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वाह रे यूपी पुलिस! बेटी की हत्या आरोप में फरियादी पिता को भेजा था जेल, 3 साल बाद जिंदा निकली बेटी, पुलिस के उड़े होश

Janjwar Desk
3 Nov 2021 5:12 AM GMT
वाह रे यूपी पुलिस! बेटी की हत्या आरोप में फरियादी पिता को भेजा था जेल, 3 साल बाद जिंदा निकली बेटी, पुलिस के उड़े होश
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आरोपी ट्यूशन टीचर गिरफ्तार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Uttar Pradesh Crime News : फर्रुखाबाद पुलिस ने इस मामले में तथ्यों को दरकिनार कर अपनी लड़की के बुजुर्ग पिता को ही बेटी का हत्यारा घोषित कर जेल भेज दिया।

Uttar Pradesh Crime News : उत्तर प्रदेश पुलिस किसी न किसी कारनामे को लेकर हमेशा सुर्खियों में होती है। ताजा मामला एक ऐसी घटना से जुड़ी है, जिसके लिए दोषी पुलिसकर्मियों को माफ करना किसी भी लिहाज से सही नहीं माना जाएगा। यह मामला यूपी के फर्रुखाबाद पुलिस की कामकाज की शैली से जुड़ा है। इस मामले में यूपी पुलिस ने एक बाप को अपनी ही बेटी की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया, जिसे उसने अंजाम ही नहीं दिया। पुलिस की मनमानी की वजह से बाप को तीन साल तक पुलिस के फर्जी जुर्म में सलाखों के पीछे रहना पड़ा। पीड़ित और बुजुर्ग पिता की गलती बस इतनी थी कि वे घर से गायब बेटी को ढूंढने की फरियाद लेकर पुलिस से सहायता करने की मांग की थी।

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बिना जांच के बाप को बताया बेटी का हत्यारा

फर्रुखाबाद पुलिस ने इस मामले में तथ्यों को दरकिनार कलर तफ़्तीश की। अपनी जांच में लड़की के बुजुर्ग पिता को ही बेटी का हत्यारा घोषित कर, जेल भेज दिया। जबकि लड़की मरी नहीं थी बल्कि वो घर से गायब हुई थी। जब लड़की को अपने पिता के जेल में बंद होने की जानकारी मिल जब कथिक मृतक बेटी को हुई तो कागजों में मृतक बेटी पुलिस के सामने पहुंच गई। इसके बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए। ये बात अलग है कि कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया और पिता को जेल से रिहा करने के आदेश देते हुए मुख्य आरोपियों और पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई का आदेश जारी किया।

यह मामला थाना मेरापुर के गांव देव सैनी का है। साल 2016 में यहाँ के रहने वाले 61 वर्षीय लालाराम की बेटी सोनी गयाब हो गई। परेशान पिता ने पुलिस में अपने गुमशुदा बेटी का केस दर्ज करवाते बताया की उनकी बेटी अभी तक घर वापस नहीं आई है। पीड़ित के पिता थाना के चक्कर काटते रहे लेकिन यूपी पुलिस के कान पर जू तक नहीं रेंगा। पुलिस इस मामले में हाथ पांव मारने की जगह पीड़ित पिता को ही हवालात में पहुंचा दिया।

पीड़ित पिता ने गांव के ही ओंकार अजब सिंह, बिशनदयाल, संतोष और संतोष देवी पर संदेह के आधार पर 2016 में लिखती तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले की तफतीश सही तरीके से करने बजाय उल्टा पिता को ही जबरन आरोपी बना कर 302 के तहत हत्या के आरोप में जेल भेज दिया। तत्कालीन इंस्पेक्टर सुनील कुमार और एसआई मोहम्मद आसिफ़ ने कानून का ताक पर रख कर अपने सहुलियत के हिसाब से बता दिया कि सोनी की हत्या हो गई और लालाराम ही उसका हत्यारा है।

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने हत्या के मामले में कोई जांच नहीं किया और न ही किसी की इस मामले गवाही दर्ज की। सीधा फ़रियादी को ही 302 को मुजलिम बना दिया। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट भी दाख़िल कर दी।

26 मई, 2020 को सोनी ने एसपी के सामने प्रमाण पत्र और शपथ पत्र देकर खुद को जीवित बताया था। अब कोर्ट ने पूरे मामले में गंभीरतापूर्वक सुनवाई की और बेटी सोनी को कोर्ट के सामने पेश होने का फरमान जारी करते हुए पीड़ित लालाराम की याचिका को स्वीकार किया है।

कोर्ट की सख्ती के बाद हरकत में आई पुलिस

Uttar Pradesh Crime News : आरोपी पुलिस कर्मियों समेत गांव के ही ओंकार अजब सिंह, बिशनदयाल, संतोष देवी पर मुक़दमा दर्ज कर कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान पीड़ित पिता ने पुलिस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने कई दिनों तक बेरहमी से उसके मारपीट कर जबरन बेटी की हत्या का जुर्म कुबूल करवाया। साथ ही पकड़े गए दामाद को छोड़ने के लिए लाखों रुपए की रिश्वत भी ली।

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