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शाहीन बाग आंदोलन खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस को मिला नया अधिकार

Prema Negi
18 Jan 2020 4:22 AM GMT
शाहीन बाग आंदोलन खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस को मिला नया अधिकार
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पत्रकारों ने कहा दिल्ली में आपातकाल लागू, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत दिल्ली में किसी भी नागरिक कि बिना कारण बताए पुलिस कर सकती है 19 जनवरी से गिरफ्तारी

जनज्वार, दिल्ली। कई बार लोग बातचीत में कहते रहते हैं और भाषणों में भी नेता-सामाजिक कार्यकर्ता बोलते हैं कि भारत में आपातकाल जैसे हालात हो गए हैं। लेकिन कल से दिल्ली में रहने वालों को 'आपातकाल जैसे हालात' कहने या लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि दिल्ली में 19 जनवरी से पुलिस ने एक ऐसा ऑर्डर जारी किया है जिसमें किसी को, कभी बिना कारण बताए पूरे एक साल तक के लिए की जेल में डाला जा सकता है। जेल में पड़े व्यक्ति को एक साल तक कानूनी मदद नहीं मिलेगी और उसके खिलाफ पुलिस को एक साल तक चार्जशीट दाखिल की भी जरूरत नहीं है।

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गौरतलब है कि यह मोदी सरकार की पुलिस को यह अधिकार राज्यपाल ने तब दिया है जब दिल्ली में सीएए और एनआरसी के खिलाफ पिछले एक म​हीने से महिलाओं के नेतृत्व में जोरदार आंदोलन चल रहा है। शाहीन बाग में चल रहे उस आंदोलन को खत्म करने के लिए कई प्रयास कर चुकी है, लेकिन पुलिस CAA-NRC के खिलाफ चल रहे आंदोलन को टस से मस नहीं करा पा रही है। अलबत्ता पिछले एक महीने में यह हुआ है कि शाहीन बाग से निकलकर यह आंदोलन पूरे देश में फैल रहा है और जगह-जगह महिलाएं रातों-दिन धरना दे रही हैं। खास बात यह है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व में नहीं, बल्कि स्वत:स्फूर्त तरीके से आगे बढ़ रहा है, जिसमें सर्वाधिक महिलाएं हैं।

पराज्यपाल अनिल बैंजल ने शुक्रवार 18 जनवरी की शाम को अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा तीन की उपधारा (3) के तहत 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया है। यह अधिसूचना राज्यपाल की मंजूरी के बाद 10 जनवरी को जारी की गई थी।हालांकि दिल्ली पुलिस ने इसे अपने काम का सामान्य रूटीनी तरीका बताया है।

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​मीडिया में इस खबर के आने के बाद पत्रकारों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजनीति विश्लेषक और पत्रकार उर्मिलेश इस कानून का जिक्र करते हुए लिखते हैं, 'राष्ट्रीय राजधानी में तीन महीने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) जैसा काला कानून लागू! शुक्रवार देर रात, यह आदेश जारी किया गया! दिल्ली पुलिस ने इसे 'रूटीन कार्रवाई' बताया है। इस कानून के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को कारण बताए बगैर गिरफ्तार कर सकती है। इस तरह का इमरजेंसी कानून 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक लागू रहेगा। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को आरोपपत्र दाखिल किए बगैर एक साल गिरफ्तारी में रखने का पुलिस को अधिकार होगा! गिरफ्तारी के दौरान उक्त नागरिक वकील की सहायता पाने के अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है! कल यानी रविवार से यह कानून लागू।

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देश की चर्चित खोजी पत्रिका कारवां के संपादक विनोद जोस के अनुसार, 'दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली में रविवार 19 जनवरी से किसी को, कभी भी बिना कारण बताए 10 दिन के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है और बिना चार्जशीट दाखिल किए एक साल तक जेल में रखा जा सकता है।​ गिरफ्तार को वकील की भी मदद नहीं मिलेगी।'

विनोद जोस व्यंग्य करते हुए आगे लिखते हैं, 'भारत सब अच्छा है जी। सब चंगा जी।'

हीं पत्रकार प्रकाश के रे बताते हैं, 'दिल्ली में आपातकाल लागू हो गया है। पुलिस किसी को भी 19 जनवरी से 18 अप्रैल के बीच रासुका के तहत 12 महीनों तक के लिए गिरफ़्तार कर सकती है। इस अवधि में गिरफ़्तार व्यक्ति किसी वक़ील की सहायता नहीं पा सकता है यानी उसके पास अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के लिए कोई मोहलत नहीं होगी। पुलिस का कहना है कि ऐसा हमेशा तीन महीने पर होता है। तीन दिन पहले आन्ध्र प्रदेश में ऐसा ही आदेश लागू किया गया है। रासुका में बंद आदमी के आम तौर पर गिरफ़्तार होने पर उपलब्ध अधिकार निरस्त हो जाते हैं। यह क़ानून इंदिरा गांधी सितंबर 1980 में लाईं थीं. कांग्रेस के हर कुकर्म का अच्छा लाभ भाजपा उठा रही है।'

है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार है। ये अधिकार पुलिस को राज्यपाल देता है। कानून के मुताबिक ऐसे व्यक्ति को जिससे प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस हो उसे एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह कानून 1980 में कांग्रेस की सरकार में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बनाया था।

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