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राजनीति

RCP Singh News: आरसीपी हुए जुदा तो JDU में मची हलचल, BJP के महाराष्ट्र लोटस ऑपरेशन के बाद बिहार पर बढ़ी नजर

Janjwar Desk
8 Aug 2022 10:15 AM IST
RCP Singh News: आरसीपी हुए जुदा तो जदयू में मची हलचल, भाजपा के महाराष्ट्र लोटस ऑपरेशन के बाद बिहार पर बढ़ी नजर
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RCP Singh News: आरसीपी हुए जुदा तो जदयू में मची हलचल, भाजपा के महाराष्ट्र लोटस ऑपरेशन के बाद बिहार पर बढ़ी नजर

RCP Singh News: राजनीति में कहा जाता है कि जो दिखता है वह होता नहीं व जो नहीं दिखता है वही हो जाता है। राजनीतिक कयास से जुड़े इस मुहाबरे की चर्चा एक बार फिर बिहार के सियासी जानकार करने लगे हैं।

जितेंद्र उपाध्याय का विश्लेषण

RCP Singh News: राजनीति में कहा जाता है कि जो दिखता है वह होता नहीं व जो नहीं दिखता है वही हो जाता है। राजनीतिक कयास से जुड़े इस मुहाबरे की चर्चा एक बार फिर बिहार के सियासी जानकार करने लगे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री व जदयू के राष्टीय अध्यक्ष रहे आरसीपी सिंह के पार्टी से इस्तीफे के बाद अंदर खाते जदयू में हलचल मची हुई है, तो दूसरी तरफ इस पूरे खेल को भाजपा के रणनीतिकार देखने मेें लगे हैैं। यह बात कही जाने लगी है कि में भाजपा को अपने लोटस ऑपरेशन में मिली कामयाबी के बाद उसके एजेंडे में अब बिहार के शामिल हो जाने से इंकार नहीं किया जा सकता।

इसके तह में जाने से पहले बिहार के सियासी राजनीति के सबसे सफल खिलाड़ी नीतीश कुमार को भी समझना जरूरी हो जाता है। संख्या बल में भले ही छोटी पार्टी रही हो पर अपने राजनीतिक खेल में नीतीश कुमार पिछले 2005 से शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं। जीतन राम मांझी के चंद माह के मुख्यमंत्री कार्यकाल को अगर किनारे कर दे तो लगातार नीतीश कुमार के पास बतौर मुख्यमंत्री सत्ता की चाभी है।

हालांकि इस अवधी में उन्हें कई बार कुर्सी के संकट का सामना करना पड़ा है, लेकिन हर बार अपने विरोध में बन रहे राजनीतिक समीकरण को ध्वस्त कर पासा अपने पक्ष में करने में कामायाब रहे हैं। यहीं तक नहीं भाजपा नेतृत्व को भी नीतीश कुमार ने अलग राजनीतिक राग छेड़कर उसे चुनौती देने में पीछे नहीं रहे। जिसका नतीजा रहा की भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष से लेकर पार्टी के प्रदेश प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान तक ने सफाई देते हुए नीतीश के प्रति अपनी निष्ठा जता चुके हैं। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल से लेकर बिहार से केंद्र सरकार में मंत्री अश्वनी चौबे समेत कई कददावार नेता नीतीश कुमार के खिलाफ बयान देकर राजनीतिक तापमान बढ़ाने में पीछे नहीं रहे।

ताजा राजनीतिक घटना क्रम दो दिन पूर्व शुरू हुई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह पर अकूत अचल संपत्ति का आरोप लगाते हुए जदयू नेतृत्व ने उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा। इसी के साथ बिहार में सियासी हलचलें तेज हो गई। तमाम बड़े नेता लगातार आरसीपी सिंह पर जुबानी हमला करते नजर आ रहे थे।

जेडीयू की ओर से आरसीपी सिंह पर 9 साल में 58 संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया। इतना ही नहीं पार्टी की ओर से बाकायदा एक लिस्ट जारी कर इन संपत्तियों की जांच का आग्रह भी किया गया। जेडीयू ने ईडी और आयकर विभाग से भी इस बात की अपील की थी कि जांच एजेंसियां उनकी संपत्ति की जांच करें। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि जांच में पार्टी भी मदद करेगी। जिसके बाद पार्टी के पूर्व अध्यक्ष रहे आरसीपी सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

कल तक नीतीश कुमार के राइट हैंड रहे आरसीपी को जेडीयू ने नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि आपके परिवार के नाम पर 9 साल में 58 प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। 9 साल में कुल 800 कट्ठा जमीन की खरीद हुई है। जेडीयू का कहना है कि इस खरीद में भ्रष्टाचार साफ-साफ झलक रहे हैं। ऐसे में आप ( आरसीपी ) बताइये, इतनी संपत्ति कहां से अर्जित की? जेडीयू के अनुसार, खरीदारों में आरसीपी सिंह की आईपीएस बेटी लिपि सिंह का भी नाम है।

जेडीयू का आरोप है कि पिछले 9 साल में सिर्फ नालंदा जिले में 40 बीघा जमीन की खरीद हुई है। दबे जुबान ही सही, पार्टी नेताओं का मानना है कि हो सकता है कि इनकी दूसरे जिलों में भी संपत्ति हो सकती है। जेडीयू के अनुसार, खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री आरसीपी सिंह की पत्नी गिरिजा देवी और दोनों बेटियों आईपीएस अफसर लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर है। जेडीयू नेताओं का यह भी आरोप है कि आरसीपी सिंह ने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों का जिक्र नहीं किया था।

जेडीयू के अनुसार, नालंदा जिले के इस्लामपुर अंचल के सैफाबाद मौजा में 12 और केवाली अंचल में 12 प्लॉट की रजिस्ट्री आरसीपी सिंह के परिजनों के नाम हुई है। ये प्लॉट उनकी बेटियां लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर खरीदी गयीं। जेडीयू के अनुसार, ये रजिस्ट्री 2013 से 2016 के बीच हुई। अस्थावां के शेरपुर मालती मौजा में आरसीपी परिवार के नाम 33 प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। इनमें से 4 प्लॉट लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर खरीदे गये। पिता के तौर पर आरसीपी सिंह का नाम दर्ज है। इसके अलावा 12 प्लॉट की रजिस्ट्री गिरिजा देवी के नाम की गयी है। जेडीयू के अनुसार, इसके 18 प्लॉट लता सिंह के नाम पर खरीदे गये।

नौकरशाह से नेता बने आरसीपी

वर्ष 1984 बैच के यूपी कैडर के आइएएस रहे आरसीपी सिंह उस समय से नीतीश कुमार के करीब रहे जब वे अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में रेल मंत्री थे। नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में लौटे तो वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बने। इस दौरान नीतीश कुमार ने बिहार ले आकर आरसीपी को अपना प्रधान सचिव बनवाये। इसके बाद वर्ष 2010 में आरसीपी राजनीति में कुद पड़े। नीतीश कुमार ने जदयू की सदस्यता दिलाते हुए संगठन निर्माण की प्रमुख जिम्मेदारी दे दी। देखते देखते आरसीपी पार्टी में नीतीश कुमार के दाहिना हाथ बन गए।

केंद्रीय मंत्री बनने के साथ ही आरसीपी की बढ़ती गई दूरी

वर्ष 2014 के मोदी कार्यकाल में भाजपा के प्रस्ताव को ठुकराते हुए नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होने से इंकार कर दिया। लेकिन मोदी पार्ट टू कार्यकाल में आरसीपी सिंह एकलौते जदयू के मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल हो गए। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद से ही आरसीपी जदयू से दूर चले जाने लगे। इसे पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष ललन सिंह से जुबानी जंग के रूप में देखा गया। इसके बाद आपसी खटास उस समय सामने आ गया जब आरसीपी को जदयू ने दोबारा राज्यसभा में भेजने से इंकार कर दिया। लिहाजा कार्यकाल खत्म होने से मंत्रीमंडल से इनकी छुटटी हो गई। जिसके बाद से वे अपने नालंदा गृह जिले में ही अधिकांश वक्त गुजारने लगे। इस बीच परस्पर विरोधी राजनीतिक बयानोें से यह साफ हो गया था कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। जिसका अंत आरसीपी सिंह के पार्टी से इस्तीफे के साथ हो गया है।

भाजपा को बिहार में एक और शिंदे की तलाश आज

भाजपा के लोटस ऑपरेशन में आखिर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र सरकार के गठन के साथ सफलता मिल चुकी है। इसके बाद राजनीतिक अनिश्चितताओं का एक और खेल बिहार में शुरू होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद से ही उनके लगातार भाजपा के नजदीक जाने की चर्चा आए दिन होने लगी थी। इसको बल दे रहा था आरसीपी के भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के साथ नजदीकीयां। ऐसा कम ही दिन होता था कि दोनों की दिल्ली में मुलाकात न हो। इस बीच अचानक पिछले दो माह पूर्व आरसीपी के बिहार के राजनीति में सक्रियता को लेकर गुटबाजी की चर्चा होने लगी। इसके बाद जदयू नेतृत्व के राडार पर हमेशा आरसीपी रहने लगे। कहा जाता है कि शिव सेना को तोड़कर महाराष्ट्र में सरकार बनाने वाली भाजपा बिहार में भी ऐसे ही सत्ता बनाने का सपना पिछले लंबे समय से देखती आ रही है। इस कार्य में आरसीपी को मददगार बनाने की कोशिश की बात जानकार कहते रहे हैं।

हालांकि आरसीपी पर अकूत संपति तैयार करने का आरोप लगाते हुए जदयू नेतृत्व ने हमला तेज कर दिया। जिसका नतीजा रहा कि आरसीपी को इस्तीफा देते हुए स्वयं को किनारे करना पड़ा। जिसे रणनीतिक रूप से नीतीश कुमार की सफलता मानी जा रही है। लेकिन महाराष्ट के उदाहरण से बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की सफलता की कोशिश को ताकत मिलती है। महराष्ट में उसे सफलता एक बार में न मिलकर लगातार प्रयास के बाद ही मिली थी। लेकिन आरसीपी को पार्टी छोड़कर जाने का दबाव बनाने में कामयाब रही जद यू के रणनीति को सराहा जाना स्वाभाविक है।

नीतीश सरकार करा सकती है आरसीपी के खिलाफ जांच

नीतीश कुमार सरकार आरसीपी के खिलाफ जांच करा सकती है। आरसीपी सिंह खुद आईएएस अफसर रहे हैं। उनकी बेटी लिपि सिंह बिहार में आईपीएस अफसर हैं। आरसीपी सिंह ने हालांकि दावा किया है कि जमीन खरीदने के जिन मामलों में उनके खिलाफ आरोप लग रहे हैं, उन सभी के सारे दस्तावेज मौजूद हैं। बता दें कि आरसीपी सिंह पहले जेडीयू के राज्यसभा सांसद थे। बीते दिनों राज्यसभा के लिए जेडीयू ने उनको दोबारा टिकट नहीं दिया था। इसकी वजह से आरसीपी को मोदी सरकार में मंत्री पद गंवाना पड़ा था। राज्यसभा टिकट दोबारा न मिलने के बाद ही खबरें आने लगी थीं कि आरसीपी और नीतीश के बीच तनातनी है।जिसका अंत जदयू से आरसीपी सिंह के इस्तीफा के बाद फिलहाल हो चुका है।

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