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शाहीन बाग आंदोलन को बदनाम करने के लिए अब शुरू हुआ ईडी का इस्तेमाल ?

Nirmal kant
28 Jan 2020 12:19 PM GMT
शाहीन बाग आंदोलन को बदनाम करने के लिए अब शुरू हुआ ईडी का इस्तेमाल ?
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जनज्वार। केंद्र की मोदी सरकार ने शाहीनबाग के सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन को कुचलने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के जरिए नया पैंतरा चल दिया है। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गृहमंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें बताया गया है कि केरल स्थित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने सीएए-एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में पैसा लगाया है।

प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने देश के वरिष्ठ वकीलों को भी पैसा दिया है। रिपोर्ट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह और दुष्यंत दवे सहित अन्य लोगों के नाम का जिक्र गया है।

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डी के अनुसार कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और दुष्यंत दवे सहित अन्य लोगों ने पीएफआई से पैसा लिया है। लेकिन रिपोर्ट में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि ये लेन-देन सीएए के विरोध के संबंध में ही किए गये हैं। वहीं इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पीएफआई से पैसा लेने से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पीएफआई से लिया गया पैसा पेशेवर कामों के लिए था।

डी भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक विशेष वित्तीय जांच एजेंसी है। यह एजेंसी भारत में विदेशी सम्पत्ति मामला, धन-शोधन, आय से अधिक संपत्ति की जांच करती है।

सिब्बल ने इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा, 'मुझे यह पैसा 2017-18 में हुए हदिया केस के लिए दिया गया है। मैंने अपना बिल अधिवक्ता को भेजा था जिसके लिए मुझे भुगतान किया गया है। वहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने आरोपों से साफ़ इनकार कर दिया।'

हीं इंदिरा जयसिंह ने एक लिखित बयान में कहा कि उन्हें पीएफआई से कोई पैसा नहीं मिला है। यह भी कहा कि मेरे द्वारा किए जाने वाले पीएफआई खाते से लेन-देन का विवरण दिखाने वाले नोट में कोई हस्ताक्षर या तारीख नहीं है और न ही इसमें उस एजेंसी का नाम शामिल है इसलिए इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता।

प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट कहती है, सबूतों का सार यह साबित करता है कि पीएफआई ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के आयोजन के लिए पैसा जुटाया है। ईडी के अनुसार पीएफआई और उसकी संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों के लेन-देन की तारीखों और देश भर में सीएए-एनआरसी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में सीधा संबंध देखा जा सकता है।

डी रिपोर्ट के अनुसार 4 दिसंबर 2019 को संसद में CAB के पेश होने के एक महीने के अंदर ही पीएफआई और उस से सम्बंधित संगठनों के पांच खातों में 1.04 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आ गई थी। संगठनों के खातों में कौन पैसे डाल रहा है, इसकी पहचान छुपाने के लिए 5000 से लेकर 49000 तक के ही ट्रांजिक्शन किए गए और इसी तरीके से पैसा वापस भी निकाल लिया गया। 4 दिसंबर से लेकर 6 जनवरी के बीच 1.34 करोड़ रुपये निकाल भी लिए गए।

की रिपोर्ट में साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया संगठन को 120.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे| इस पूरे पैसे को संगठन के खाते से दो या तीन दिन के भीतर ही वापस निकाल लिया गया था| केरल के कोझीकोड में मूवर रोड पर सिंडिकेट बैंक की शाखा में पीएफआई के खाते से 777 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। यह पैसा विभिन्न कंपनियों और लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया था।

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डी के अनुसार इन लोगों में सिब्बल (77 लाख रुपये), जयसिंह (4 लाख रुपये), डेव (11 लाख रुपये), पीएफआई कश्मीर (1.65 करोड़ रुपये), न्यू ज्योति ग्रुप (1.17 करोड़) और एक अब्दुल समद ( 3.10 लाख रुपये), एनआईए द्वारा आरोपित एक अभियुक्त को पैसे ट्रांसफर किये गए।

पीएफआई के महासचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने संगठन और सीएए विरोध के बीच किसी भी प्रकार के पैसों के लेन-देन से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल, दवे और इंदिरा जयसिंह को जो भुगतान किये गए ये सभी हदिया केस को लेकर किए गए थे और सार्वजनिक रूप से घोषित किए गए थे। पीएफआई ने यह भी कहा कि सीएए के विरोध के ठीक पहले 120 करोड़ पूरी तरह गलत हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की जम्मू-कश्मीर में कोई ब्रांच ही नहीं है।

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