मनोज तिवारी ने विधानसभा चुनाव मे हार के बाद पार्टी के आलाकमान से इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि पार्टी आलाकमान ने फिलहाल इस्तीफे लेने से इंकार कर दिया है…

जनज्वार। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की है। आजतक की खबर के मुताबिक मनोज तिवारी ने विधानसभा चुनाव मे हार के बाद पार्टी के आलाकमान से इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि पार्टी आलाकमान ने फिलहाल इस्तीफे लेने से इंकार कर दिया है। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में बीजेपी को 8 सीटों में जीत मिली है।

हीं एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों के साथ प्रचंड जीत हासिल की है। वहीं कांग्रेस एक बार फिर किसी सीट में जीत हासिल नहीं कर सकी। दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद से ही तमाम पार्टियों में इस्तीफें का दौर जारी है। इससे पहले हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी है। मनोज तिवारी ने बुधवार को चुनाव में जीते गए विधायकों से भी मुलाकात की थी।

संबंधित खबर: चुनाव परिणामों के बाद जानिए उन नेताओं को जो दिल्ली की राजनीति में हो गए अप्रासंगिक

ससे पहले मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी को जीत की बधाई दी थी। वही मनोज तिवारी ने हार के बाद अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि दिल्ली के सभी मतदाताओं को धन्यवाद, उन्होंने लिखा सभी कार्यकर्ताओं को उनके कठिन परिश्रम के लिए धन्यवाद। दिल्ली का जनादेश सिर माथे पर। अरविंद केजरीवालको बहुत बहुत बधाई।

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के दिल्ली अधय्क्ष मनोज तिवारी की रही थी। जहां मनोज तिवारी चुनाव के नतीजों के दोपहर तक बीजेपी की जीत को लेकर आश्वस्त थे। वही शाम होते तक उनका हौसला कम होता गया था। जिसके बाद उन्होंने हार को कबूलते हुए केजरीवाल को बधाई दी थी। इस दौरान सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी को जमकर ट्रोल किया गया था।

संबंधित खबर: ये है केजरीवाल की जीत का मूल मंत्र, जिसे विरोधी कभी पकड़ नहीं पाए

चुनावों को नतीजों से पहले मनोज तिवारी ने ट्वीट करते हुए लोगो को भाजपा की जीत का ट्वीट संभालने के लिए कहा था इस पर मनोज तिवारी का कहना है कि मैंने जो सोचा था उसाक आधार था कि लगभग 48 विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों की बुरी स्थिति है, स्कूल की अच्छी व्यवस्था नहीं है। इस आधार पर मैने कल्पना की थी कि इन इलाके के लोग किसी को नई जिम्मेदारी नहीं देंगे। हमारी सोच पूरी नहीं हुई। हमने जो ट्वीट किया था। उसे संभाल कर आप लोग रखें होंगे, अब उसे रखे ही रहिए।

भारतीय जनता पार्टी के भीतर विधानसभा चुनाव में दिल्ली के सात सांसदो के कामकाज को लेकर भी सवाल उठना शुरू हो चुके है। जिसके कारण पश्चिमी दिल्ली के सांसद परवेश वर्मा की संसदीय सीट में आने वाली सभी 10 सीटों में बीजेी के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। परवेश वर्मा के चाच मास्टर आजाद सिंह मुंडका विधानसभा से चुनाव हार गए। जबकि दक्षिणई दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी के भतीजे विक्रम सिंह को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है।

मेश बिधूड़ी के संसदीय क्षेत्र से सिर्फ एक सीट रामवीर सिंह बिधू़ड़ी को बदपुर से मिल पाई है। वहीं नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी अपने संसदीय सीट से एक भी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला पाई है।
केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन के संसदीय सीट उत्तरी पश्चिमी सीट से खाता नहीं खुला है। हंसराज हंस के संसदीय सीट यानी उत्तरी पश्चिमी सीट से महज एक सीट रोहिणी विधानसभा पर विजेंद्र गुप्ता को जीत हासिल हो सकी है।


जन पत्रकारिता को सहयोग दें / Support people journalism