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राजनीति

कोरोना संकट के राशन को भी भाजपा ने बनाया चुनावी हथियार, दान के पैकेट पर लगा मोदी का फोटो

Prema Negi
30 March 2020 5:38 AM GMT
कोरोना संकट के राशन को भी भाजपा ने बनाया चुनावी हथियार, दान के पैकेट पर लगा मोदी का फोटो
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कोरोना संकट के बीच गरीबों में खाने—पीने के जो पैकेट दिये जा रहे हैं, उन्हें इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि मानो यह पीएम और भाजपा ने भेजे हैं....

जनज्वार ब्यूरो, दिल्ली। भाजपा के लिए कोरोना का लॉकडाउन किस तरह से छवि भुनाने का एक इवेंट बन गया है, इसकी एक झलक देखी जा सकती है। इस बीच जो राहत सामग्री के पैकेट बांटे जा रहे हैं, इस पर पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो लगायी जा रही है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री राहत कोष में जो रकम लोग दान कर रहे हैं या जो राशि प्रधानमंत्री द्वारा आपदा के नाम पर घोषित किया गया है, उससे गरीबों में खाने-पीने के जो पैकेट दिये जा रहे हैं, इन्हें इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि मानो यह पीएम और भाजपा ने भेजे हैं।

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सोशल मीडिया पर इस तरह की फोटो खूब वायरल हो रही हैं। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि किस तरह से भाजपा गरीब और मजदूरी में फंसे लोगों का मजाक उड़ा रही है। वह भी इस मौके पर जब इस लॉकडाउन में फंसा हर कोई मजबूर है।

कानपुर में तो लंच के पैकेट का नाम ही मोदी लंच रख दिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष डा बीना आर्या पटेल सौजन्य से राम बहादुर यादव की ओर से यह पैकेट वितरित किये गये हैं। इस पैकेट पर जो बाकायदा गरीबों के मन में यह बिठाने की कोशिश हो रही है कि उन्हें खाना भाजपा की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है।

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गोपाल राठी नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा है, प्रधानमंत्री राहतकोष में दिया गया धन प्रधानमंत्री की छवि चमकाने के काम भी आ रहा है। सलमान खान तो समझ गए। आप कब समझेंगे?

न्होंने आगे लिखा है कि देखना ये आदमी, और इसकी भक्त मंडली मरने वाले के कफन पर भी मोदी का फोटो लगाकर एहसान जतायगी। विपदा में राजनीति धिक्कार... धिक्कार...।

फेसबुक पर हरीश बेमन लिखते हैं, 'शर्म आनी चाहिए इन्हें कि देश में कोरोना संक्रमण के कारण तड़प रहे हैं, लोग मर रहे हैं,बेरोजगार हो रहे हैं, बेघर हो रहे हैं और इन्हें प्रचार करने की चिंता है। देशवासियों से कोरोना के नाम पर एकत्रित करोड़ो अरबों रुपये से अब यह इनकी राजनीति चमकायेंगे और राजनीतिक रोटियां सकेंगे। इस समय इससे ज्यादा और गिरा हुआ काम कुछ हो ही नहीं सकता धिक्कार है।'

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तीश पांडे ने लिखा है, 'अगर शर्म बची होती तो मजबूर भूखे लोगों को खाना खिलाते, बिना अपने प्रचार के। यहां भी फोटो और मोदी लिख खिलाकर अहसान बता रहे हैं कि मोदी खिला रहे हैं, जबकि यह सब जनसहयोग से हो रहा, उसमें भी फ्री प्रचार का लाभ उठा रहे हैं।'

सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा है कि आखिर भाजपा की भक्त मंडली साबित क्या करना चाह रही है। इसके पीछे उनकी सोच क्या है? जो राहत सामग्री आ रही है, इसके लिये तो लोग फंड दे रहे हैं। यूं भी इसके लिए खर्च सरकारी खजाने से हो रहा है। वह हम सब के टैक्स का पैसा ही तो है। फिर इस फंड से दी जाने वाली राहत सामग्री भाजपा की कैसे हो गयी?

सोशल मीडिया के ही एक अन्य यूजर पगला ममुवा ने लिखा है कि ऐसा करते हुए इन लोगों को शर्म भी नहीं आती है। अमृता जयसवाल ने लिखा है कि शुरू हो गया नाटक।

लोकतंत्र बचाओ मंच चंडीगढ़ के अध्यक्ष पवन कुमार कहते हैं, जब पूरा देश विपदा में हैं, इस वक्त भी भाजपा वाले प्रचार का मौका खोज रहे हैं। यही वजह है कि इनके हर काम पर शंका होती है। ऐसा लगता है कि सत्ता और प्रचार के भूखे यह लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं।

वन कुमार आगे कहते हैं, राहत सामग्री के लिये लोग दान दे रहे हैं। इसमें इन्होंने अपने घर से क्या दे दिया है? यदि दिया ही नहीं तो फिर इसका श्रेय लेने की होड़ क्यों है? उन्होंने कहा कि भाजपा का चाल चरित्र और चेहरा है ही ऐसा कि करो कुछ नहीं और दिखावा ऐसा करों कि सब कुछ हमने कर दिया है। यह लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि ऐसे करने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए। इस तरह की ओछी हरकतों को तुरंत रोका जाना चाहिए। क्याोंकि देश पर जो विपदा आ गयी है, इसमें राजनति चमकाने का मौका नहीं है। यह मानवता की सेवा का मौका है। पर शायद भाजपा यह बात समझती ही नहीं है।

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