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लॉकडाउन: मुसीबत में मजदूर, राशन ले तो जलील, न ले तो भूखा रहना पड़ेगा

Nirmal kant
17 April 2020 8:07 AM GMT
लॉकडाउन: मुसीबत में मजदूर, राशन ले तो जलील, न ले तो भूखा रहना पड़ेगा
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समाज सेवा अब प्रताड़ना में बदलती जा रही हैं। सेवा करने वाले संगठन अब थकने लगे हैं। इधर प्रशासन की ओर से मजदूरों की मदद के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। इस वजह से मजदूरों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है...

जनज्वार ब्यूरो, चंडीगढ़। लॉकडाउन के दूसरे चरण में मजदूरों की दिक्कत अब बढ़ने लगी है। पानीपत में जहां एक ओर राशन लेने गए बालक को बुरी तरह से पीट दिया गया। वहीं अब राशन मांगने वाले मजदूरों की पहले घर की तलाशी ली जाती है। इसके बाद ही उन्हें राशन दिया जा रहा है। इस वजह से मजदूरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी दिक्कत यह है कि सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराये जाने वाला राशन यदि नहीं लेते तो खाने के लाले पड़ जाते हैं। यदि राशन लेत हैं तो जलील होना पड़ रहा है।

पानीपत में प्रवासी मज़दूर ममता पत्नी चंदन निवासी वार्ड 25,गंगाराम कालोनी जींद कच्चा फाटक के पास रह रहे हैं। इनका 14 साल का बेटा रात को प्रशासन की ओर से भेजा फ़ूड पैक्ट लेने गया तो वहाँ संदीप (जिसके बैंकट हाल गार्डन में एनजीओ फूड पैकेट बांटते हैं)ने थप्पड़ों से पीटा व जान से मारने की धमकी है।

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पीड़ित ने बताया कि आरोपी संदीप ने खुद ही पहले फोन करके उनके बेेटे को बुलाया था। जब बालक वहां गया तो तो उसे बुरी तरह से पीटा व धमकियां दी।

की जानकारी पुलिस का दी गयी। लेकिन पुलिस ने मामाल दर्ज नहीं किया। बाद में मज़दूर संगठन इफ्टू के संयोजक पीपी कपूर ने चीफ सेक्रेटरी व अन्य आला अधिकारियों को मेल से मामले की जानकारी दी। इसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।

पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने प्रवासी मज़दूरों को भूखे मरने के लिए छोड़ दिया है ।लंगर देने के नाम पर मज़दूरों को प्रताड़ित किया जा रहा है । कपूर ने बताया कि उन्होंने वार्ड नंबर सात हनुमान कालोनी वासी 62 प्रवासी मज़दूरों की सूची राशन के लिए 15 अप्रैल की दोपहर में डीसी को भेजी थी। इस पर डीसी ऑफिस के चार कर्मचारी मनोज के नेतृत्व में शाम को मौका पर लंगर बांटने पहुँचे।

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न्होंने आरोप लगाया कि ये कर्मचारी मज़दूरों के क्वार्टरों में जबरन घुस कर तलाशी लेने लगे व वीडियो बनाने लगे ।कमरों में मज़दूरों के बीवी बच्चे भी बैठे व लेटे थे ।एक एक डिब्बे की तलाशी ली ।जिसके भी डिब्बे में एक आध किलो आटा मिला तो उसे बुरी तरह धमकाया गया और फूड पैकेट नहीं दिया ।दी तीन मज़दूरों को जो फूड पैकेट दिए तो वे बासी भोजन मज़दूरों ने लौटा दिया ।

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