केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने ठुकराया मैग्सेसे अवॉर्ड, कहा यह सम्मान नहीं मिलना चाहिए किसी राजनेता को

Former Kerala Health Minister KK Shailaja Rejects Magsaysay Award : केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने रेमन मैग्सेसे अवार्ड को ठुकरा दिया है। केके शैलजा ने कहा है कि वो रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड स्वीकार नहीं करेंगी, क्योंकि ये सम्मान हमेशा किसी व्यक्ति को दिया जाता है न कि किसी राजनेता को। केके शैलजा की यह आवाज बेशक भारत की आम जनता की आवाज है।
गौरतलब है कि रेमन मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन ने कुछ सप्ताह पहले केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को 64वें मैग्सेसे पुरस्कार के लिए चुना था।
गौरतलब है कि केके शैलजा को उनके कार्यकाल के दौरान कोविड-19 और निपाह वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में योगदान के लिए इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना था। अवार्ड को ठुकराते हुए उन्होंने कहा, हमने इस मुद्दे पर पार्टी के साथ चर्चा की है और ये फ़ैसला किया है कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में केरल सरकार के काम की चर्चा की गई है और उन्होंने ये भी कहा है कि उन्होंने कोविड और निपाह महामारी को रोकने के लिए केरल सरकार के काम पर गौर किया है।
केके शैलजा ने कहा मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने राजनीति कारण बताते हुए पूरे सम्मान के साथ कहा, इस सम्मान के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, लेकिन इस सम्मान की मैं अकेले की हकदार नहीं हूं क्योंकि ये काम सामूहिक तौर पर किया गया है इसलिए एक राजनेता के तौर पर मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती हूं।'
शैलजा ने कहा, ये फ़ैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि उन्होंने कभी किसी राजनेता को ये सम्मान नहीं दिया है। मैं कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल मेंबर हूं, इसलिए हमने ये तय किया है कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। केके शैलजा के इस महान निर्णय से संपूर्ण देश उनकी सराहना कर रही है।
रेमन मैगसेसे पुरस्कार एशिया के उन व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिये प्रदान किया जाता है। इसे प्रायः एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। यह रमन मैग्सेसे पुरस्कार फाउन्डेशन द्वारा फ़िलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रमन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है।
हालांकि इस बीच चर्चा यह है कि अपनी पार्टी के दबाव में केके शैलजा ने यह पुरस्कार ठुकराया है। साथ ही यह भी चर्चा थी कि शैलजा की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार को अस्वीकार करने का आदेश दिया था। केरल की राजनीतिक जगत में भी में इस बात की चर्चा है कि वह एक उभरती हुई नेता हैं, जो किसी भी समय केरल के मुख्यमंत्री के रूप में पिनाराई विजयन की जगह ले सकती हैं, इसलिए वह कुछ कम्युनिस्ट नेताओं की आंख की किरकिरी बनी हुयी हैं। गौरतलब है कि कोविड काल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद केके शैलजा को स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया था, इस कारण भी इस तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हुआ था।
वहीं इस तरह की चर्चा को सिर्फ गाॅसिप कहते हुए सीपीएम के नए राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि एक कम्युनिस्ट नेता को मैग्सेसे पुरस्कार देने के कदम के पीछे साजिश थी। मैगसेसे एक प्रमुख कम्युनिस्ट विरोधी थे। एक कम्युनिस्ट को उनके नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कार को नहीं स्वीकार करना चाहिए। शैलजा ने जाहिर तौर पर इस बात को समझा और उन्होंने सही निर्णय लिया।
वहीं केके शैलजा द्वारा मैग्सेसे पुरस्कार ठुकराये जाने पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने बयान दिया कि पार्टी नेतृत्व ने फिलीपींस में कम्युनिस्टों के उत्पीड़क रेमन मैग्सेसे के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कार को अपनाने से इनकार कर दिया है। शैलजा को एक व्यक्ति के रूप में चुना गया था, लेकिन कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं थी। वैसे भी नेताओं के लिए मैग्सेसे पुरस्कार नहीं माना जाता है। रेमन मैग्सेसे कम्युनिस्ट विरोधी थे।











