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ओझा ने कहा सांप काटने से नहीं डायन पति-पत्नी के चलते हुई है बच्ची की मौत तो ग्रामीणों ने बुजुर्ग दंपती की कर दी हत्या

Janjwar Team
24 May 2018 10:54 AM GMT
ओझा ने कहा सांप काटने से नहीं डायन पति-पत्नी के चलते हुई है बच्ची की मौत तो ग्रामीणों ने बुजुर्ग दंपती की कर दी हत्या
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बच्ची की सांप काटने से हुई मौत के बाद ओझा भगत एतवा मुंडा ने गांव वालों से कहा कि इन दोनों डायन पति-पत्नी के कारण बच्ची की मौत हुई है, इन पर जो भूत है वह तब तक नहीं भागेगा, जब तक ये दोनों जिन्दा हैं। भगत एतवा मुंडा द्वारा इस फरमान के बाद ही गांव वालों ने दोनों की हत्या कर उनके शव को जंगल में गाड़ दिया...

रांची से विशद कुमार की रिपोर्ट

जनज्वार। देश की आजादी के 70 साल और झारखंड अलग राज्य गठन 17 सालों में केन्द्र और राज्य में कई सरकारें आईं। विकास के कई कई दावे किए गए, विकास के कई कई योजनाएं बनीं, देश व राज्य में कई बदलाव हुए, सूचना प्रौद्योगिकी से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में भी कई क्रान्तिकारी बदलाव हुए।

बावजूद झारखंड के आदिवासी गांवों में जहां एक तरफ विकास की रौशनी की टिमटिमाहट भी नजर नहीं आती, वहीं आदिवासी समाज आज भी अंधविश्वास व अवैज्ञानिक जीवन पद्धति से मुक्त नहीं हो पाया है। परिणामत: आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भूत—पिशाच, जादू—टोना, झाड़—फूक जैसे अंधविश्वास के कारण आए दिन डायन—बिसाही के आरोप में महिलाओं की हत्याएं हो रही हैं।

पिछले दिनों इसी तरह एक मामला प्रकाश में आया। डायन—बिसाही के आरोप में एक दंपत्ति की हत्या कर दी गई। 2 मई को नामकुम प्रखंड हुआंगहातु पंचायत के सुकरीडीह गांव में लोहर सिंह मुंडा और उसकी पत्नी कैरी देवी की गांव के अखड़ा में ही ग्रामीणों ने डायन-बिसाही का आरोप लगाकर पीट-पीट कर मार डाला। इस क्रूरतम हत्या के बारे में सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं और दिल कांपने लगता है।

खबर के मुताबिक एक बच्ची की सांप काटने से हुई मौत के बाद ओझा के कहने पर कि बुजुर्ग दंपती में डायन—भूत है, को न सिर्फ ग्रामीणों और मृतक बच्ची के परिजनों ने मारा-पीटा, बल्कि खबर पुलिस तक न पहुंचे इस डर से जंगल में गाड़कर दफना भी दिया।

गौरतलब है कि 2008 में भी मृतक दंपत्ति पर डायन-बिसाही का आरोप लगा कर पंचायत में 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उस समय माओवादी कुंदन पाहन ने अपने भाई श्याम पाहन से चिरुडीह के ग्रामीणों को फोन करवा कर जुर्माने की रकम वापस करने का आदेश दिया था। तब भयवश ग्रामीणों ने जुर्माने के तौर पर ली रकम वापस कर दी थी, क्योंकि लोहर सिंह मुंडा और उसकी पत्नी तब के माओवादी पार्टी में सक्रिय रह चुके कुंदन पाहन के सगे मौसा-मौसी थे। बता दें कि 2017 में कुंदन पाहन ने नक्सल सरेंडर नीति के आलोक में सरेंडर कर दिया है।

2008 से 2 मई 2018 के बीच लोहर सिंह मुंडा और उसकी पत्नी कैरी देवी पर पंचायत में चार बार जुर्माना लगाया गया है। गांव में जब कभी भी किसी कारणवश किसी की मौत होती, तब उस मौत का आरोप इसी दंपत्ति पर लगाया जाता। 2 मई 2018 को इस दम्पत्ति की हत्या से पूर्व इसी गांव के बिन्दु मुंडा की बेटी की मौत सांप काटने से हो गई थी, इसके लिए भी लोहर सिंह मुंडा और कैरी देवी को दोषी ठहराया गया।

खूंटी जिला अंतर्गत भंडरा स्थित कांकी गांव का रहने वाला भगत (ओझा) एतवा मुंडा ने हत्या से पूर्व इस दंपत्ति पर 35 हजार रुपये नगद, 1 बैल, 6 खस्सी, 8 मुर्गा और बत्तख सहित एक सुअर देने का जुर्माना लगाया था। जिस जुर्माने को भरने के लिए लोहर सिंह मुंडा को अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी।

बावजूद इसके भगत एतवा मुंडा ने गांव वालों से कहा कि इन दोनों के उपर जो भूत है वह तब तक नहीं भागेगा, जब तक ये दोनों जिन्दा हैं। भगत (ओझा) एतवा मुंडा द्वारा इस फरमान के बाद ही गांव वालों ने दोनों की हत्या कर उनके शव को जंगल में गाड़ दिया था।

भगत (ओझा) एतवा मुंडा उसी इलाके का है जहां पत्थलगड़ी परवान पर है और पुलिस भी उस इलाके में जाने की हिम्मत नहीं कर पा रही है, क्योंकि पिछले 25 अगस्त 2017 को इसी क्षेत्र के कांकी सिलादोन गांव के लोगों ने खूंटी के डीएसपी रणवीर कुमार सहित पुलिस टीम को बंधक बना लिया था।

ग्रामीणों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई थी। पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी थी। करीब 24 घंटे के बाद बंधक बने पुलिसकर्मियों को मुक्त कराया जा सका था।

15 मई को जब ताजा टीवी के संजय वर्मा, जिला परिषद् सदस्य सह बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर और हुआंगहातु पंचायत की मुखिया के साथ पत्रकारों की टीम सुकरीडीह गांव पहुंची, तब वहां कई घरों में ताला लटका हुआ था। चूंकि इस टीम में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल के जवान भी थे, अत: यह संभावना थी कि हत्या के नामजद आरोपियों के साथ साथ अन्य पुरुष सदस्य भी गांव छोड़ चुके थे।

इस दौरान जिस अखड़ा में लोहर सिंह मुंडा और उसकी पत्नी की हत्या हुई थी, उसी अखड़ा में टीम ने गांव की महिलाओं के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। महिलाओं ने जो बताया उसे सच मानें तो बिन्दु मुंडा (उस मृतक बच्ची के पिता जिसकी मौत सांप के काटने से हुई थी) ने सबसे पहले लोहर सिंह मुंडा को पंचायत में थप्पड मारा था, लेकिन तभी मुंडा मुंडा (लोहर सिंह मुंडा का पुत्र) ने बिन्दु मुंडा को मारने से रोका और खुद पास ही पड़े लकड़ी के टुकड़े को उठाकर अपने पिता को पीटने लगा, जिसके बाद उसकी मौत हुई।

जबकि मुंडा मुंडा ने ग्रामीणों के इस आरोप को बेबुनियाद बताया। वह कहता है कि सब जानते हैं कि मेरे मां—बाप की हत्या भगत एतवा मुंडा के यह कहने के बाद हुई है कि 'इन दोनों के मरने के बाद ही इनके शरीर से भूत भागेगा।' जिसके बाद ही अखड़ा में मेरे मां—बाप की हत्या कर दी गई।

वैसे तो इस हत्या के आरोप में 18 मई को पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, मगर मुख्य आरोपी एतवा मुंडा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। (फोटो : प्रतीकात्मक)

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