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कोरोना से संकट में पोल्ट्री संचालक : मार्केट में न अंडे बिक रहे, न ब्रायलर चिकेन

Janjwar Team
24 March 2020 7:21 AM GMT
कोरोना से संकट में पोल्ट्री संचालक : मार्केट में न अंडे बिक रहे, न ब्रायलर चिकेन
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पोल्ट्री संचालकों के अनुसार इस वक्त क्योंकि एक अफवाह यह भी है कि मांस खाने से कोरोना वायरस फैल रहा है। इस वजह से लोगों ने अंडे और चिकेन से दूरी बना ली है....

चंडीगढ़ से मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। कोरोना वायरस की बड़ी मार पोल्ट्री फार्मर्स पर पड़ी है। अंडे के दाम सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, वहीं तैयार ब्रायलर चिकेन भी बाजार नहीं बिक रहा है। पोल्ट्री संचालकों के अनुसार इस वक्त क्योंकि एक अफवाह यह भी है कि मांस खाने से कोरोना वायरस फैल रहा है। इस वजह से लोगों ने अंडे और चिकेन से दूरी बना ली है। दूसरी वजह यह है कि लॉकडाउन होने की वजह से अंडे व ब्रायलर की ट्रांसर्पाेटेशन भी नहीं हो पा रही है।

अंडे के दाम आधे से भी कम हो गए

रियाणा पंजाब स्मॉल पोल्ट्री संघ के अध्यक्ष अविनाश चावला ने बताया कि इस वक्त अंडे के दाम आधे से भी कम हो गए हैं। थोक में अंडे की ट्रे अब 50 रुपए से भी कम में बिक रही है, जबकि पहले इसे दाम 120 रुपये था, चिकेन के हाल तो इससे भी खराब हो गये हैं। ऐसे में किसानों के सामने भारी संकट आ गय है। अविनाश ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग ब्रायलर मुर्गों को खुले में छोड़ रहे हैं क्योंकि अब उनके पास खिलाने के लिए फीड भी नहीं है।

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क्यों बने यह हालात

सोशल मीडिया पर लगातार इस तरह के संदेश डाले जा रहे थे कि अंडे व चिकेन से कोरोना के वायरस का खतरा है। शुरूआत में इस तरह के संदेश को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इधर लोगों ने इस पर यकीन करना शुरू कर दिया। नतीजा आज हम सब के सामने हैं। अविनाश चावला ने बताया कि न तो सरकार ने इस ओर ध्यान दिया, न पुलिस ने। पोल्ट्री किसान इस स्थिति में होता ही नहीं कि इस तरह के मैसेज पर कोई स्पष्टीकरण दे सके।

भी हो रही प्रभावित

त्तर भारत के सबसे बड़े पोल्ट्री हब जींद में पोल्ट्री उद्योग पूरी तरह से ठंडा पड़ चुका है। हालत यह है कि हैचरी व्यवसायी चूजों को पालने की बजाये नष्ट करने पर लगे हैं। इसके लिए चूजों व तैयार मुर्गों को जिंदा ही दफनाया जा रहा है। पिछले दिनों जहां जींद जिले में प्रतिदिन करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा था, वहीं अब यह शून्य पर आ गया है।

नहीं मिल रहा चूजों का खरीददार

जींद जिला में सफीदों क्षेत्र के आसपास सबसे अधिक पोल्ट्री फार्म व हैचरी हैं। जिला में 105 हैचरी, 500 पोल्ट्री फार्म व 40 लेयर फार्म हैं। हैचरी में अंडे से चूजा तैयार किया जाता है तो पोल्ट्री फार्म में चूजे से मुर्गा तैयार किया जाता है। वहीं लेयर फार्म में मुर्गी से अंडा लिया जाता है। जिला में प्रतिदिन नौ लाख चूजे, डेढ़ लाख मुर्गे व करीब 30 लाख अंडे का उत्पादन किया जाता है।

20 रुपये किलो तक पहुंचा मुर्गा

मुर्गा सप्लाई के लिए प्रतिदिन 200 गाड़ियां दिल्ली जाती थी, लेकिन पिछले करीब 25 दिन में इनकी संख्या लगातार गिरी है। अब प्रतिदिन 25 गाड़ियां ही जा रही हैं। इसके साथ ही मुर्गी फीड व इसके सहायक कारोबार को भी बड़ झटका लगा है। पोल्ट्री व्यवसायियों के अनुसार 25 दिन पहले तैयार मुर्गा 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता था, लेकिन अब यह महज 20 रुपये प्रति किलोग्राम भी नहीं बिक रहा है।

अनिश्चिता में किसान

किसान अशोक कुमार, सुलतान सिंह व विक्रम सिंह ने बताया कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर पोल्ट्री शुरू किया था। काम शुरू किये यह दूसरा साल है। हर रोज पांच हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे में अब समझ में नहीं आ रहा कि काम बंद किया जाये या चलाया जाए। क्योंकि पिछले साल जो भी कमाया था, वह तो लगा ही दिया। अब आगे खर्च कहां से करें?

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नहीं मिल रही मदद

स मुश्किल घड़ी से पोल्ट्री किसान कैसे निपटे, इस दिशा में तो विशेषज्ञ कोई कदम उठा रहे हैं, न सरकार की ओर से कोई सलाह या मदद मिल रही है। सस्ती फीड कहां से मिले, क्या इसका कोई विकल्प भी हो सकता है, जिससे किसान का नुकसान कुछ कम हो सके। इस दिशा में भी पोल्ट्री विशेषज्ञ किसानों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।

विशेषज्ञ डाक्टर सफीर अहमद ने बताया कि ब्रायलर में किसान अब बरसीम और हरी सब्जी खाने को दे सकते हैं। इससे फीड का खर्च कम हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अंडे को यदि ठंडी व खुश्क जगह पर स्टोर कर लिया जाता है तो कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी तरह के छोटे छोटे उपाय करने की सलाह वह किसानों को दे रहे हैं।

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