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झारखंड में कोरोना को लेकर शहर से ज्यादा गांव में जागरूकता, सड़कों पर खुद ही बैरिकेडिंग कर रहे गांव वाले

Janjwar Team
2 April 2020 3:36 PM GMT
झारखंड में कोरोना को लेकर शहर से ज्यादा गांव में जागरूकता, सड़कों पर खुद ही बैरिकेडिंग कर रहे गांव वाले
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राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते झारखंड के शहरों की सड़कों पर इक्का दुक्का लोग ही देखने को मिल रहे हैं लेकिन गांवों में लोग खुद लॉकडाउन का पालन करने के लिए गांव के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रहे हैं..

जनज्वार। देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। अब तक संक्रमित लोगों की संख्या 2000 पार कर चुकी है वहीं इससे हुई मौतों की संख्या 53 तक पहुंच गई हैं। दूसरी ओर राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को एक सप्ताह का समय पूरा हो चुका है। झारखंड की बात करें तो वहां लॉकडाउन को लेकर शहर की तुलना में गांवों में ज्यादा जागरूकता दिख रही है।

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते यहां शहर की सड़कों पर इक्का दुक्का लोग ही देखने को मिल रहे हैं लेकिन गांवों में लोग खुद लॉकडाउन का पालन करने के लिए गांव के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रहे हैं।

की राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी में गुरुवार को स्वास्थ्य टीम को संदिग्ध लोगों की जांच करने में विरोध का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सामने आकर सहयोग करने की अपील करनी पड़ी।

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मुख्यमंत्री ने कहा, "कोरोना को रोकना है तो हमें रुकना होगा। राज्यवासियों को जल्दबाजी नहीं करनी है। खुद की सुरक्षा, अपने परिवार की सुरक्षा और समाज की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। इस बात को समझने और खुद में उतारने की आवश्यकता है।"

न्होंने कहा, 'हिंदपीढ़ी में एक महिला कोरोना संक्रमित मिली है। ऐसी स्थिति में वहां के लोगों की जांच बेहद जरूरी है। बड़े पैमाने पर जांच होगी। सरकार हिंदपीढ़ी में जांच शिविर लगाने पर विचार कर रही है ताकि घर घर जाने की आवश्यकता स्वास्थ्यकर्मियों को न पड़े। मेरा सभी से अनुरोध होगा कि इस कार्य में हिंदपीढ़ी वासी प्रशासन को सहयोग करें। यह उनकी ही सुरक्षा के लिए किया जा रहा कार्य है।'

क ओर जहां लोगों को समझाने के लिए मुख्यमंत्री को आगे आना पड़ा वहीं, रांची, लोहरदगा, गुमला, चाईबासा में ऐसे कई गांव हैं, जहां ग्रामीण खुद को लॉकडाउन में रखने के लिए गांवों में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर चुके हैं।

रांची के कांके थाना क्षेत्र का करमटोली रेड़ा एक ऐसा ही गांव है, जहां के लोग ना केवल लॉकडाउन का पूरी तरह पालन कर रहे है, बल्कि दूसरे को सीख भी दे रहे हैं। गांव में प्रवेश करने वाली सड़क को अवरुद्घ कर लॉकडाउन लिख दिया गया है।

हाल जारा टोली गांव में भी देखने को मिला। राजधानी रांची से 25 किलोमीटर दूर स्थित जारा टोली गांव में करीब 150 घर हैं। यहां अधिकतर श्रमिक रहते हैं। जारा टोली गांव से पहले बादाम और महिलोंग गावों को जोड़ने वाले रास्तों पर युवकों ने खुद ही बैरीकेडिंग कर दी है। इन युवकों का कहना है कि चाहे जैसे भी हालात हों, गांव में ही रहेंगे। इन्होंने कोरोना वायरस महामारी पर जागरूकता के लिए संदेश लिख कर लगा रखे हैं।

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स्थानीय नागरिक सोहराई मुंडा का कहना है, 'सुरक्षित रहने और कोरोना वायरस को मात देने का एक ही तरीका है कि लॉकडाउन का पालन किया जाए और एक दूसरे से दूरी बना कर रखी जाए।'

लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड के बेदाल गांव में भी लोगों ने बैरिकेडिंग व्यवस्था कर बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। लॉकडाउन का यहां पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है। लोगों में जागरूकता आई है कि घरों में रहकर ही कोरोना से जंग जीता जा सकता है। गुमला और लातेहार जिले में कई गांव है जहां ग्रामीण खुद ही सख्ती से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं।

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