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पंडितों और ईश्वर की शरण में ​क्रांतिकारी गायक गदर

Janjwar Team
1 Jun 2017 9:52 PM GMT
पंडितों और ईश्वर की शरण में ​क्रांतिकारी गायक गदर
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वामपंथी सांस्कृतिक आंदोलन के 'लाल सितारा' का मंदिर—मंदिर घुटना टेकना बताता है कि आंदोलन में निराशा गहरे पैठ चुकी है...

जनज्वार। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के समर्थक कहे जाने वाले सांस्कृतिक संगठन जन नाट्य मंडली के संस्थापक क्रांतिकारी गायक गदर आजकल मंदिर—मंदिर घूम रहे हैं। वे भगवान से अच्छी बारिश और लोगों के दुःख दूर करने की मनौती मांग रहे हैं। वे छात्रों को वेद पढ़ने और विवेकानंद के रास्ते पर चलने का उपदेश दे रहे हैं और जगह जगह अपने नए गुरु मंदिरों में पुजारी के आगे झोली फैलाकर ब्राह्मणवाद के एक सच्चे हिन्दू कार्यकर्ता बनने के लिए आशीर्वाद मांग रहे हैं।

पिछले 5 दशकों से हजारों वामपंथी और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत रहे 67 वर्षीय क्रांतिकारी गायक गदर का वामपंथी आंदोलनों से मोहभंग की खबरें तो कुछ वर्ष पुरानी हैं लेकिन मंदिर—मंदिर मत्था टेकने की जानकारी नई है। हालांकि दिसंबर में भी ऐसी खबरें आई थी जिसमें कहा गया था कि वह जगह—जगह पंडितों के साथ बैठकर पूजा—पाठ कर रहे हैं।

खबरों के मुताबिक वह पिछले हफ्ते भोंगरी जिले के यदाद्रि मंदिर गए और भगवान लक्ष्मीनरसिम्हा की आरती उतारने के बाद उन्होंने मंदिर के पुजारी से आशीर्वाद लिया। इससे पहले जनवरी महीने में उन्होंने पालाकुरथी में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव की भजनों के साथ पूजा की। इससे पहले वे सिद्दिपेट जिले में कोमुरावेल्ली मल्लाना मंदिर भी जा चुके हैं और लोगों को भगवान शिव के भजन सुना चुके हैं।

आंदोलनकारियों और वामपंथी कैडरों के बीच क्रांतिकारी गीतों और व्यवस्था विरोधी सांस्कृतिक आंदोलन के अगुआ माने जाने वाले गदर का यह व्यक्तित्व परिवर्तन बहस का विषय बना हुआ है।

कैडरो और वामपंथ समर्थकों में सवाल यह भी है कि जिस ब्राह्मणवाद, पुरोहितगिरी, सामंतवाद और ईश्वरीय अवधारणा के खिलाफ सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा करने में गदर ने अपना जीवन लगाया, उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर कौन सी निराशा उन्हें मंदिरों और पुरोहितों के चौखट तक ले गयी ?

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