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उत्तर प्रदेश

सुरक्षा किट मांगने पर UP के बाँदा में 26 स्वास्थ्य कर्मी बर्खास्त

Prema Negi
3 April 2020 6:48 PM GMT
सुरक्षा किट मांगने पर UP के बाँदा में 26 स्वास्थ्य कर्मी बर्खास्त
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बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मी प्रीति द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि 'राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में बिना सुरक्षा किट उपलब्ध कराए ही सभी आउटसोर्सिग कर्मियों की ड्यूटी लगाई थी...

जनज्वार, बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए 26 स्वास्थ्यकर्मियों को शुक्रवार 3 अप्रैल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। ये सभी कर्मचारी कोरोना वायरस संक्रमितों के इलाज में लगाए जाने पर कोरोना सुरक्षा किट की मांग कर रहे थे और पिछले दो दिनों से हड़ताल पर बैठे हुए थे।

यूपी के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशक अज्ञात गुप्ता ने राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा के प्राचार्य के नाम शुक्रवार को पत्र लिखा। पत्र में बर्खास्त किए गए 26 आउटसोर्सिग स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा गया है, 'आप लोगों द्वारा देश में मौजूद विषम हालात के बावजूद मनमाने तरीके से हड़ताल की जा रही है, जबकि वर्तमान समय में प्रदेश में एस्मा कानून लागू है। आपके इस कृत्य से राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अत: अनुबंध के आधार पर सभी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं।'

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एकतरफा कार्रवाई पर बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मियों में रोष व्याप्त है। बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मी प्रीति द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि 'राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में बिना सुरक्षा किट उपलब्ध कराए ही सभी आउटसोर्सिग कर्मियों की ड्यूटी लगाई थी। ऐसे में अपनी सुरक्षा को देखते हुए कोरोना सुरक्षा किट की मांग को लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मी दो दिन से हड़ताल पर थे। लेकिन कॉलेज प्रिंसिपल की साजिश की वजह से विभाग ने उनकी बर्खास्तगी की है। सभी बर्खास्त किये गए आउटसोर्सिंग कर्मी अब न्यायालय में फैसले को चुनौती देंगे ।'

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गौरतलब है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार कोरोना पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्हें सुरक्षा किट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 5 अप्रैल की रात देशवासियों से दीया जलाने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कोरोना के खिलाफ लड़ रहे चिकित्सा कर्मियों के लिए निजी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की उपलब्धता का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने पूछा कि 'यह बताइए कि जिन चिकित्सकर्मियों के लिए आपने ताली और थाली बजवाई थी उन्हें निजी सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं मिल रहे हैं? इसकी जिम्मेदारी किसकी है?'

पको बताते चलें कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन शाम 5 बजे कोरोना पीड़ितों के इलाज में लगे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान में ताली और थाली बजाने का आह्वान किया था। पीएम के आह्वान पर कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद पूरे देश में लोगों ने जमकर न सिर्फ ताली-थाली और शंख बजाए, बल्कि सड़कों पर निकलकर ढोल-नगाड़े और ड्रम तक बजा डाले थे।

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अब उन्हीं में से कुछ स्वास्थ्यकर्मियों ने जब अपनी जान की हिफाजत के लिए सुरक्षा किट की मांग कर दी तो उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया है। इससे साफ पता चलता है कि बीजेपी का मानना है कि ताली-थाली बजवाने तक सम्मान तो ठीक है, लेकिन कोरोना सुरक्षा किट मांगा तो सारा सम्मान भूल कर बर्खास्त कर दिए जाएंगे।

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सुरक्षा किट की मांग पर स्वास्थ कर्मियों को बर्खास्त करने वाली सरकार अब रविवार 9 बजे 9 मिनट के लिए बत्ती बुझवाकर दिया, टार्च और लालटेन जलवायेगी। सरकार ने विश्वास जताया है कि पूरे देश के एक साथ ऐसा करने पर कोरोना भारत मे घुसने की हिम्मत नहीं करेगा।

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