Top
राष्ट्रीय

तीन घंटे तक एंबुलेंस के इंतजार में बैठे पुणे के एक मरीज ने कुर्सी पर दम तोड़ा

Nirmal kant
16 May 2020 1:04 PM GMT
तीन घंटे तक एंबुलेंस के इंतजार में बैठे पुणे के एक मरीज ने कुर्सी पर दम तोड़ा
x

करीब तीन घंटे तक पीड़ित कुर्सी पर बैठा रहा और परिजन एंबुलेंस के नंबरों पर फोन करते रहे, लेकिन कोई नहीं आया। हालांकि पुलिस का एक गश्ती दल कथित तौर पर वहां पहुंचा, लेकिन वह भी कोई मदद नहीं कर सका, क्योंकि कोई भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी...

काईद नाजमी की रिपोर्ट

जनज्वार। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू राष्ट्रव्यापी बंद के बीच Punमहाराष्ट्र में एक 54 वर्षीय व्यक्ति की एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण शनिवार तड़के मौत हो गई। यह व्यक्ति पुणे रोड पर एक कुर्सी पर बैठा एंबुलेंस का इंतजार करता रहा और यहीं बैठे-बैठे उसने दम तोड़ दिया। अधिकारियों और परिवार के सदस्यों ने यह जानकारी दी।

पीड़ित की व्याकुल पत्नी, बहन और अन्य रिश्तेदार शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए उसके चारों ओर बैठे रहे। वहीं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने उन्हें सांत्वना देने का प्रयास किया।

संबंधित खबर : मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलने वाले भाजपाई सांसद को दिल्ली पुलिस ने दी हिदायत, झूठ फैलाना करो बंद

ह घटना सुबह चार बजे के आसपास की है, जब पीड़ित येसुदास एम. फ्रांसिस कुर्सी पर बैठे लगभग तीन घंटों तक एंबुलेंस के आने का इंतजार करते रहे। एक स्थानीय स्वयंसेवी ने कहा कि इलाके में बंद और नियंत्रण उपायों के कारण वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए सड़कों पर बैरिकेड या पत्थर लगा दिए गए हैं।

संबंधित पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने इस घटनाक्रम के बारे में बताया और कहा कि अस्पताल से आगे की जानकारी आने का इंतजार है। रात करीब एक बजे फ्रांसिस को काफी बेचैनी होने लगी, जिसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया और पुलिस से भी मदद मांगी।

में परिवार वालों ने उन्हें पुणे के नाना पेठ क्षेत्र में मनुशा मस्जिद के पास अपने घर के बाहर एक कुर्सी पर बैठा दिया। यह इलाका कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है।

रीब तीन घंटे तक पीड़ित कुर्सी पर बैठा रहा और परिजन एंबुलेंस के नंबरों पर फोन करते रहे, लेकिन कोई नहीं आया। हालांकि पुलिस का एक गश्ती दल कथित तौर पर वहां पहुंचा, लेकिन वह भी कोई मदद नहीं कर सका, क्योंकि कोई भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।

संबंधित खबर : कोरोना और सड़क हादसों में मजदूरों की मौत से गम में डूबा देश लेकिन भाजपा मना रही 6 साल पूरा होने का जश्न

सुबह लगभग चार बजे एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे फ्रांसिस ने आखिरी सांस ली। उसके परिवार के लोग असहाय उसके पास बैठे रहे।

नकी मौत के कुछ समय बाद एक टेम्पो उपलब्ध हुआ, जिसमें फ्रांसिस को एक सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, जहां जाते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस परिवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति के आसपास उसके परिजन दिख रहे हैं।

Next Story

विविध

Share it