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कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को अभी जमानत की कोई उम्मीद नहीं, राज्य के राजनीतिक दलों ने किया विरोध

Nirmal kant
8 Feb 2020 2:00 PM GMT
कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को अभी जमानत की कोई उम्मीद नहीं, राज्य के राजनीतिक दलों ने किया विरोध
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पीडीपी, नेशनल कान्फ्रेंस और आरएलडी ने पूर्व मुख्यमंत्रियों पर पीएसए लगाने की निंदा की, पूछा कल तक ये देशभक्त थे आज देशद्रोही कैसे हो गए...

श्रीनगर से फैजान मीर की रिपोर्ट

जनज्वार। पीडीपी ने जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की निंदा की। पीडीपी के प्रवक्ता अब्दुल राशिद कोशीन ने कहा कि कल तक जो हमारे साथ साझेदारी में थे। महबूबा मुफ्ती जी हमारी मुख्यमंत्री थी। भाजपा वाले हमारे साथ हुकूमत चलाते थे। कल तक वह देशभक्त थी तो आज कैसे देशद्रोही हो गई। उनपर पीएसए लगाया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और निंदनीय है। हम इसकी निंदा करते हैं। आजाद हिंदुस्तान में अगर यह आजादी है तो इस आजादी को भी हम क्या कहेंगे।

कोशीन ने आगे कहा, 'जहां एकतरफ वो पार्टी जिसमें अधिकतर आप देखेंगे कि ये मुख्यमंत्री साहिबा थीं और नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारूक अब्दुल्ला साहब चुने हुए सांसद हैं। जिस लोकसभा के वो सांसद हैं, अगर उसकी ये हालत है तो ये उसकी तौहीन नहीं है तो क्या है। जब उन्होंने उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती को नहीं बख्शा तो फिर ये अराजकता नहीं है तो क्या है।

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पीडीपी प्रवक्ता ने आगे कहते हैं, 'इससे हिंदुस्तान नहीं चलने वाला है। जहां जो आपकी बात करे उसे आप अच्छी कुर्सी पर रखते हैं और जो आपकी बात न करे तो उसको आप जेल में डालेंगे। क्या इसी को आप लोकतंत्र कहते हैं। मुझे नहीं लगता है कि यह सही बात है। हमारी पार्टी इसकी निंदा करती है।'

नेशनल कान्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार कहते हैं, 'ये नेशनल कान्फ्रेंस की लीडरशिप के साथ सरासर नाइंसाफी हुई है। ये वो लीडरशिप है जिन्होंने हर लम्हा और हरवक्त उन्होंने संविधान को पकड़कर रखा, उसकी सरबुलंदी रखी। आज आप उन्हीं राष्ट्रवादी नेताओं पर पीएसए लगा रहे हैं। हम इस कदम की निंदा करते हैं।

क स्थानीय नागरिक फिर्दोश खान कहते हैं, 'यहां पर हमेशा से जो लीडरशिप में रहे हैं, उनका यही हाल रहा है। नेशनल कान्फ्रेंस की अगर बात करें तो वह जम्मू-कश्मीर में सबसे पुरानी पार्टी है। उससे कई मुख्यमंत्री रहे हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। मुझे नहीं लगता है कि लोकतंत्र में यह किसी हद तक सही है। कानून बनाने वाले आज कानून के दायरे में हैं। सबसे पहले जो पीएसए लगा है उसकी बुनियाद देखी जानी चाहिए कि यह किस पर लगना चाहिए।

न्होंने कहा कि इन्होंने ऐसा कौन सा बड़ा अपराध कर दिया है कि उन्हें पीएसए के तहत बंद कर दिया गया है। यह अन्याय है क्योंकि यही वो लोग हैं जो लोगों की हिमायत करते हैं। जिन लोगों ने यहां पर हुकूमत की है जब उनका ये हाल है तो आम लोगों का क्या होगा, सोचा जा सकता है।'

हीं राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के डॉ. जहूर अहमद शेख कहते हैं कि जहां तक पीएसए का सवाल है जब उमर साहब 2013 में सत्ता में थे। तब लोगों ने उनसे बड़ी गुहार लगाई थी कि ये पब्लिक सेफ्टी एक्ट खत्म करें। तब उन्होंने कहा था कि यह जारी रहेगा। इसके अलवा यहां कोई चारा नहीं है।

'महबूबा मुफ्ती जी ने कहा था कि जो अनुच्छेद 370 को हाथ लगाएंगे वो हाथ भस्म हो जाएंगे। लेकिन उन्होंने जो किया आज वहीं काम आ रहा है।'

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न्होंने कहा कि लोगों को पता है उनको भी पता है। सरकार जो फैसला ले रही है वो अपने दम पर ले रही है। तब उनकी सरकार थी। आज जो सरकार है वो उसे अपने नजरिए से देखती है। सरकार जब बनती है तो जितने भी विभाग होते हैं उसके अंडर होते हैं।

जनसुरक्षा कानून (PSA) क्या है?

जम्मू-कश्मीर के जन सुरक्षा अधिनियम 1978 के तहत किसी भी शख्स को बिना आरोप और सुनवाई को दो साल तक की जेल हो सकती है। जन सुरक्षा कानून बिना वारंट के दो साल से अधिक समय के लिए के लिए हिरासत और गिरफ्तारी की अनुमति देता है।

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