'अपने दोस्त अडानी को बचाने के लिए मोदी ने देश के करोड़ों लोगों के हित बेच दिए अमेरिका के हाथों' संजय सिंह की चेतावनी 'भारत-अमेरिका ट्रेड डील हमारे किसानों के साथ धोखा

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India-US trade deal : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भारत अमेरिका ट्रेड डील के बाद केंद्र की मोदी सरकार पर जबर्दस्त प्रहार किया है। भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापारिक समझौते को देश के लिए ‘काला दिन’ करार देते हुए संजय सिंह ने आरोप जड़ा है कि मोदी सरकार ने देश की जनता को अंधेरे में रखकर अमेरिका के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है।
संजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर वीडियो जारी कर कहा है, आज का दिन भारत के करोड़ों किसानों के लिए एक काला दिन है। आज का दिन इस देश के लोगों के ऊपर महंगाई थोपने का दिन है। और यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति का ट्वीट आया है। जानकारी साझा की है उन दोनों लोगों ने, और अच्छे अच्छे अंग्रेजी का शब्द आप जानते हैं कि कैसे ट्रंप को जब भी मोदी को बेवकूफ बनाना होता है, जब भी मोदी से कोई काम अपने देश के हित में लेना होता है तो वो उनका माय डियर फ्रेंड बन जाता है। तो आज फिर से उसने एक ट्वीट करके जानकारी दिया है कि उनका जो माय डियर फ्रेंड मोदी है, उसने सारी चीजों के लिए सरेंडर कर दिया है। नरेंद्र का सरेंडर हो चुका है। अमेरिका के आगे नरेंद्र सरेंडर कर चुका है।
संजय सिंह कहते हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। वेनेजुएला का जो तेल होता है, उसको रिफाइन करना महंगा होता है। वो बहुत अच्छी क्वालिटी का तेल नहीं होता है। अमेरिका का तेल रूस के मुकाबले महंगा मिलता है, तो भारत के लोगों के हितों को गिरवी रखकर, देश के ऊपर महंगाई का बोझ थोप के, देश के ऊपर महंगे तेल का बोझ थोप-थोप के, मोदी ने देश को बगैर विश्वास में लिए हुए यह फैसला ले लिया कि अब अमेरिका से तेल खरीदा जाएगा, वेनेजुएला से तेल खरीदा जाएगा, रूस से तेल खरीदा नहीं जाएगा। यह किस दबाव में किया मोदी जी आपने? यह किस कारण से आपने किया? आपने भारत के लोगों को महंगाई की आग में झोंकने का काम क्यों किया? महंगा तेल इस देश के अंदर खुलेआम बिकेगा, इस कारण से कि आपने ट्रंप के दबाव में आकर अपना जो परंपरागत मित्र है, रूस उससे तेल खरीदना बंद कर दिया और इसकी जानकारी अमेरिका का राष्ट्रपति दे रहा है। यानी कि भारत की अर्थव्यवस्था, भारत के बारे में निर्णय अमेरिका का राष्ट्रपति फिर से एक बार ले रहा है। जैसे सीजफायर के बारे में उसने कहा कि सीजफायर उसने कराया और इससे भी ज्यादा खतरनाक फैसला इस देश के करोड़ों किसानों के लिए।
संजय सिंह आगे कहते हैं, जितनी भी सरकारें हिंदुस्तान में रही, जितनी भी सरकारें अब तक रही हिंदुस्तान में, हर सरकार ने किसानों के हित को सुरक्षित रखा। क्योंकि आज भी देश का सत्तर, अस्सी करोड़ किसान, उससे जुड़ी हुई आबादी देश की अर्थव्यवस्था को चलाती है। आज भी इस देश के करोड़ों अन्नदाता देश के करोड़ों लोगों का पेट भरते हैं। आज भी हिंदुस्तान का किसान आत्मनिर्भर है, अपना जीवन चलाने के लिए। लेकिन आपने उस किसान के पेट और पीठ दोनों पर छुरा मारने का काम किया। मोदी जी ने फैसला लिया है कि कि अब अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर जीरो शुल्क लगेगा यानी कि एक भी रुपए का शुल्क नहीं लगेगा, एक भी रुपए का टैक्स नहीं लगेगा। कर मुक्त होंगे सारे कृषि उत्पाद। वो चाहे कपास हो, चाहे गेहूं हो, चाहे बाकी जितने भी कृषि उत्पाद हैं जो अमेरिका से आएंगे, उस पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा। तो इससे क्या होगा? अमेरिका का कपास सस्ता हो जाएगा। अमेरिका से आने वाला गेहूं सस्ता हो जाएगा। अमेरिका से आने वाली सब्जियां सस्ती हो जाएंगी। अमेरिका से आने वाले तमाम कृषि उत्पाद सस्ते हो जाएंगे हिंदुस्तान में, तो हिंदुस्तान के किसानों का उत्पाद नहीं खरीदा जाएगा। उनके सारे जो दुग्ध उत्पाद हैं, जो मिल्क प्रोडक्ट्स हैं, वो सस्ते हो जाएंगे। ये सब कुछ सस्ता हो जाएगा, तो हिंदुस्तान का किसान जो है वो दर-दर की ठोकरें खाएगा। वो बेरोजगारी की मार झेलेगा और करोड़ों किसान इस देश के बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
यानी कि तीन काला कानून लाकर जो एक विश्वासघात करने का काम नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने किया था, वो काम इस फैसले से उन्होंने दोबारा कर दिया और अमेरिका को छूट दी कि आइए हिंदुस्तान के किसानों को आप बर्बाद कीजिए।
गोदी मीडिया पर भी इस दौरान संजय सिंह जबर्दस्त हमलावर हुए। उन्होंने कहा, अभी आप देखिएगा गोदी मीडिया ढोल पीटना शुरू कर देगा। कल तक यही गोदी मीडिया बता रहा था कि चीन से, रूस से भारत की दोस्ती हो रही है, मोदी जी की दोस्ती हो रही है। अमेरिका को हम जवाब दे रहे हैं, अब आज वो बताएंगे कि देखिए, देखिए साहब, हमारे महामानव ने कितना बड़ा काम कर दिया। ये देखो ट्रंप से उन्होंने दोस्ती कर ली फिर से और ट्रंप ने उनसे फोन पर बातचीत कर ली। तुम्हारे फोन पर बातचीत करने से और अच्छी अंग्रेजी लिख देने से और माय डियर गुड फ्रेंड लिख देने से भारत के करोड़ों लोगों के हितों को आप कूड़ेदान में डाल देंगे क्या? देखिए क्या लिख रही है अमेरिका की जो एग्रीकल्चर सेक्रेटरी हैं। पहले तो उन्होंने ट्रंप का एक बयान डाला है, जिसमें ट्रंप ने कहा है कि रूस से अब तेल नहीं खरीदेगा हिंदुस्तान। मोदी से उनकी बातचीत हो गई है, उनका जो बेहतरीन दोस्त है, अभी तक मोदी उनका बेहतरीन दोस्त नहीं था। रोज अपमानित कर रहा था, आज अचानक बेहतरीन दोस्त हो गया और बता दिया कि अब कृषि उत्पादों के लिए हिंदुस्तान का बाजार खुल गया। रूस से तेल नहीं खरीदेगा हिंदुस्तान और वेनेजुएला और अमेरिका से तेल खरीदेगा।
ट्रंप की जो एग्रीकल्चर सेक्रेटरी का बयान है, "थैंक यू ट्रंप फॉर वंस अगेन डिलीवरिंग फॉर आवर अमेरिकन फार्मर्स। न्यू यूएस इन द इंडिया डील विल एक्सपोर्ट मोर अमेरिकन फार्म प्रोडक्ट्स टू इंडियाज मैसिव मार्केट, लिफ्टिंग प्राइस एंड पंपिंग कैश इंटू रूरल अमेरिका।" वो अपने किसानों के लिए कितनी उत्साहित होकर ट्रंप को बधाई दे रही हैं। मैं भारत के प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं, इस देश के करोड़ों किसानों की ताकत को कम मत आको। इस देश के लोगों को महंगाई की आग में मत झोंको। तुम्हारी कौन सी ऐसी नस दबी हुई है मोदी जी? क्या आपको ऐसा हो गया है कि आप लगातार भारत के स्वाभिमान और सम्मान को गिरवी रखते जा रहे हैं? आप भारत के हितों को अमेरिका के आगे बेचने का काम कर रहे हैं? अभी एपस्टीन फाइल में आपके नाम का जिक्र हुआ और अडानी को अमेरिका से सम्मन आया सैंतीस हज़ार करोड़ रुपए के किसी घपले घोटाले के मामले में। तो क्या यह कारण है कि जो आपने भारत का कृषि बाजार खोल दिया अमेरिका के लिए? क्या यह कारण है कि आप महंगा तेल अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेंगे और उसको रिफाइन करने में ज्यादा पैसे खर्च करेंगे और भारत के लोगों को महंगा तेल बेचेंगे? सिर्फ अपने एक दोस्त को बचाने के लिए या अपने आप को बचाने के लिए। क्या दबाव है आपके ऊपर? देश आपसे जानना चाहता है। जवाब दीजिए इस बात का और यह ट्रेड डील आपको तोड़नी पड़ेगी, खत्म करनी पड़ेगी वरना देश में सड़क से लेकर संसद तक आपके खिलाफ आंदोलन उठेगा। आपके खिलाफ आवाज उठेगी।











