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राजनीति

मोदी जी की अच्छी भावना फिर होगी गलत नीतियों की शिकार, गांधी जयंती पर लाखों लोग हो जायेंगे बेरोजगार

Prema Negi
14 Sep 2019 3:49 AM GMT
मोदी जी की अच्छी भावना फिर होगी गलत नीतियों की शिकार, गांधी जयंती पर लाखों लोग हो जायेंगे बेरोजगार
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आर्थिक मंदी से गुजर रहे देश को एक और बड़ा झटका देने वाले हैं पीएम मोदी, स्वतंत्र कुमार की टिप्प्णी

जनज्वार। आपको 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से पीएम मोदी के भाषण आपको याद न हो तो हम आपको याद दिला देते हैं। उस दिन पीएम मोदी ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने की बात कही थी। उनकी इस बात को बहुत से संस्थानों ने आदेश के तौर पर लिया और प्लास्टिक की चम्मच, दोने, कप, प्लेट आदि को देना बंद कर दिया।

11 सितंबर को मथुरा में हुए एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी जी ने लोगों को फिर से याद दिलाया कि 2 अक्टूबर से सिंगल यूज़ प्लास्टिक बंद हो जायेगी और घर से सब्जी आदि खरीदने के लिए घर से थैला लेकर जाना पड़ेगा।

लेकिन सिंगल यूज़ प्लास्टिक के सामान बनाने के कारखाने हर छोटे बड़े शहर में हैं, जहाँ लाखों लोगों को काम मिला हुआ है। इस तरह के सामान के डिस्ट्रिब्यूशन के काम करने वाले भी लोग हज़ारों की तादाद में हैं। सरकार ने इस तरह के सामान का कोई विकल्प भी तैयार नहीं किया है और सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर बैन लगाने का निर्णय लगभग ले लिया है।

मोदी सरकार के इस फैसले से लाखों लोग एक झटके में बेरोजगार हो जाएंगे। पहले से ही मंदी की चपेट में आकर लाखों लोग अपनी नौकरी गवां चुके हैं। यदि आपको इस संकट को समझना है तो एक बार अपने आस पास की दुकान में चले जाइये और कुछ पॉलीथिन, प्लास्टिक की चम्मच, कटोरी, दोना आदि मांग कर देखिये क्या जवाब मिलेगा।

हां दिल्ली जैसे महानगर की बात नहीं हो रही है, बल्कि देश के किसी भी छोटे बड़े शहर में पता कर लीजिए। सिंगल यूज़ प्लास्टिक लगभग बंद हो गई है और इस काम मे लगे लोग सड़कों पर आ गए हैं, जो अगले कुछ दिनों में नज़र आने लगेगा।

ब बात थोड़ी राजनीति की कर ली जाये। सरकार कचरे के निबटारे में फेल हो चुकी है। उसका कोई विकल्प निकालने की जगह सीधा प्लास्टिक बैन करके समस्या को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

मोदी जी के इस फैसले का विपक्ष चाह कर भी विरोध नहीं कर पाएगा, क्योंकि प्लास्टिक पर्यावरण के लिये बड़ी समस्या बन चुकी है और हर शहर में इसके ढेर पहाड़ बन चुके हैं। विपक्ष में इतना बल नही है कि वो मोदी के इस फैसले का विरोध कर सके। दूसरा मोदी के समर्थकों के लिये ये बड़ा क्रांतिकारी फैसला माना जायेगा। जबकि इसका दूसरा पहलू देखा जाये तो प्लास्टिक के स्थान पर कागज़ और कपड़े के थैले का इस्तेमाल होगा।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बनी हाई लेवल कमेटी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की भी सिफारिश की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगने के बाद भी यदि कोई इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है तो उन पर जुर्माना लगाने का प्रावधान होगा। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में पर्यावरण, कंज्यूमर अफेयर, जल संशाधन और रेलवे मंत्रालय के सचिव भी सदस्य हैं।

मारे देश में सिंगल प्‍लास्टिक यूज करने वालों में ई-कॉमर्स कंपनियां सबसे आगे हैं। सालाना उपयोग होने वाले प्लास्टिक प्रोडक्ट में लगभग 40 फीसदी प्लास्टिक की खपत ई-कॉमर्स सेक्टर में होती है। हर साल 300 मिलियन टन प्‍लास्टिक का उत्पादन होता है और इसमें से 150 मिलियन टन प्‍लास्टिक सिंगल-यूज होता है। यानी वह प्‍लास्टिक जिसे हम एक बार इस्‍तेमाल कर फेंक देते हैं। गौरतलब है कि दुनियाभर में सिर्फ 10 से 13 फीसदी प्‍लास्टिक ही री-साइकिल हो पाता है। सीधे—सीधे इस उद्योग से लाखों लाख लोगों की रोजी रोटी जुड़ी हुई है।

कागज़ के लिये पेड़ काटने पड़ेंगे, पता नहीं इस पर किसी का ध्यान जाएगा कि नहीं। इससे भी पर्यावरण को ही नुकसान होगा, जबकि कचरे का सही से प्रबन्धन किया जाता तो प्लास्टिक की ये समस्या इतना विकराल रूप नहीं लेती।

नज्वार से जुड़े पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ लेखक और जानकार महेंद्र पांडे कहते हैं कि 'इससे बेरोजगारी तो बढ़ेगी ही, लेकिन दो बड़े पर्यावरणीय संकट और उत्पन्न होंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक बंद होने के बाद जिस मात्रा में कागज के कप—प्लेट चाहिए उसके लिए बड़ी मात्रा में पेड़ काटने ही पड़ेंगे। दूसरी बात कि चाय का चुक्कड़ मिट्टी की ऊपरी परत से बनता है। ऐसे में इतनी जमीन कहां से आयेगी जिससे इतने भारी पैमाने पर इनकी आपूर्ति की जा सके।'

मोदी सरकार के सिंगल यूज प्लास्टिक हटाने के निर्णय पर पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं, कोल्ड ड्रिंक व पानी की बोतल भी सिंगल यूज़ प्लास्टिक की बोतल में आती है। क्या मोदी सरकार उन मल्टी नेशनल कंपनियों के प्लास्टिक की कोल्ड ड्रिंक्स, पानी की बोतल, चिप्स को बैन करेगी या इसकी मार एक बार फिर गरीब पर ही पड़ेगी।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने का कदम निश्चित ही स्वागतयोग्य है, मगर सवाल यह भी है कि क्या मोदी सरकार ने उन लाखोंलाख लोगों के रोजगार के बारे में भी कुछ सोचा है जिनकी रोजी रोटी इससे जुड़ी है। आखिर सरकार ने उनके रोजगार की क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है।

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