प्रतीकात्मक तस्वीर

अभिभावकों का कहना है कि इतना लंबा लॉकडाउन होने की वजह से बच्चों को यूं एक स्कूल में लंबे समय के लिये नहीं छोड़ सकते है। अभी तो बच्चों को खाने पीने की कमी नहीं है, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, इससे आने वाले दिनों में दिक्कत आ सकती है…

जनज्वार ब्यूरो, दिल्ली। दिल्ली नवोदय विद्यालय के नौंवी के छात्र जो कि मणिपुर, असम प्रदेशों में भाषा एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वहां गए हुए थे, अब लॉक डाउन की वजह से वहां फंस गए हैं। छात्रों में छह लड़के और छह लड़कियां शामिल है। एक बच्ची के मामा ने बताया कि अचानक ही लॉकडाउन होने के कारण अब बच्चों को वहां से निकलाना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर परिजन बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

रिजनों की मांग है कि उनके बच्चों को वहां से निकालने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पुख्ता कदम उठाए जाने चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि इतना लंबा लॉकडाउन होने की वजह से बच्चों को यूं एक स्कूल में लंबे समय के लिये नहीं छोड़ सकते है। अभी तो बच्चों के खाने पीने की कमी नहीं है, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, इससे आने वाले दिनों में दिक्कत आ सकती है। यहीं आशंका अभिभावकों को डरा रही है।

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फ्लाइट हो गयी थी कैंसिल अब रेल भी नहीं चल रही है
भिभावकों ने बताया कि अचानक से फ्लाइट कैंसिल हो गयी थी। बच्चों ने वापसी की टिकट ले ली थी। लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गयी। अब रेल भी नहीं चल रही है। एेसे में बच्चों का वहां से निकलने का कोई साधन ही नहीं है। ऐसे में एक ओर जहां बच्चे परेशान हो रहे हैं, वहीं उनके अभिभावकों की भी सांस अटकी हुई है। जिस तरह से पूरे देश में कोरोना को लेकर लॉक डाउन हो गया है। ऐसे में परिजन चाहते है कि उनके बच्चे जल्द से जल्द अपने अपने घरों में हो।

किया गया एक स्कूल में इक्ट्ठा
भिभावकों ने बताया कि बच्चें को मणिपुर के एक स्कूल में इक्ट्ठा किया गया है। यहां टीचर्स बच्चों की ओर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि अभी तक बच्चों को वहां किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आ रही है। लेकिन फिर भी अब हालात का नहीं पता कि क्या होगा?

100 से भी ज्यादा बच्चे गये थे सेवन सिस्टर्स स्टेट में
ताया जा रहा है कि करीब 100 बच्चें इन राज्यों में गये थे। यह प्रोग्राम भाषा एक्सचेंज के तहत चलाया गया था। इसमें बच्चे वहां की भाषा और सांस्कृति की जानकारी ले सके। लेकिन अब अचानक ही कोरोना वायरस की वजह से सारा कार्यक्रम गड़बड़ा गया है।

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भिभावकों की दिक्कत यह भी है कि उनका अपने बच्चों से नियमित संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। उन्हें यह भी नहीं पता चल पा रहा कि अभी वहां से कितने बच्चे वापस आ गये हैं।

केंद्र सरकार को ही उठाना होगा कोई कदम
ब क्योंकि देश भर में लॉकडाउन की स्थिति है। ऐसे में अब केंद्र सरकार ही यदि इस दिशा में कोई कदम उठाती है तो बच्चों को वहां से निकाला जा सकता है। इसके लिए स्पेशल इंतजाम ही करने होंगे। अभिभावकों की मांग है कि उनके बच्चों को वहां से निकलाने के लिए केंद्र सरकार या तो वहां स्पेशल फ्लाइट भिजवाये, या फिर किसी दूसरे साधन से बच्चों को वहां से निकलाने का प्रबंध करें।


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