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पैदल जा रहे प्रवासी मजदूरों से मिले राहुल गांधी, गाड़ियों से घरों को भेजने का किया इंतजाम

Raghib Asim
16 May 2020 3:17 PM GMT
पैदल जा रहे प्रवासी मजदूरों से मिले राहुल गांधी, गाड़ियों से घरों को भेजने का किया इंतजाम
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राहुल गांधी ने दिल्ली के सुखदेव विहार में पैदल जा रहे जत्थे को रोककर मजदूरों से उनकी परेशानी जानी। ये लोग हरियाणा से पैदल अपने गृह राज्यों को जा रहे थे, जिसमें ज्यादातर उत्तर प्रदेश के थे। इस दौरान राहुल सड़क किनारे बैठकर मजदूरों से बात की। जिसके बाद दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने कई गाड़ियों का इंतजाम कर मजदूरों को उनके घरों को भेजा...

जनज्वार। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को अपने घरों को पैदल लौट रहे प्रवासी मजदूरों से मिले। राहुल गांधी ने दिल्ली के सुखदेव विहार में पैदल जा रहे जत्थे को रोककर मजदूरों से उनकी परेशानी जानी। ये लोग हरियाणा से पैदल अपने गृह राज्यों को जा रहे थे, जिसमें ज्यादातर उत्तर प्रदेश के थे। इस दौरान राहुल सड़क किनारे बैठकर मजदूरों से बात की। जिसके बाद दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने कई गाड़ियों का इंतजाम कर मजदूरों को उनके घरों को भेजा।

राहुल के जाने के बाद मजदूरों ने बताया कि वो खाना, पानी और मास्क लेकर आए और हमसे बातें की। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कई गाड़ियों का भी इंतजाम किया है, जिनसे हम घरों को जा रहे हैं। देवेंद्र नाम से मजदूर ने बताया कि उन्होंने हमसे कहा गाड़ी में बैठकर घर जाइये, ये आपको घर पर ही छोड़कर आएंगे। दिल्ली कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि मजदूरों को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस का कहना है कि दो से ज्यादा लोगों को नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमों को मानते हुए इन लोगों को घर भेजने का इंतजाम किया है। दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि प्रवासी अपने रास्ते पर हैं। नियमों के अनुसार उन्हें एक बड़े समूह के रूप में वाहन पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है।

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राहुल गांधी लॉकाउन के बाद से लगातार सोशल मीडिया पर मजदूरों को लेकर लिख रहे हैं और गरीबों के खाते में नकद पैसा भेजे जाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को ही क्षेत्रीय पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्‍होंने कहा कि सरकार मजदूरों को पैकेज के बारे में ना सुनाए बल्कि उनके खाते में सीधा पैसा दे। राहुल गांधी ने कहा कि कोई बच्चा जब रोता है तो मां उसे लोन नहीं देती, बल्कि उसे चुप कराने का उपाय निकालती है, उसे ट्रीट देती है। सरकार को साहूकार नहीं, मां की तरह व्यवहार करना होगा।। कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए था, बल्कि किसान, मजदूरों की जेब में तुरंत पैसे दिए जाने की आवश्यकता है। राहुल ने कहा कि डिमांड को स्‍टार्ट करने के लिए अगर हमने पैसा नहीं दिया तो बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

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राहुल गांधी लॉकाउन के बाद से लगातार सोशल मीडिया पर मजदूरों को लेकर लिख रहे हैं। वो लगातार मजदूरों को घर पहुंचाए जाने की बात कह रहे हैं और सरकार की नितियों की आलोचना कर रहे हैं। बता दें कि 25 मार्च के देशभर में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से लगातार मजदूर शहरों से अपने घरों को लौट रहे हैं। परिवहन के तमाम साधन बंद होने के चलते ये लोग पैदल या फिर साइकिलों, रेहडियों, बोगियों से लौट रहे हैं। मजदूरों की मौतों का सिलसिला जारी सरकार के तमाम दावों के बावजूद लॉकडाउन के बाद पैदल घरों की ओर मजदूरों के पैदल चलने का सिलसिला जारी है तो वहीं हादसों के भी शिकार हो रहे हैं। शनिवार को ही अलग-अलग हादसों में तीस से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा जख्मी हुए हैं।

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