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Gorakhpur News: अंधविश्वास की हद, बारिश न हुई तो भाजपा विधायक ही को नहला दिया कीचड़ से

Gorakhpur News: अंधविश्वास की हद, बारिश न हुई तो भाजपा विधायक ही को नहला दिया कीचड़ से
Gorakhpur News : मानसून के समय बरसात न हो तो इसके लिए भारत में कई प्रकार के टोने-टोटके प्रचलित हैं। कहीं मेंढक की मेंढकी से शादी कराई जाती है तो कहीं छोटे बच्चों का समूह मुहल्ले बस्ती के हर घर पर जाकर अपने ऊपर पानी का बौछार करवाता है। लेकिन पूर्वांचल के महाराजगंज जिले में अंधविश्वास के चलते बरसात न होने पर कीचड़ स्नान की परम्परा है। और जिले में बारिश न होते देख इसी परम्परा का निर्वाह करते हुए ग्रामीणों ने मंगलवार की रात अपने विधायक को कीचड़ से जमकर नहला दिया।
नगर के पिपरदेउरा मुहल्ले की महिलाओं ने सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल को मंगलवार रात कीचड़ से नहलाने के बाद कहा कि अब इंद्र भगवान खुश होंगे और बारिश होगी। सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया ने भी कहा कि भीषण गर्मी में सभी लोग परेशान हैं। बारिश न होने के कारण धान रोपाई नहीं हो पा रही है। पुरानी परंपरा रही है कि कीचड़ से किसी को नहलाने पर इंद्र भगवान खुश हो जाएंगे और बारिश होगी। इस आयोजन के बाद क्षेत्र में बारिश होगी। जिससे फसलों को भी फायदा होगा। इस अवसर पर सभासद सिनोद कुमार, गोपाल शर्मा, हरी सिंह आदि मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में बारिश न होने से परेशान महिलाओं ने #BJP विधायक जयमंगल कन्नौजिया और नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल को कीचड़ से नहलाया. ये मान्यता है कि ऐसा करने से इंद्र देव खुश होंगे और बरसात होगी. विधायक का कहना है कि ये यहां कि परंपरा है. @KanojiyaJai pic.twitter.com/fVsgvrtWBy
— Nitesh Ojha (@niteshojha786) July 13, 2022
बता दें कि कि बरसात न होने से धान की पौध सूख रही है, जिससे किसान परेशान हैं। कुछ किसानों ने पंपिंग सेट से खेत की सिंचाई शुरू कर दी है। कहीं-कहीं इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ, कीर्तन किया जा रहा है। इसके साथ ही कई लोगों की ओर से टोटके आजमाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में बारिश न होने पर किसी व्यक्ति के ऊपर कीचड़ फेंकने या उसे नहलाने की इस परम्परा के पीछे लोगों का विश्वास है कि इससे इंद्र भगवान खुश होते हैं और बारिश कराते हैं। पूर्वांचल का यह महाराजगंज जिला कृषि आधारित क्षेत्र है। आशंका है कि बिना बारिश के यहां धान का उत्पादन घट सकता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।











