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झारखंड : राज्यसभा चुनाव के लिए संख्या बल के दावे के बावजूद भाजपा ने अपने विधायकों को किया 'पाॅलिटिकल क्वारंटीन'

Janjwar Desk
18 Jun 2020 6:48 AM GMT
झारखंड : राज्यसभा चुनाव के लिए संख्या बल के दावे के बावजूद भाजपा ने अपने विधायकों को किया पाॅलिटिकल क्वारंटीन
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झारखंड में राज्यसभा चुनाव हमेशा रोचक रहा है। इस बार बाहरी व थैलीशाह प्रत्याशियों के नहीं रहने से माना जा रहा था कि चुनाव सामान्य होगा, लेकिन अंततः वह फिर रोचक हो गया है...

रांची, जनज्वार। झारखंड में राज्यसभा चुनाव की खबरें हमेशा राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनती रही हैं। पहले थैलीशाह झारखंड आकर राज्यसभा जाते रहे हैं। राष्ट्रीय दल व राजनीतिक रूप से प्रभावशाली पार्टियां व नेता अपने पसंद के दूसरे प्रदेशों की राजनीति करने वाले लोगों को भी यहां से राज्यसभा में भेजती रही हैं। पर, संभवतः यह पहला मौका है जब झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में कूदे तीन उम्मीदवार स्थानीय हैं और विशुद्ध रूप से राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। इसके बावजूद इस बार का चुनाव भी सुर्खियां बन रहा है। इसकी वजह है राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए संख्या बल होने के बावजूद भाजपा द्वारा अपने विधायकों को मतदान तक एक स्कूल में रखा जाना। भाजपा विधायकों के मन बदलने को लेकर आशंकित है।

भाजपा के झारखंड प्रभारी ओम माथुर व अरुण सिंह ने कल भाजपा विधायकों के साथ एक बैठक की और उसमें तय किया गया कि सभी मतदान तक एक ही जगह एक स्कूल में रहेंगे। चुनाव को लेकर आशंकित भाजपा ने अपनी बैठक को विस्तारित कर एनडीए की बैठक बना दिया था। भाजपा के सभी विधायकों को रांची के प्रतिष्ठित सरला बिरला स्कूल में रखा गया है। यहां विधायकों के लिए क्रिकेट खेलने से लेकर हर तरह के प्रबंध किए गए हैं। ये विधायक कल यानी 19 जून को होने वाले मतदान तक यहीं रहेंगे। भाजपा के इस फैसले को राज्य में राजनीतिक क्वारंटीन कहा जा रहा है।

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार हैं। सत्ताधारी झामुमो से शिबू सोरेन, उसकी सहयोगी कांग्रेस से शाहजादा अनवर और विपक्षी भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश। दूसरी सीट के लिए शाहजादा अनवर व दीपक प्रकाश की बीच बेहद कड़ा मुकाबला है। भाजपा पहले जीत को लेकर आश्वस्त थी, लेकिन उसकी चिंता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो की मुलाकात के बाद बढ गयी है। भाजपा की दूसरी चिंता गैर झामुमो-गैर कांग्रेस विधायकों द्वारा शिबू सोरेन को दूसरी प्राथमिकता का वोट मिलने से भी जुड़ी हुई है।


झारखंड एनडीए की बैठक लेते ओम माथुर.


झारखंड एनडीए की बैठक लेते ओम माथुर.राज्यसभा चुनाव में एक विधायक को दो वोट करना होता है - एक पहली प्राथमिकता का और दूसरा दूसरी प्राथमिकता का। भाजपा के पूर्व दिग्गज नेता व राज्यसभा चुनाव में समर्थन का एलान कर चुके सरयू राय ने भी यह कह दिया है कि वे पहली प्राथमिकता का वोट तो दीपक प्रकाश को ही देंगे, लेकिन दूसरी प्राथमिकता का वोट शिबू सोरेन को देंगे। दूसरी प्राथमिकता का वोट कई सूबों के राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलट-फेर करता रहा है।

81 सदस्यीय विधानसभा में इस वक्त 79 सदस्य हैं और सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस की ही जीती हुईं दो सीटें रिक्त हैं। ऐसे में एक सीट जीतने के लिए सामान्य तौर पर 27 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा के पास बाबूलाल मरांडी सहित खुद के 26 विधायक हैं। उसे इसके साथ सरयू राय, अमित मंडल और आजसू के घोषित रूप से दो विधायकों का भी समर्थन हासिल है। इस तरह भाजपा को प्रत्यक्ष रूप से 30 विधायकों का समर्थन हासिल दिख रहा है। यह भी पक्का हो चुका है कि जेल में बंद भाजपा के दबंग विधायक ढुल्लू महतो भी वोट करेंगे ही। लेकिन, दूसरी प्राथमिकता के वोट चुनाव परिणाम की दिशा मोड़ सकते हैं।में भाजपा का पूरा राजनीतिक प्रबंधन हर हाल में राज्यसभा चुनाव जीतने में लग गया है। इसके लिए उसने अपने ही विधायकों को राजनीतिक रूप से अलग-थलग (पाॅलिटिकल क्वारंटीन) रखने का निर्णय लिया है।


झारखंड महागठबंधन की बैठक में शामिल सत्तापक्ष के विधायक.


उधर, दूसरी ओर मुख्यमंत्री व झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन व झारखंड कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक पीएल पुनिया ने पार्टी नेताओं, सहयोगी दलों एवं विधायकों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में यह दावा किया गया कि झामुमो-कांग्रेस के अलावा हमारे पास राजद, एनसीपी वाम दलों का समर्थन है और अन्य सामान विचारधारा वालों से बात चल रही है। हेमंत सोरेन ने महागठबंधन के उम्मीदवारों शिबू सोरेन व शाहजादा अनवर के जीत के प्रति विश्वास व्यक्त किया है।

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