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राजनीति

राहुल गांधी ने शिवसेना को दिया क्लियर सिग्नल, भाजपा का साथ दिया तो हम साथ नहीं

Nirmal kant
15 Dec 2019 8:19 AM GMT
राहुल गांधी ने शिवसेना को दिया क्लियर सिग्नल, भाजपा का साथ दिया तो हम साथ नहीं
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राहुल गांधी ने सावरकर पर हमला करके शिवसेना को यह अच्छी तरह से एहसास करा दिया है कि यदि भविष्य में भी विवादास्पद मुद्दों पर शिवसेना भाजपा का साथ देती है तो महाराष्‍ट्र में मुश्किलन बनी शिवसेना की सरकार किसी भी समय भरभरा कर ढह सकती है...

जनज्वार। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में 'भारत बचाओ रैली' में यह कह कर कि 'मैं राहुल सावरकर नहीं, राहुल गांधी हूं' एक और जहां केंद्र की मोदी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर करारा हमला बोला, वहीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेत्रत्व में बनी शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस की नई नवेली सरकार को दांव पर लगाकर शिवसेना और उसके सुप्रीमों उद्धव ठाकरे को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि गठबंधन सरकार चलाना है तो नागरिकता बिल पर शिवसेना का दोहरा रवैया कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।

ही नहीं राहुल ने इससे शिवसेना को यह भी जता दिया है कि यदि उसका रवैया महाराष्ट्र में कुछ और रहेगा तथा संसद में कुछ और तो कांग्रेस गठबंधन धर्म को अकेले नहीं निभाएगी। राहुल के इस बयान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अब किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने के पक्ष में नहीं है।

राहुल गांधी ने शनिवार 14 दिसंबर को दिल्ली में 'भारत बचाओ रैली' में कहा कि मैं राहुल सावरकर नहीं, राहुल गांधी हूं। इसलिए किसी बयान पर माफी नहीं मांगूंगा। उन्होंने यह बात 'रेप इन इंडिया' बयान पर भाजपा की माफी की मांग को लेकर कही। भाजपा पर निशाना साधने के लिए वीर सावरकर का जिक्र करने पर महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने आपत्ति जताई। संजय राउत ने कहा कि सावरकर ने राष्ट्र के स्वाभिमान और आजादी के लिए जीवन न्यौछावर कर दिया। वे हमारे लिए देवता के समान हैं। उनका अपमान न करें। शिवसेना वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग कर चुकी है। साथ ही वह हमेशा से उनके विचारों का समर्थन करती रही है।

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शिवसेना ने राज्यसभा की वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला लिया और सदन से वॉकआउट कर लिया। लोकसभा में शिवसेना ने नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया था। दरअसल शिवसेना ने भले ही कुछ दिन पहले दो सेकुलर पार्टियों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई हो लेकिन उसकी विचारधारा हमेशा से हिन्दूवादी रही है। यही वजह है कि राज्यसभा में इस विधेयक का विरोध करना शिवसेना के लिए मुश्किल हो रहा था।

वास्तव में लोकसभा में पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक पर राहुल गांधी ने जैसे ही ट्वीट कर बयान जारी किया, वैसे ही शिवसेना की भूमिका बदल गई। एनसीपी ने कहा कि दोनों पार्टियां अलग हैं और उनके लिए हमेशा सभी मुद्दों पर समान विचार रखना संभव नहीं है। सोमवार 9 दिसंबर को लोकसभा में शिवसेना ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर बीजेपी का साथ देते हुए विधेयक के पक्ष में मतदान किया, पर राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करने से पहले शर्त रख दी है।

शिवसेना अध्यक्ष व महाराष्ट्र के मुखिया मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता विधेयक में स्पष्टता के बगैर शिवसेना राज्यसभा में इसका समर्थन नहीं करेगी। लोकसभा में इस विधेयक को पारित करने के दौरान हमारे सांसदों ने कुछ सवाल उठाए थे। मुझे नहीं पता कि गृहमंत्री अमित शाह ने उन सवालों का जवाब दिया अथवा नहीं। पहले इस विधेयक पर राज्यसभा में और चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों का नागरिकता दी जा रही है, वे रहेंगे किस राज्य में? पार्टी के मुख पत्र 'सामना' में भी बीजेपी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया गया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए भाजपा धर्म के नाम पर देश को बांट रही है।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक मंजूर होने के बाद राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, 'नागरिकता संशोधन विधेयक भारतीय संविधान पर हमला है, जो कोई भी इसका समर्थन करता है वो हमारे देश की बुनियाद पर हमला और इसे नष्ट करने का प्रयास कर रहा है।' माना जा रहा है कि राहुल ने इस ट्वीट के जरिए शिवसेना के बिल के समर्थन के फैसले पर नाराजगी जताई है।

राहुल की नाराजगी पर कांग्रेस के नेता शिवेसना पर टूट पड़े। महाराष्ट्र से कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सीधे शिवसेना की भूमिका पर नाराजगी जताई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री नसीम खान ने शिवसेना पर आरोप लगाया कि वह अब भी अप्रत्यक्ष तौर पर बीजेपी के साथ है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है। नागरिक संशोधन विधेयक पर शिवसेना ने अपने मित्र दलों को क्यों विश्वास में नहीं लिया? कांग्रेस प्रवक्ता चरणजीत सिंह सप्रा, महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव सचिन सावंत ने भी शिवसेना की आलोचना करते हुए साझा न्यूनतम कार्यक्रम का पालन करने की सलाह दी।

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राहुल गांधी ने सावरकर पर हमला करके शिवसेना को यह अच्छी तरह से एहसास करा दिया है कि यदि भविष्य में भी विवादास्पद मुद्दों पर शिवसेना भाजपा का साथ देती है तो महाराष्‍ट्र में मुश्किलन बनी शिवसेना की सरकार किसी भी समय भरभरा कर ढह सकती है। दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली को संबोधित करते राहुल गांधी ने कहा मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था सहित तमाम मुद्दों को लेकर पीएम मोदी को आड़े हाथ लिया।

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