यात्रा' के बाद युवा नेता अनुपम राजधानी पटना पहुँच गए हैं। इसी के उपलक्ष में रविवार 25 सितंबर को सिन्हा लाइब्रेरी रोड स्थित अदिति कम्युनिटी सेंटर में युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया है।

Halla Bol Yatra: पूरे बिहार में भीषण बेरोज़गारी के खिलाफ 'हल्ला बोल यात्रा' के बाद युवा नेता अनुपम राजधानी पटना पहुँच गए हैं। इसी के उपलक्ष में रविवार 25 सितंबर को सिन्हा लाइब्रेरी रोड स्थित अदिति कम्युनिटी सेंटर में युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन में यात्रा के अनुभव और रिपोर्ट साझा करने के अलावा आंदोलन की आगामी रूपरेखा भी रखी जायेगी। पटना के युवा सम्मेलन में बतौर अतिथि जानेमाने समजवासी प्रो. आनंद कुमार, सेवानिवृत आईपीएस और सीआईसी रहे यशोवर्धन आज़ाद से लेकर ट्रेड यूनियन के नेता, कोचिंग के शिक्षक और जेपी सेनानी भी शिरकत करेंगे।

यह जानकारी 'युवा हल्ला बोल' संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने गाँधी संग्रहालय में मीडिया को संबोधित करते हुए दिया। अनुपम के साथ प्रेस वार्ता में 'युवा हल्ला बोल' के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद मिश्रा, बिहार प्रभारी प्रशांत कमल, महासचिव रजत यादव भी उपस्थित रहे।।

इस अवसर पर 'युवा हल्ला बोल' के राष्ट्रीय महासचिव और यात्रा प्रभारी प्रशांत कमल ने कहा, "बेरोज़गारी के खिलाफ एक राष्टव्यपी आंदोलन की ज़मीन तैयार कर रहे अनुपम की यात्रा को प्रदेश में अपार जनसमर्थन मिला है। विशेष तौर पर युवाओं और बुद्धिजीवी वर्ग की कार्यक्रमों में खूब भागीदारी रही। हर जिले में व्यापक स्तर पर जनसंवाद करके जाति धर्म से ऊपर उठकर महँगाई बेरोज़गारी पर बात किया गया। बेरोज़गारी के समाधान के तौर पर 'भारत रोज़गार संहिता' यानी भ-रो-सा का प्रस्ताव दिया गया। हर जिले में युवाओं ने सरकार से यही भ-रो-सा मांगा। जनसभा, रोडशो, बाइक रैली और पदयात्रा के माध्यम से प्रदेश के लाखों लोगों तक अनुपम की बात पहुंची।"


16 अगस्त को पश्चिम चम्पारण के भितिहरवा गाँधी आश्रम से शुरू करके हल्ला बोल यात्रा का संदेश बिहार के सभी जिलों तक पहुंचा। पहले ही सप्ताह में यात्रा चम्पारण, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर होते हुए दरभंगा जिले पहुँची। गाँधी जी की कर्मभूमि से शुरू करके ठप पड़े रीगा और सकरी चीनी मिलों पर भी यात्रा पहुँची। देश का चीनी उत्पादन का कभी 40% हिस्सा रखने वाला बिहार आज 4% भी नहीं रहा। अनुपम ने इस सवाल को मजबूती से उठाते हुए इसे सरकारों की घोर विफलता का परिणाम बताया। पिछले कुछ दशकों में सुनियोजित ढंग से बिहार में उद्योग नष्ट किया गया। बिहार के लोगों को आज दो वक्त की रोटी के लिए भी हजारों किलोमीटर पलायन करना पड़ता है। इस समस्या को लेकर 25 सितंबर के युवा सम्मेलन में 'उद्योग पुनर्जागरण आयोग' बनाया जाएगा। आयोग की सिफारिशों को लागू कराने के लिए आंदोलन से लेकर अदालत तक का रास्ता अपनाया जाएगा।

यात्रा के क्रम में फिर कोसी और सीमांचल क्षेत्र में अनुपम का जोरदार स्वागत हुआ और खूब समर्थन मिला। ज्ञात हो कि अनुपम स्वयं सुपौल जिले के रहने वाले हैं और कोसी क्षेत्र की बदहाली बेरोज़गारी को लेकर हमेशा मुखर रहे हैं। सहरसा सुपौल मधेपुरा अररिया किशनगंज पूर्णिया होते हुए यात्रा भागलपुर पहुँची। इसके बाद मुंगेर खगड़िया बेगूसराय में भी 'हल्ला बोल यात्रा' का स्वागत हुआ और आंदोलन की तैयारी में लोग शामिल हुए। जमुई बिहारशरीफ नवादा गया औरंगाबाद रोहतास कैमूर जैसे दक्षिण बिहार के जिलों में अनुपम के साथ युवाओं की खूब भागीदारी दिखी। सरकारी नौकरियों में देरी भ्रष्टाचार अनियमितता से त्रस्त नौजवान बदलाव के लिए तैयार दिखे।

'हल्ला बोल यात्रा' के दौरान कई जगहों पर बेरोज़गार युवाओं ने अनुपम से मिलकर अपनी पीड़ा और मनोदशा के बारे में खुलकर बताया। आरा बक्सर होते हुए सिवान समस्तीपुर में भी लोगों ने अनुपम के कंधा से कंधा मिलाकर संघर्ष करने का भरोसा जताया।

बढ़ती आत्महत्या को लेकर समझ बनी की हताश युवाओं के लिए हर जिले में करियर कॉउंसलिंग सेंटर बनना चाहिए। इस केंद्र की सीधी जवाबदेही जिलाधिकारी की हो और किसी भी युवा की आत्महत्या पर वो मीडिया के समक्ष उसकी रिपोर्ट रखें। साथ ही, रविवार को पटना में हो रहे युवा सम्मेलन में अलग अलग सरकारी भर्तियों के लिए एक समन्वय समिति बनाया जाएगा। इस समिति का कार्य होगा कि समयबद्ध और निष्पक्ष चयन प्रणाली के लिए समूहों के बीच समन्वय बनाना। अनुपम ने बताया कि उनका मकसद है देश को इस हताशा और निराशा से बाहर निकालकर उम्मीद और समाधान की तरफ ले जाना। यह सिर्फ पार्टियों के सत्ता परिवर्तन से संभव नहीं। यह तभी संभव है जब देश के आम युवा सकारात्मक बदलाव के लिए आवाज़ उठाएं। 'भारत रोज़गार संहिता' यानी भ-रो-सा वो समाधान है जिसकी मांग के लिए आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।

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