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कोरोना जांच से भाग रही झारखंड सरकार, 3.25 करोड़ आबादी में सिर्फ 179 लोगों की जांच

Prema Negi
29 March 2020 6:15 AM GMT
कोरोना जांच से भाग रही झारखंड सरकार, 3.25 करोड़ आबादी में सिर्फ 179 लोगों की जांच
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झारखंड में अब तक कोरोना का एक भी मरीज न मिलना चमत्कार नहीं बल्कि हालात के विस्फोटक होने का है पूर्व संकेत...

राहुल सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। पिछले सप्ताह जब देश के अलग-अलग राज्यों से कोरोना पाॅजिटिव मरीजों के मिलने की खबरें आ रही थीं, तब बिहार से एक भी मामले के सामने नहीं आने को उपलब्धि नहीं, बल्कि हालात के विस्फोटक होने का पूर्व संकेत माना गया। इसकी वजह है बिहार के पढे-लिखे तबके व श्रमिक वर्ग दोनों का बड़ी संख्या में महानगरों व दूसरे राज्यों में प्रवास करना और राज्य की बेहद लचर स्वास्थ्य सुविधा व संरचना। अब ऐसी ही स्थिति झारखंड की है।

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झारखंड में अब तक कोरोना का एक भी मरीज नहीं मिला है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के अनुसार, 28 मार्च तक 179 मरीजों के सैंपल की जांच की गयी, जिसमें 175 की रिपोर्ट निगेटिव आयी है और चार अन्य की रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। उन्होंने कहा है कि झारखंड में अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

हीं, झारखंड के सभी पड़ोसी राज्यों बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा व मध्यप्रदेश में कोरोना के मरीज मिले हैं। झारखंड इनमें कम से कम दो प्रदेशों से बहुत ही व्यापक रूप से जुड़ा है: बिहार व पश्चिम बंगाल।

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झारखंड में कोरोना से निबटने के लिए 567 आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं और 1469 बेड को क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में चिह्नित किया गया है। कोरोना प्रभावित देशों से आए लोगों को सर्विलांस टीम द्वारा चिह्नित किया गया है। ऐसे 911 यात्रियों में 163 यात्रियों का 28 दिन का आब्जर्वेशन पीरियड भी पूरा हो गया है। यानी अधिकतर फाॅरेन ट्रेवल हिस्ट्री वालों की जांच भी नहीं हो पायी है। दिलचस्प है कि झारखंड में पूर्व में सिर्फ एमजीएम मेडिकल काॅलेज, जमशेदपुर में कोरोना जांच की सुविधा उपलब्ध थी। हालात के गंभीर होने पर 24 मार्च से यह सुविधा रिम्स, रांची में शुरू किया गया। यानी अब तक सिर्फ दो ही जांच केंद्र सूबे में है।

वा तीन करोड़ की आबादी वाले झारखंड में अब तक मात्र 179 लोगों की सैंपल जांच पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। दरअसल, यूपी-बिहार की तरह ही झारखंड के प्रवासी बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों व महानगरों में रहते हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि आबादी के हिसाब से छोटा राज्य होने के कारण उसका अनुपात इन दोनों सूबों से कम है, लेकिन स्थिति कमोबेश वैसी ही है।

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स बीच स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने राज्य में होने वाली सभी मौतों की जांच कराने का निर्देश जिलों को जारी किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरने वाला व्यक्ति कोरोना पीड़ित तो नहीं था। अगर कोरोना का कोई लक्षण मृतक में मिलेगा तो उसके स्वाब की जांच अनिवार्य रूप से करायी जाएगी। ऐसे मामला पाए जाने पर मृतक के संपर्क में आए सभी लोगों को जांच की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव ने सैंपल लेने में केंद्र सरकार के प्रोटोकाॅल व गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने का भी निर्देश दिया है। जिला स्तर पर क्वारंटइन सेंटर भी बनाए गए हैं।

धर, भाजपा ने यह मांग की है कि दूसरे राज्यों व महानगरों से जो रिवर्स माइग्रेशन हुआ है, उनकी जांच की जाए। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने यह सवाल उठाया है कि झारखंड में अब तक 200 से भी कम लोगों की जांच हुई है, जबकि महाराष्ट्र व केरल जहां सबसे अधिक मरीज मिले हैं, उन राज्यों ने मिलकर सात हजार से अधिक लोगों की जांच की है।

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भाजपा ने मांग की है कि रेंडम सैंपलिंग जोड़कर जांच की जाए और इसमें केंद्र के मानक के अनुरूप प्राइवेट लैब का सहयोग लिया जाए। झारखंड भले पिछड़ा व गरीब सूबा जरूर है, लेकिन यह औद्योगिक राज्य है जहां बड़ी संख्या में विभिन्न प्रांतों के लोग रहते हैं और आवाजाही होती है, ऐसे में खतरे को कम कर नहीं देखा जा सकता है।

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