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हॉट सीट रूद्रपुरः कांग्रेस के गढ़ में BJP के मंत्री की फंसी नइया, सपा खोज रही अपनी खेवइया

देवरिया से जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
Rudrapur Assembly Constituency: उतर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने में अभी तकरीबन चार माह शेष हैं। इसके पहले राजनीतिक मंथन तेज हो गया है। भाजपा अपनी पुरानी सीटों को बरकरार रखने के लिए लुभावने वादों का रागअलापना अभी से ही शुरू कर दी है। हालांकि सरकार के कई मंत्रियों की स्थिति इस कदर है कि वे अपनी सता बरकरार रखने की बात तो दूर अपनी खूद की सीट बचाने की चिंता से जुझ रहे हैं। यहां हम बात कर रहे हैं देवरिया जिले के हॉट सीट रूद्रपुर विधानसभा क्षेत्र की। इस सीट से भाजपा के जयप्रकाश निषाद पशुधन,मत्स्य एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री के रूप में सरकार में हिस्सेदार हैं। कांग्रेस के कभी गढ़ रहे रूद्रपुर से भाजपा के मंत्री जयप्रकाश की चुनावी नैया फंसी हुई नजर आ रही है, तो सपा अभी अपनी चुनावी नैया को पार लगाने के लिए अपने खेवनहार का तलाश करने में जुटी है। पार्टियों के मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक व पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह अपने उम्मीदवारी को लेकर आश्वस्त हैं।
अभी से ही चुनावी सरगर्मिया तेज
राज्य में चुनावी अधिसूचना जारी होने में तकरीबन एक माह शेष हैं। इसके पूर्व विपक्ष जहां सरकार पर हमला तेज कर दिया है,वहीं सत्ता पक्ष के लोग उदघाटन व शिलान्यास में व्यस्त है।ं इन सबसे इतर लोगों के बीच अभी से ही चुनावी सरगर्मिया तेज हो गई है। ऐसे में लोगों के नजर में रूद्रपुर सीट का हाल जानने के दौरान जो बातें सामने आई उसके मुताबिक यहां से तीन बार विधायक रहे सरकार के मंत्री जयप्रकाश निषाद बड़ी मुश्किल में हैं। पिछले चुनाव में भाजपा के लहर में जयप्रकाश निषाद ने 77 हजार 754 मत पाकर कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को शिकस्त दी थी। अखिलेश सपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में 50 हजार 965 मत हासिल कर सके थे। जबकि बसपा के चंद्रिका निषाद 23 हजार 81 मत मिले थे।
भाजपा मंत्री के सरल स्वभाव की है चर्चा
पांच वर्ष के भाजपा शासनकाल में मंत्री रहने के बाद भी जन आकांक्षाओं पर खरा न उतरने को लेकर भाजपा के जयप्रकाश निषाद का अपने रूठे हुए मतदाताओं को मनाना इतना आसान नहीं होगा। हालांकि उनके सरल स्वभाव की राजनीतिक विरोधी भी चर्चा करते हैं। संगठन के लिहाज से दे खें तो जयप्रकाश दो बार पार्टी जिलाध्यक्ष व चार बार उपाध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश मंत्री के रूप में भी पार्टी में सेवा दे चुके हैं।
सपा की उम्मीदवारी के बाद तय होगा समीकरण
विधानसभा क्षेत्र रूद्रपुर सीट के लिहाज कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह की दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यकता आश्वस्त हैं। संगठन में उनकी प्रमुख अहमीयत मानी जाती है। पिछले बार सपा के गठबंधन उम्मीदवार के रूप में ये चुनाव मैदान में उतरे थे। इस बार दोनों दलों के अपनी अलग अलग दावेदारी जताने के चलते सपा के उम्मीदवार भी मैदान में होंगे। जिसमें पूर्व मंत्री रामभूवाल निषाद व पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह के अलावा प्रदीप यादव समेत अन्य कई लोगों के नामों की चर्चा है। जबकि बसपा से पिछला चुनाव लड़े चंद्रिका निषाद की कोई राजनीतिक गतिविधियां नजर नहीं आ रही है।ऐसे में बसपा से अब तक कोई प्रभावकारी उम्मीदवार सामने आने की उम्मीद कम ही है। इन समीकरणों में यह कहा जा सकता है कि सपा उम्मीदवार का चेहरा तय होने के बाद ही समीकरण साफ हो पाएगा। इस बीच भाजपा की राह रोकने के कांग्रेस की दावेदारी को कम करने नहीं आका जा सकता।
सामाजिक संरचना में प्रभावी भूमिका में निषाद
सामाजिक संरचना पर अगर गौर करें तो विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या निषादों की 38 हजार के पार है। इसके बाद अनुमानित संख्या ब्राम्हणों की 35 हजार से अधिक व क्षत्रिय की 21 हजार से अधिक है।दलित 37 हजार व यादव 23 हजार,सैंठवार 18 हजार,वैश्य 30 हजार,मुस्लिम 15 हजार से अधिक हैं। ऐसे में सबकी नजरें निषाद मतदाताओं पर रहती है। हाल के महीनों में निषाद के परंपरागत मतों पर कब्जा को लेकर भाजपा व सपा दोनों में होड़ मची है। दोनों दल जातिगत वोटों को समेटने के लिए उनसे जुडे स्वयंभू नेताओं को पक्ष में करने में लगी है। ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि रणनीति में कौन भारी पड़ेगा।
भाजपा को अपने कार्यों पर भरोसा
इनके जीत का दावा करनेवाले लोगों की दलीले यह है कि पांच वर्ष में करोड़ों रूपये की लागत से विकास कार्यो को जयप्रकाश ने अंजाम दिया है।मठिया तिवारी मदनपुर और सूरजपुर में चार करोड़ की लागत से बिजली घर निर्माण,11 करोड़ की लागत से सेहुडा पकडी़ बाजार में राजकीय आईटीआई कालेज का निर्माण जारी है। इसके अलावा 11 करोड़ की लागत से नगवा में राजकीय इंटर कालेज का निर्माण प्रमुख उपलब्धि है। एक करोड़ की लागत से पशु चिकित्सालय गौरी बाजार और रूद्रपुर का निर्माण,80 लाख की लागत से कृषि कल्याण केंद्र, 20 करोड़ की लागत से 30 किलोमीटर तिघरा-मराक्षी बांध मार्ग,पचलड़ी बेलवा मार्ग,मदनपुर केवटलिया रघवा पौहरिया मार्ग निर्माण शामिल है।
कांग्रेस को आठ बार मिली है जीत
वर्ष 1952 से अब तक के जीत का आकलन करें तो यहां से कांग्रेस को स र्वाधिक 8 बार जीत मिली है,तो भाजपा को तीन बार। यह तीनों सफलता जयप्रकाश निषाद के नाम रहा है।जबकि सपा को दो बार व बसपा को भी एक बार मतदाताओं ने मौका दिया है। पहला विधान सभा चुनाव 1952 में स्वतंत्रता सेनानी रामजी सहाय के नाम रहा। इसके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के चंद्रबली सिंह ने 1962 का चुनाव जीता।1967 में यह सीट सुरक्षित हो जाने पर कांग्रेस के डा सीताराम व 1974 में राजेन्द्र प्रसाद गुप्त के नाम रहा।फिर एक बार गैर कांग्रेसी के रूप में 1977 में जनता पार्टी के प्रदीप बजाज ने बाजी मार ली। 1980 मेे मध्यावधि चुनाव कांग्रेस के भाष्कर पाण्डेय के नाम रहा।1984 में भी कांग्रेस के ही गोरखनाथ ने चुनावी बाजी मारी।1989 के चुनाव में मतदाताओं ने जनता दल के मुक्तिनाथ यादव को विजयी बनाया। हालांकि 1 991 के मध्यावधि चुनाव में भाजपा के जयप्रकाश निषाद को विजय हासिल हुई। 1993 के मध्यावधि चुनाव में सपा से एक बार फिर मुक्तिनाथ यादव को जीत मिली।इसके बाद 1996 में भाजपा के जयप्रकाश निषाद,2002 में सपा के अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिह,2007 में बसपा के सुरेश तिवारी,वर्ष 2012 में कांग्रेस पार्टी के अखिलेश प्रताप सिंह व 2017 के चुनाव में भाजपा के जयप्रकाश निषाद को विजय मिली।
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