बिहार

बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को मिली सशर्त पैरोल, बीमार मां और पत्नी से मिलने की अनुमति

Janjwar Desk
3 Dec 2020 5:07 AM GMT
बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को मिली सशर्त पैरोल, बीमार मां और पत्नी से मिलने की अनुमति
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File photo

पीठ ने कहा कि उक्त स्थान का सत्यापन करने के साथ ही राज्य पुलिस वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करेगी, 19 सितंबर को पिता की मौत होने और मां के बीमार होने के आधार पर शहाबुद्​दीन ने कस्टडी पैरोल की मांग की थी...

जनज्वार। आरजेडी के पूर्व सांसद व बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है। उन्हें तीन दिनों की सशर्त पेरोल मिली है। पिता के निधन के बाद से शहाबुद्दीन कोर्ट से पैरोल मांग रहे थे। हालांकि पैरोल पर वह सिवान आना चाहते थे, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें 3 दिनों के लिए सशर्त पैरोल दे दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें दिल्ली में रह कर ही परिजनों से मुलाकात करना है। हर दिन उन्हें 6-6 घंटे परिजनों से मिलने की इजाजत है। कहा जा सकता है कि शहाबुद्दीन को कोर्ट ने एक तरह से कस्टडी पैरोल दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार न्यायमूर्ति एजे भंभावी की पीठ ने शहाबुद्दीन को किसी भी 3 दिन में 6-6 घंटे की कस्टडी पैरोल की अनुमति दिया है। इस दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम के निर्देश भी दिए हैं।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि दिल्ली में ही स्थान तय कर परिजनों को जेल अधीक्षक को जानकारी देनी होगी। उसके बाद उस स्थान का पुलिस सत्यापन करेगी और सुरक्षा इंतजाम के साथ मुलाकात की इजाजत देगी।

पीठ ने कहा कि उक्त स्थान का सत्यापन करने के साथ ही राज्य पुलिस वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करेगी। 19 सितंबर को पिता की मौत होने और मां के बीमार होने के आधार पर शहाबुद्​दीन ने कस्टडी पैरोल की मांग की थी।

पीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ता शहाबुद्​दीन 30 दिन के भीतर इच्छानुसार कोई भी तीन तारीख चुन सकते हैं। सुबह छह बजे से शाम चार बजे के बीच छह घंटे के लिए मुलाकात करने की अनुमति होगी। इन छह घंटों में यात्रा समय भी शामिल होगा। न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने कहा कि याचिककर्ता इस दौरान अपनी मां, पत्नी व अन्य रिश्तेदारों के अलावा किसी से भी मुलाकात नहीं कर सकेगा।

उल्लेखनीय है कि शहाबुद्दीन बिहार के सीवान जिला से कई दफा विधायक और सांसद रहे हैं। उन पर हत्या, अपहरण, रंगदारी जैसे कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं। पिछली बार साल 2015 में उन्हें जमानत मिली थी और वे सीवान आए थे।

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