पीएम मोदी : केदारधाम की अनुभूति अलौकिक, शब्दों में इसका बयान संभव नहीं

उत्तराखंड के केदारनाथ में एक जनवभा को संबोधित करते नरेंद्र मोदी।
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Prime Minister Narendra Modi ) ने शुक्रवार को केदारनाथ पहुंचे और एक साथ कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। आज उन्होंने आदि शंकराचार्यजी की प्रतिमा का भी अनावरण किया। पीएम मोदी केदारनाथ ( Kedarnath ) हेलीपैड से मंदिर तक पैदल ही पहुंचे। हेलीपैड पर ऑल टेरिन व्हीकल रखा गया था, लेकिन वह पैदल ही निकल पड़े। प्रधानमंत्री मोदी करीब 320 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। केदारधाम पहुंचने केबाद सबसे पहले भोले बाबा की पूजा अर्चना की। इसमें खास बात ये रही कि पीएम मोदी ने इस मौके पर राजनीतिक भाषण नहीं दिया। यानी किसी राजनीतिक दल पर टीका टिप्पणी नहीं क
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। पूजा के दौरान मुख्य पुजारी बागेश लिंग, रावल भीमाशंकर लिंग के प्रतिनिधि केदारलिंग धर्माधिकारी ओंकार शुक्ला मुख्यमंत्री के तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे। चार अन्य लोग भी पूजा के दौरान मौजूद रहे। पूजा के बाद वह भीम शिला के निकट पहुंचे। बताया गया कि आपदा के दौरान भीम शिला ने ही पहाड़ से गिरने वाले पत्थरों को रोक दिया था। इसके मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने आदि शंकराचार्यजी की प्रतिमा का अनावरण किया। जिन परियोजनाओं का उद्धाटन किया उनमें मंदाकिनी रिटेनिंग वाल आस्थापथ और घाट, मंदाकिनी रिटेनिंग वाल आस्थापथ, तीर्थ पुरोहित आवास और मंदाकिनी नदी पर बना गरुड़चट्टी पुल शामिल हैं।
केदारनाथ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में महान संतों की परंपरा रही है। हमारे पुराणों, धर्म ग्रंथों, रामचरित मानस सभी में इस बात का जिक्र है। गोवर्धन पूजा के दिन केदारनाथ में बाबा के दर्शन का मौका मेरे लिए एक दिव्य अनुभूति है। उन्होंने शंकराचार्यजी की समाधि और अधिक दिव्य स्वरूप के साथ हम सबके बीच है। इसके साथ ही सरस्वती तट पर घाट का निर्माण भी हो चुका है। मंदाकनी पुल से गरुचट्टी मार्ग को भी दुरुस्त कर दिया गया है। गरुड़चट्टी से तो मेरा नाता रहा है। तीर्थ पुरोहितों के लिए बने नए आवासों से उन्हें हर मौसम में सुविधा होगी।
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केदारधाम का अनुभव अकल्पनीय
पीएम मोदी ने रामचरित मानस में शामिल पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि 'अबिगत अकथ अपार, नेति-नेति नित निगम कह' अर्थात्, कुछ अनुभव इतने अलौकिक और अनंत होते हैं कि उन्हें शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। बाबा केदारनाथ की शरण में आकर मेरी अनुभूति भी ऐसी ही होती है। बरसों पहले जो नुकसान यहां हुआ था, वो अकल्पनीय था। जो लोग यहां आते थे, वो सोचते थे कि क्या ये हमारा केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा? लेकिन मेरे भीतर की आवाज कह रही थी की ये पहले से अधिक आन-बान-शान के साथ खड़ा होगा। इस आदि भूमि पर शाश्वत के साथ आधुनिकता का ये मेल, विकास के ये काम भगवान शंकर की सहज कृपा का ही परिणाम हैं। मैं, इन पुनीत प्रयासों के लिए उत्तराखंड सरकार का, मुख्यमंत्री धामी जी का और इन कामों की ज़िम्मेदारी उठाने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद करता हूं।
जो कल्याण करे वहीं शंकर
पीएम ने कहा कि शंकर का संस्कृत में अर्थ है- "शं करोति सः शंकरः"यानी, जो कल्याण करे, वही शंकर है। इस व्याकरण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष प्रमाणित कर दिया। उनका पूरा जीवन जितना असाधारण था, उतना ही वो जन-साधारण के कल्याण के लिए समर्पित थे। अब हमारी सांस्कृतिक विरासतों को, आस्था के केन्द्रों को उसी गौरवभाव से देखा जा रहा है, जैसा देखा जाना चाहिए। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है। अयोध्या को उसका गौरव वापस मिल रहा है। अभी दो दिन पहले ही अयोध्या में दीपोत्सव का भव्य आयोजन पूरी दुनिया ने देखा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का प्राचीन सांस्कृतिक स्वरूप कैसा रहा होगा, आज हम इसकी कल्पना कर सकते हैं। एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। अब देश ने अपने लिए बड़े लक्ष्य तय किया है। कठिन समय सीमाएं निर्धारित करता है, तो कुछ लोग कहते हैं कि इतने कम समय में ये सब कैसे होगा! होगा भी या नहीं होगा! तब मैं कहता हूं कि – समय के दायरे में बंधकर भयभीत होना अब भारत को मंजूर नहीं है।
केदारनाथ में रोप-वे बनाने की तैयारी
उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां केदारनाथ जी तक श्रद्धालु केबल कार के जरिए आ सकें, इससे जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यहां पास में ही पवित्र हेमकुंड साहिब जी भी हैं। हेमकुंड साहिब जी के दर्शन आसान हों, इसके लिए वहां भी रोप-वे बनाने की तैयारी है। भारतीय दर्शन तो मानव कल्याण की बात करता है। जीवन को पूर्णता के साथ, holistic way में देखता है। आदि शंकराचार्य जी ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया।
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