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14 दिनों से शाहीनबाग में धरनारत महिलाएं बोलीं CAA संविधान विरोधी काला कानून, मरते दम तक जारी रखेंगे आंदोलन

Nirmal kant
28 Dec 2019 11:29 AM GMT
14 दिनों से शाहीनबाग में धरनारत महिलाएं बोलीं CAA संविधान विरोधी काला कानून, मरते दम तक जारी रखेंगे आंदोलन
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दिल्ली के शाहीनबाग की महिलाएं बीते 13 दिनों से धरने पर बैठी हैं, महिलाओं ने कहा सरकार वापस ले नागरिकता संशोधन अधिनियम, नहीं तो मरते दम तक जारी रखेंगे आंदोलन...

विकास राणा की ग्राउंड रिपोर्ट

जनज्वार। हाथ में बच्चों को पकड़े और जुबान पर इंकलाब के नारे, ये नजारा इन दिनों दिल्ली के शाहीनबाग इलाके में देखने को मिल रहा है। बीते 14 दिनों से नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ सैकड़ों महिलाएं आंदोलन कर रही हैं। ठंड-ठिठुरन की परवाह किए बगैर सैकड़ों महिलाएं बीच सड़क पर अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठी हुई हैं।

नागरिकता संशोधित अधिनियम (सीएए) के विरोध में 15 दिसंबर को दिल्ली के जामिया नगर में हुए हिंसक प्रदर्शन हुए लेकिन से शाहीनबाग इलाके में यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। महिलाएं ठंड की परवाह किये बगैर परिवार और घरेलू कामकाज के बीच में तालमेल बिठाकर आंदोलन का हिस्सा बन रही हैं। महिलाओं का कहना है कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं ले लेती हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

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आंदोलन में शामिल मरियन खान ने जनज्वार से बातचीत में कहा, 'हम पिछले 14 दिनों से सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। हम देश के संविधान को बचाने के लिए यह आंदोलन कर रहे हैं। मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून से एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बना रही है। हम मोदी जी को बताना चाहते हैं कि हम हिंदुस्तानी हैं और हिंदुस्तान में रहेंगे। हमें कोई हिंदुस्तान से निकाल नहीं सकता। हम लोग यहां इतने दिनों से ठंड में अपने बच्चों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, सिर्फ अपने देश को और अपने देश के संविधान को बचाने के लिए। ये सरकार हो या पहले जो सरकारें रहीं हो, वह कभी भी हिंदू मुस्लिम एकता को नहीं तोड़ पाएंगी।'

की साहिरा नागरिकता संशोधन कानून को काला कानून बताती हैं। साहिरा ने कहा, 'मोदी सरकार जो कानून लायी है। वो पूरी तरह से संविधान विरोधी है। हम सब भारत के लोग एकजुट हैं लेकिन सरकार कानून लाकर देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच में विभाजन करना चाहती है। हम लोगों की सरकार से अनुरोध है कि वो इस कानून को वापस ले। अगर सरकार कानून को वापस नहीं लेती है तो हम मरते दम तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।'

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जामिया में पुलिस के द्वारा की गई मारपीट पर साहिरा कहती हैं, 'पुलिस ने जिस तरह से कॉलेज पढ़ने वालों के साथ मारपीट की है। वह पूरी तरह से संविधान विरोधी है। जिन बच्चों के साथ मारपीट की गई है वह बच्चें पढ़ने वाले थे। लेकिन पुलिस ने जिस तरह से बच्चों का पीटा वो स्पष्ट रूप से पुलिस की गुंडागर्दी थी।'

सीमा कहती हैं, 'मैं पिछले 14 दिनों से इतनी ठंड में आंदोलन में बैठी हुई हैं। सुबह पांच बजे तक मैं यहां बैठी रहती हूं जिसके कारण हमारा घर जाना भी नहीं हो पाता हैं। हम लोग अपने बच्चों के साथ पूरी रात यहीं पर है सिर्फ इस काले कानून को वापस करवाने के लिए। मोदी जी कहते हैं कि 'बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं' लेकिन आज बेटियां खतरे में हैं, सड़कों पर आ गई हैं तो उनको हमारी आवाज नहीं सुनाई दे रही है।'

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सीमा आगे कहती हैं, 'सरकार इस कानून को लाकर हमारे संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। संविधान में धर्मनिरपेक्षता जो हमारे देश को जोड़ती है ये काला कानून उसके खिलाफ है। हमारी सरकार से मांग है कि इस कानून को वापस लिया जाए। देश को बांटने का काम बंद करके सरकार जितना भेदभाव कर ले लेकिन हम हिंदू-मुस्लिम कभी अलग नहीं होंगे। हम लोग हिंदुस्तान के लिए जीते हैं और जरूरत पड़ी तो इसके लिए जान भी दे देंगे।'

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