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अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन को करोड़ों का नुकसान, खाली बैठे हैं कारोबारी

Janjwar Team
2 March 2020 4:00 AM GMT
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन को करोड़ों का नुकसान, खाली बैठे हैं कारोबारी
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नजीर अहमद ने बताया कि बहुत मुश्किल से जीवन बिता रहे हैं। कुछ कमाई है ही नहीं, सारे खाली बैठे हुए हैं। पैसे मांगकर बच्चों की फीस दे पा रहे हैं, काम तो पिछले छह महीने से सब ठप्प पड़ा है, उसकी बड़ी वजह यह कि इन्होंने इंटरनेट बंद किया हुआ है..

श्रीनगर से फैजान मीर की रिपोर्ट

जनज्वार। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त किए हुए सात महीने बीत चुके हैं। इन सात महीनों मे सबसे ज्यादा कोई क्षेत्र प्रभावित हुआ है तो वह टूरिज्म है। युवा बेरोजगार बैठे हैं तो होटल, हाउसबोट, टैक्सी आदि चलाने वाले खाली बैठे हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद लोगों को कितना नुकसान झेलना पड़ा है, हमने यहां के स्थानीय लोगों से जानने की कोशिश की।

मुश्ताक अहमद कहते हैं, 'हम पूरा यात्रियों पर ही निर्भर हैं। लेकिन अभी हम सफर कर रहे हैं। हमें हद से ज्यादा मुश्किलात का सामना करना पड़ा। गाड़ियों के डॉक्यूमेंट्स रिन्यू करने तक के लिए हमारे पास पैसे भी नहीं बचे हैं। हाउसबोट, होटल्स, टैक्सी स्टैंड वाले सब खाली बैठे हैं, सभी यात्रियों पर निर्भर हैं। सरकार से हम अपील करते हैं कि वह हमारे बारे में सोचे।'

अहमद ने बताया कि बहुत मुश्किल से जीवन बिता रहे हैं। कुछ कमाई है ही नहीं। सारे खाली बैठे हुए हैं। पैसे मांगकर बच्चों की फीस दे पा रहे हैं। काम तो पिछले छह महीने से सब ठप्प पड़ा है। उसकी बड़ी वजह यह कि इन्होंने इंटरनेट बंद किया हुआ है। हमारे जो पुराने क्लाइंट भी थे वो आते भी थे। वो पूछ रहे हैं कि वहां हालत कैसे हैं तो हम कह रहे हैं कि हालत ठीक हैं। लेकिन उनको पहले से ही डर बैठा हुआ है कि फोन इंटरनेट बंद है। तो कोई नहीं आ रहा है। हालत बहुत ही खराब है। सरकार से अपील है कि इंटरनेट फिर से रिस्टोर करे। हमारा सबकुछ टूरिज्म पर निर्भर है।

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फैयाज अहमद बताते हैं कि 5 अगस्त से इंटरनेट बंद हुआ है। मेरे पास दस गाड़ियां हैं। इसके अलावा मैं टूरिज्म और बहुत सारी कंपनियों लॉजिस्टिक डिपार्टमेंट देखता हूं। जब यात्री आते ही नहीं है, इंटरनेट नहीं है, इधर कुछ नहीं है। हमारे ड्राइवरों को बहुत नुकसान हुआ है। क्या करें हम जेब से सैलरी देते हैं, उनका भी परिवार है। जितना हमारा नुकसान हुआ है उतना किसी का नहीं हुआ होगा। होटल में कभी 80 लोगों का स्टाफ होता था उसमें आज पांच लोगों का स्टाफ है। 75 लोग नौकरी से निकाले वो बेचारे कहां जाएंगे। टूरिज्म से जुड़े लोग बहुत परेशानी में हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद मेरा 20-25 लाख का नुकसान हो गया। सरकार को कोई विकल्प निकालना चाहिए।

दूसरे मुश्ताक अहमद बताते हैं कि यहां पर जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कोई नहीं कर पाएगा। बहुत नुकसान हो गया है। पूरा कश्मीर टूरिज्म पर निर्भर है। जब हम कमाएंगे, होटल वाले कमाएंगे, हाउसबोट वाले कमाएंगे, टैक्सी ड्राइवर कमाएंगे तभी हम लोकेलटी में वह पैसा खर्च कर पाएंगे। जब हम कमाएंगे तभी दुकानदार भी कमा पाएंगे। 2019 से कोई पूछने वाला नहीं आया है। जो है ऊपर वाला है।

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रिश रशीद खान कहते हैं, 'मैं यहां पर ड्राइवर हूं। टूरिज्म से जो भी लिंक रखता है उससे कोई ऐतराज नहीं कर सकता है कि नुकसान हुआ है। नुकसान तो 2014 से हुआ है। तब भी काम आता था लेकिन इतना नुकसान नहीं हुआ था जितना अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुआ है। जो हम नुकसान झेल रहे हैं उसपर किसी की नजर नहीं है और जो नजर रख भी रहे हैं वो अनदेखा कर रहे हैं। उनको समझना चाहिए कि कश्मीर 85 प्रतिशत टूरिज्म पर निर्भर है।'

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