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उत्तराखंड में कोरेन्टीन किये गए प्रवासी मजदूरों ने शुरू की भूख हड़ताल, वहीं लंबे लॉकडाउन से व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें

Prema Negi
22 April 2020 12:09 PM GMT
उत्तराखंड में कोरेन्टीन किये गए प्रवासी मजदूरों ने शुरू की भूख हड़ताल, वहीं लंबे लॉकडाउन से व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें
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उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के कोरेन्टीन किये गए लोग हल्द्वानी स्टेडियम में बनाये गए कोरेन्टीन सेंटर में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, मंगलवार 21 अप्रैल के दिन से इन लोगों ने खाना नहीं खाया है...

संजय रावत की रिपोर्ट

हल्द्वानी, जनज्वार। कोरोना की भयावहता के बीच शासन-प्रशासन की उदासीनता से तंग आकर कोरेन्टीन में रखे गये लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उत्तराखंड के प्रवेशद्वार कहे जाने वाले शहर हल्द्वानी में कोरेन्टीन में रखे गये उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाके के मजदूरों ने तय समयावधि पर ना छोड़े जाने पर अपना रोष व्यक्त करते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी है तो वहीं लंबे लॉकडाउन से व्यापार थम जाने और चौपट हो जाने के डर से व्यापारी वर्ग बहुत बेचैन है।

चानक हुए लॉकडाउन के बाद हल्द्वानी के एक स्टेडियम में उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश के 309 लोगों को 29 मार्च के दिन 14 दिनों के लिए कोरेन्टीन में रखा गया था, पर समयावधि पूरी होने के बाद भी लोगों को ना छोड़े जाने से लोग आक्रोशित होने लगे और स्थानीय प्रशासन उन्हें किसी तरह मानता रहा।

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क्रोश बढ़ने पर उत्तराखंड के अलग अलग जनपदों के जनप्रतिनिधियों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया तो कोरेन्टीन में कैद उत्तराखंड के युवाओं को 3 दिन पहले उनके गृह जनपद भेज दिया गया, पर उत्तरप्रदेश के 25 लोग स्टेडियम में फंसे रह गए।

ब उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के कोरेन्टीन किये गए करीब 25 लोग हल्द्वानी स्टेडियम में बनाये गए कोरेन्टीन सेंटर में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, मंगलवार 21 अप्रैल के दिन से इन लोगों ने खाना नहीं खाया है, ये सभी लोग घर जाने की जिद पर भूख हड़ताल पर चले गये हैं।

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गौरतलब है कि कोरेन्टीन किये गये ये सभी लोग मज़दूर हैं, जो सीमांत पहाड़ी जिलों में मज़दूरी का काम करते थे। लॉक डाउन के दौरान जब ये लोग वापस अपने घरों को लौट रहे थे तो इनको हल्द्वानी में कोरेन्टीन किया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश के मेरठ, शाहजहांपुर, बरेली, पीलीभीत जिलों के रहने वाले मजदूर शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन की मान मनोव्वल के बाद भी सभी मजदूर इस बात पर अड़ गए हैं कि जब तक घर जाने की मांग का कोई समाधन नहीं निकलेगा, तब तक वे भूख हड़ताल नही तोड़ेंगे।

सेक्टर मजिस्ट्रेट मनोज गुप्ता के मुताबिक मामले की जानकारी अपने आला अधिकारियों को लगातार दी जा रही है, जिस पर अंतिम निर्णय उच्चाधिकारियों और सरकार को ही लेना है।

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हीं उत्तराखंड में भाजपा का वोट बैंक माना जाने वाला व्यापारी वर्ग कोरोना संकट में नित नई नीतियों के चलते संशय की स्थिति से गुजर रहा है। आर्थिक मंदी के बाद लंबे लॉक डाउन से व्यापारी सकते में है।

दिल्ली की आजादपुर मंडी के बाद सबसे बड़ी मंडी हल्द्वानी की नवीन मंडी ही है, जिसके चलते उत्तराखंड के साथ ही उत्तरप्रदेश की कई मंडियों में यहीं से सप्लाई होती है। यूँ कहें कि बड़ी मंडी होने के चलते सभी बड़े व्यापारी हल्द्वानी से ताल्लुक रखते हैं।

ल्द्वानी कुमाऊँ का सबसे बड़ा शहर होने के साथ साथ आर्थिक राजधानी कहा जाता है। लॉकडाउन के चलते सबसे बड़ी परेशानी यहां के व्यापारियों महसूस कर रहे हैं, जिसके चलते व्यापारी अब यह सोचकर परेशान हैं, क्या 3 मई से आगे भी लॉक डाउन बढ़ेगा।

हालांकि इसको लेकर अभी असमंजस की स्थिति है, कुमाऊँ की आर्थिक राजधानी के चलते यहां से प्रतिदिन करोड़ों का व्यापार होता है। कुमाऊं की सबसे बड़ी सब्जी मंडी भी हल्द्वानी में है जहां से कुमाऊ के पहाड़ी जिलों को सब्जी, फल, फूल की सप्लाई होती है, लेकिन लॉकडाउन के बाद जैसे मानो व्यापारियों की कमर ही टूट गई, व्यापारियों के विरोध के बाद सरकार ने ऑनलाइन शॉपिंग पर तो रोक लगा दी, लेकिन अब व्यापारी यह सोचकर परेशान है कि जब लॉकडाउन खुलेगा तो सामने आने वाली आर्थिक मंदी से वह कैसे जूझेंगे।

सरकार से मांग कर रहे हैं कि व्यापारियों ने जो भी लोन लिया है, फिलहाल सरकार उसको माफ कर दे या उस पर लगने वाले ब्याज में कुछ छूट दे दे, इसके अलावा पानी व बिजली के बिल और दुकानों के किराए में भी कुछ छूट मिल जाए तो यही व्यापारियों के लिहाज से यह बहुत बड़ी राहत होगी, क्योंकि अभी शादियों का सीजन है लेकिन कारोबार बिल्कुल खत्म है, और आने वाले 6 महीने में भी व्यापार चलने की कोई उम्मीद नहीं है। लिहाजा सरकार को व्यापारियों के प्रति कोई उचित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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