Begin typing your search above and press return to search.
उत्तर प्रदेश

UP के अस्पताल ने जिंदा युवक को मरा हुआ बता परिजनों के पास दाह-संस्‍कार के लिए भेज दी कोरोना मरीज की लाश

Prema Negi
26 May 2020 1:04 PM GMT
UP के अस्पताल ने जिंदा युवक को मरा हुआ बता परिजनों के पास दाह-संस्‍कार के लिए भेज दी कोरोना मरीज की लाश
x

अपने कलेजे के टुकड़े का चेहरा अंतिम बार देखने के लिए जब पिता ने लाश से कपड़ा हटाया तो रह गये सन्न, क्योंकि लाश उनके बेटे की नहीं एक अधेड़ व्यक्ति की थी...

जनज्वार, बस्ती। कोरोना की भयावहता और बढ़ते मामलों से पहले ही लोग बहुत परेशान हैं, ऐसे में अस्पतालों की लापरवाही ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाने का ही काम किया है। कई मामलों में बिना टेस्ट के लोगों को कोरोना पॉजिटिव बताया जा रहा है तो कहीं इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं।

ब उत्तर प्रदेश के बस्ती में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक बस्ती के ओपेक अस्पताल कैली से लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। वहां भर्ती संतकबीरनगर के एक युवक को जीते जी मृत बताकर किसी अन्‍य का शव दाह-संस्‍कार के लिए उसके परिजनों के पास भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें : आदिवासी युवक को कुत्ते ने काटा, 7 अस्पतालों में ले गया पिता लेकिन कोरोना के चलते इलाज न मिलने से मौत

स्पताल की लापरवाही तब सामने आयी जब जिस युवा का शव भेजा गया था, उसके पिता ने श्मशान घाट पर अपने बेटे का चेहरा देखा। लाश का चेहरा देखकर पिता और अन्य परिजन सन्न रह गये, क्योंकि लाश उनके बेटे की नहीं थी। दूसरे की लाश भेजे जाने के बाद परिजनों ने अस्पताल में संपर्क किया तो पता चला कि उनका बेटा जिंदा है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

जिस लाश को पीड़ित परिवार के बेटे की बताकर कैली अस्‍पताल ने भेजा था, वो धर्मसिंहवा इलाके के महादेवा नानकार के 47 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव मरीज की थी। अस्पताल की लापरवाही से उसकी लाश महुली थाना क्षेत्र में भेज दी गयी। जिसकी लाश युवक के परिजनों को भेजी गयी, वह कोरोना पॉजिटिव भी कैली अस्पताल में ही भर्ती था और उसका इलाज वहां चल रहा था।

यह भी पढ़ें : कोरोना पॉजिटिव महिला की मौत के बाद बेटा नहीं चुका पाया बिल तो मैक्स मोदी अस्पताल ने रोक लिया शव

स मामले में पुलिस का कहना है कि महुली थाना क्षेत्र के मथुरापुर गांव निवासी 25 वर्षीय युवक बस्ती कैली में कमरा नंबर 229 में बेड नंबर 5 पर भर्ती है और वह ​जिंदा है। अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है।

स्पताल द्वारा फोन से गलत सूचना दिए जाने से इस तरह की लापरवाही हुई, जिसने एक परिवार को गम में डुबो दिया। पुलिस का कहना है कि धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के महादेवा नानकार के रहने वाले एक कोरोना पॉजिटिव की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। यह शख्स मुंबई से वापस लौटा था। अस्पताल की लापरवाही के कारण उसका शव महुली थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरापुर का बताकर शव एम्बुलेंस से भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें : झारखंड के पलामू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की संवेदनहीनता का दंश झेलते आदिवासी, गंभीर रोगी अस्पताल से लौट रहे घर

अंतिम संस्कार के लिए एसआई राम अछैबर व पारसनाथ सिंह की निगरानी में लाश बिड़हरघाट भेजी गयी थी। जब उसके पिता ने अपने बेटे को आखिरी बार देखने के लिए चेन खोली तो लाश एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति की थी। बाद में लाश को वापस भेज दिया गया।

स घटना के बाद महुली थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरापुर निवासी जिस युवक की मौत की अस्पताल ने गलत जानकारी दी थी, एहतियात के तौर पर उसके पिता नकछेद व भाई शिव शंकर तथा सोनू को 21 दिन के लिए क्वारन्टीन कर दिया गया है, क्योंकि उनके बेटे की बताकर अस्पताल ने कोरोना पॉजिटिव की लाश भेजी थी।

Next Story

विविध