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Tamil Nadu : दो महिलाओं को अवैध हिरासत में रखने के बदले 5-5 लाख मुआवजा दे सरकार - मद्रास हाईकोर्ट

Janjwar Desk
24 Sept 2022 5:16 PM IST
स्वास्थ्य और शिक्षा लोगों के दो प्राथमिक जरूरतों में शामिल हैं। इसके पूर्ण प्रबंधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास होना चाहिए।
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स्वास्थ्य और शिक्षा लोगों के दो प्राथमिक जरूरतों में शामिल हैं। इसके पूर्ण प्रबंधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास होना चाहिए।

Tamil Nadu News : स्थानीय सलाहकार बोर्ड द्वारा बूटलेगर के आरोपी दो महिलाओं को क्लिन चिट देने के बावजूद अवैध तरीके से 128 दिन तक हिरासत में रखने पर मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Tamil Nadu News : दो महिलाओं के खिलाफ बूटलेगर ( Bootleggers ) यानि गैर कानूनी तरीके से वस्तुओं के विनिमय करने के आरोपों को स्थानीय सलाहकार बोर्ड द्वारा गलत करार देने के बावजूद 128 दिन तक अवैध हिरासत में रखने पर मद्रास हाईकोर्ट ( Madras High Court ) ने शनिवार को बड़ा फैसला दिया। जस्टिस एस वैद्यनाथन और एडी जगदीश चंद्र की खंडपीठ ने अपने आदेश में तमिलनाडु सरकार ( Tamil Nadu Government ) से दोनों महिला को पांच-पांच लाख रुपए बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

मद्रास हाईकोर्ट ( Madras High Court ) में दायर याचिका के जरिए दोनों महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें गैर कानूनी तरीके से 128 दिनों में अवैध हिरासत ( women illegal custody ) में रखा गया है। उन पर गैर कानूनी तरीके से वस्तुओं के विनिमय का आरोप लगाया गया है, जिसे स्थानीय सलाहकार बोर्ड ने गलत करार दिया था। बूटलेगर के आरोपों से क्लिन चिट मिलने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया है।

अवैध हिरासत में रखना घोर लापरवाही

इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट( Madras High Court ) ने कहा कि यह नौकरशाही की लापरवाही और नागरिक अधिकारों के प्रति घोर उदासीनता का पर्याय है। नौकरशाही के इस रवैये से साफ है कि उसने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता से दोनों महिलाओं को वंचित रखने की गंभीर भूल की है। जस्टिस एस वैद्यनाथन और एडी जगदीश चंद्र की खंडपीठ ने मनोकरण और दिव्या की दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर यह आदेश दिया है। जबकि एक ने अपनी पत्नी मुथुलक्ष्मी की रिहाई की मांग की तो दूसरे ने अपनी मां सत्या की रिहाई की मांग की थी।

पीड़ित महिला मुआवजे की हकदार

न्यायाधीशों अपने नोट साफ शब्दों मं कहा कि दोनों को नागापट्टिनम कलेक्टर-सह-जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर 28 जनवरी 2022 को हिरासत में लिया गया था। इस मामले में स्थानीय सलाहकार बोर्ड ने 16 मार्च 2022 को राय दी थी कि उनकी नजरबंदी का कोई पर्याप्त कारण नहीं है। इसके खिलाफ सरकार ने 22 जुलाई को ही निरसन आदेश पारित किया था। वह भी मद्रास हाईकोर्ट में मामला दाखिल होने के बाद। यानि बूटलेगर के दोनों आरोपियों को जान बूझकर अवैध तरीके से 128 दिनों तक हिरासत में रखा गया। इसके लिए दोनों को मुआवजा देने की जरूरत है।

सरासर निजी स्वतंत्रता का हनन

Tamil Nadu News : दो जजों की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को उचित तिथि से परे हिरासत में लिया जाता है तो यह कानून की मंजूरी के बिना कारावास या नजरबंदी माना जाता है। ऐसा करना न केवल अनुच्छेद 19डी का उल्लंघन है। अनुच्छेद 21 और अन्य प्रावधानों के तहत ऐसा व्यक्ति मुआवजे का हकदार है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार को दोनों महिलाओं में से प्रत्येक को छह सप्ताह के भीतर मुआवजे के लिए 5 लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही केस को भी समाप्त घोषित कर दिया।

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