Top
अंधविश्वास

अंधविश्वास ने हत्यारा बनाया फेमस डोसा किंग को, अस्पताल में हुई हार्ट अटैक से मौत

Prema Negi
19 July 2019 3:48 AM GMT
अंधविश्वास ने हत्यारा बनाया फेमस डोसा किंग को, अस्पताल में हुई हार्ट अटैक से मौत

ज्योतिष के कहने पर शादीशुदा जीवज्योति से जबरन शादी करने के लिए राजगोपाल ने उसे, उसके पति और परिवार को धमकाया महीनों तक, पति के साथ की गई मारपीट और अन्य तमाम ज्यादतियां, मगर किसी से सफलता नहीं मिली, तो किया हत्या का रास्ता अख्तियार....

जेपी सिंह की रिपोर्ट

क्कीसवीं शताब्दी में भी अंधविश्वास और टोने—टोटके के प्रति आस्था अक्सर जेल जाने कारण बन जाती है। ज्योतिषी की सलाह पर देश का सबसे अमीर व्यक्ति बनने के लिए किसी व्यक्ति विशेष से विवाह करने की ज़िद में किसी की हत्या जैसा नृशंस एवं जघन्य कार्य करने में न केवल कई ज़िदगियां बर्बाद हो जाती हैं, बल्कि उम्रकैद का दंड भी भुगतना पड़ता है।

सी तरह के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 'डोसा किंग' के नाम से मशहूर पी राजगोपाल की मौत हो गई है। चेन्नै के एक प्राइवेट अस्पताल में राजगोपाल ने गुरुवार 18 जुलाई की सुबह आखिरी सांस ली। कुछ दिन पहले ही राजगोपाल ने आत्मसमर्पण किया था। राजगोपाल के पतन और वर्तमान दोष के लिए भी एक ज्योतिषी की सलाह को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसने उसे देश में सबसे अमीर व्यक्ति बनने के लिए जीवज्योति नाम की विवाहित महिला से शादी करने के लिए कहा था।

हा जाता है कि साल 2000 में राजगोपाल ने एक ज्योतिष की सलाह ली और अपने कर्मचारी की बेटी से शादी करने का फैसला किया। राजगोपाल की नजर कर्मचारी की बेटी पर कई दिनों से थी। वह युवती पहले से शादीशुदा थी और उसने पहले ही राजगोपाल का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, लेकिन राजगोपाल को ना सुनने की आदत नहीं थी।

बरन शादी करने के लिए राजगोपाल ने जीवज्योति, उसके पति और परिवार को महीनों तक धमकाया, जीवज्योति के पति के साथ मारपीट और अन्य तमाम ज्यादतियां की गयीं, मगर किसी से सफलता नहीं मिली, तो हत्या का रास्ता अख्तियार किया।

यह भी पढ़ें : भाजपा सांसद अजय भट्ट ने बतायी वो तकनीक जिससे बच्चा पैदा करने के लिए ऑपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी!

जीवज्योति सर्वना भवन की चेन्नई शाखाओं में से एक के सहायक प्रबंधक की बेटी थी। राजगोपाल की सलाह और धमकियों के बावजूद जीवज्योति ने प्रिंस शांथाकुमार से शादी कर ली। अक्तूबर 2001 को इस दंपती का अपहरण कर लिया गया और शांथाकुमार की हत्या कर दी गई। उसका शव 31 अक्टूबर, 2001 को कोडाइकनाल स्थित टाइगर चोल जंगलों के अंदर से वन विभाग के अधिकारियों ने बरामद किया था।

शांथाकुमार की हत्या के लिए 2004 में चेन्नई की एक सत्र अदालत ने राजगोपाल और आठ अन्य को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। राजगोपाल ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। 2009 में हाईकोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी। तब राजगोपाल ने उच्चतम न्यायालय में अपील की। मार्च 2019 को कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

हालांकि राजगोपाल ने अपने खराब स्वास्थ्य को देखते हुए आत्मसमर्पण करने के लिए और समय देने की गुहार लगाई थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद उसे दिल का दौरा पड़ा था और वो चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती था, लेकिन गुरुवार की सुबह पी. राजगोपाल का निधन हो गया।

यह भी पढ़ें —अंधविश्वास की हाईट : बच्चों को अंडा खाने से वंचित रखने के लिए छत्तीसगढ़ में हो रहा आंदोलन

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने 7 जुलाई की आत्मसमर्पण तिथि को आगे बढ़ाने की याचिका को खारिज कर दी थी, क्योंकि मामले में अपील की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बीमारी का मुद्दा नहीं उठाया गया था। न्यायालय ने कहा था कि हमारे विचार में प्रिंस शांथाकुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी गयी थी, इसके बाद शव को टाइगर चोल में फेंक दिया था। राजगोपाल पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 364 (अपहरण) और 201 (सबूतों को नष्ट करना) के तहत आरोप लगाए गए थे।

देवी-देवताओं, आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष पर हद से ज्यादा भरोसा करने वाले डोसा किंग ने इस बीच दो शादियां कीं, पर यह दोनों शादियां लंबी नहीं चलीं। इस वजह से राजगोपाल फिर से ज्योतिष की शरण में गया। वर्ष 2000 में उसने ज्योतिष की सलाह पर तीसरी शादी करने का फैसला किया। जिस महिला से उसने शादी करने का फैसला किया वह सर्वाना भवन के एक कर्मचारी रामास्वामी की बेटी जीवज्योति थी, लेकिन वह पहले से ही शादीशुदा थी। उसका पति प्रिंस शांथाकुमार भी सर्वाना भवन का ही कर्मचारी था।

यह भी पढ़ें : अंधविश्वासी परिजनों ने जिस तांत्रिक को भूत भगाने के लिए आदर-सत्कार से बुलाया था अपने घर, वही बेटी का बलात्कार कर हुआ फरार

जीवज्योति ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ सांथाकुमार से लव मैरिज की थी। जीवज्योति को देखकर राजगोपाल उस पर मोहित हो गया था और उसे रोजाना फोन करना शुरू कर दिया। वह उसे महंगे उपहार देने लगा। राजगोपाल के फोन कॉल और महंगे तोहफे से परेशान होकर जीवज्योति ने राजगोपाल की शिकायत पुलिस से करने की धमकी दी, लेकिन राजगोपाल नहीं माना।

ससे परेशान होकर प्रिंस शांथाकुमार और उसकी पत्नी ने चेन्नई छोड़ने का फैसला किया। अभी वो लोग चेन्नई छोड़ पाते, उससे पहले ही 28 सितंबर, 2001 को पी राजगोपाल उनके घर आया और धमकी देकर गया कि दो दिन के अंदर जीवज्योति अपने पति से रिश्ता तोड़ दे। परेशान होकर जब यह जोड़ा चेन्नई से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था तो राजगोपाल के गुंडों ने शांथाकुमार का अपहरण कर लिया। इस बीच प्रिंस शांथाकुमार 12 अक्टूबर, 2001 को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बच निकला और सीधे पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में चला गया। इसके बाद तो पुलिस को राजगोपाल के खिलाफ शिकायत सुननी पड़ी।

सके बाद प्रिंस शांथाकुमार और उसकी पत्नी को लगा कि अब मामला सुलझ जाएगा, लेकिन 18 अक्टूबर को एक बार फिर से प्रिंस शांथाकुमार का उसके परिवार के साथ अपहरण हो गया। इसके बाद 26 अक्तूबर 2001 को जोड़े को अगवा करके तिरुचेंदूर लाया गया, जहां प्रिंस शांथाकुमार को उसके परिवार से अलग करके उसकी हत्या कर दी गई। शांथाकुमार का शव 31 अक्टूबर को कोडाईकनाल की पहाड़ियों के जंगल में मिला था।

यह भी पढ़ें : तरुण सागर की वीभत्स अंतिम यात्रा, इस अंधविश्वास की हो रही चौतरफा आलोचना

सके बाद जीवज्योति ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट का फैसला लड़की के पक्ष में आया और डोसा किंग के नाम से मशहूर राजगोपाल पर केस दर्ज करने का आदेश दिया गया। पुलिस ने राजगोपाल के खिलाफ अपहरण, हत्या की साजिश और हत्या का केस दर्ज कर लिया। पुलिस अब राजगोपाल को तलाश रही थी, जिसके बाद 23 नवंबर, 2001 को राजगोपाल ने चेन्नई पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

निचली अदालत ने राजगोपाल को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था और उसे 10 साल की सजा सुनाई थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने इस सजा को बढ़ाकर उम्रकैद कर दिया था। आरोपी ने इस सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। हालांकि, उसे सर्वोच्च अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। उच्चतम न्यायालय ने 29 मार्च को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए सर्वाना भवन के मालिक पी राजगोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले से जुड़े पांच अन्य लोगों को भी सजा सुनाई गई।

यह भी पढ़ें : झारखंड में डायन के संदेह में मां-बेटी की हत्या, तो राजस्थान में बुजुर्ग महिला के गुप्तांग में भरी लाल मिर्च

र्ष 1981 से पी. राजगोपाल ने अपना सफर चेन्नई में एक जनरल स्टोर के साथ किया था। इसे मद्रास के नाम से खोला गया था, लेकिन इसमें उसको ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उसने सर्वना भवन के नाम से एक रेस्टोरेंट खोला, इस रेस्टोरेंट में सांभर, वडा, इडली, डोसा जैसी चीजें शामिल की गईं। सर्वना भवन अच्छा—खासा चल पड़ा। सर्वना भवन का डोसा पूरे चेन्नई में फेमस हो गया और राजगोपाल डोसा किंग के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

यह भी पढ़ें : डायन कहकर विधवा महिला को खिलाया मानव मल, मारपीट के बाद काट डाले बाल

चेन्नई में सर्वना भवन की कामयाबी को देखते हुए पी राजगोपाल ने लेसेस्टर स्क्वायर से लेक्सिंगटन एवेन्यू तक सर्वना भवन की शाखाएं खोलीं। इसी के साथ देश में सभी प्रमुख जगहों पर इसकी शाखाएं खोली गईं। साउथ इंडियन खाने के शौकीन लोगों के लिए ये बेहतरीन विकल्प बन गया। विदेशों में भी सर्वना भवन की 80 शाखाएं खुली गयीं। यूनाइटेड स्टेट, गल्फ कंट्री, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी आज सर्वना भवन की शाखाएं खुली हुई हैं, मगर अंधविश्वास ने डोसा किंग को कहीं का नहीं छोड़ा। ज्योतिषी के चक्कर में आकर उसने अपनी जान भी गंवा दी।

Next Story

विविध

Share it